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नवरात्र में बरसेगी मां की कृपा, बन रहा सर्वार्थ सिद्धि-अमृत योग, जानें शुभ मुहूर्त और पूजा विधि
Sun, 29 Sep 2019 09:36 AM IST
मुकेश कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
Published by: मुकेश कुमार
Updated Sun, 29 Sep 2019 09:36 AM IST
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navratri 2019
- फोटो : अमर उजाला
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शारदीय नवरात्र का रविवार से शुभारंभ हो गया है। इस बार सभी तिथियां पूर्ण हैं। यानि नवरात्र नौ दिन के होंगे। माता रानी की कृपा बरसेगी, क्योंकि सर्वार्थ सिद्धि, अमृत सिद्ध और रवि योग बन रहा है। इन योगों के एक साथ बनने से शुभता, सुख समृद्धि, यश वैभव एवं शक्ति की प्राप्ति होती है।
सभी मनोरथ पूर्ण होते हैं सर्वार्थ सिद्धि योग में
आचार्य डॉ. हरिगोपाल शर्मा ने बताया कि सर्वार्थ सिद्धि योग में सभी मनोरथ पूर्ण होते हैं। अमृत और रवि योग से शक्ति और ऊर्जा मिलती है। शारदीय नवरात्र में मां की कृपा बरसेगी, देश को नई शक्ति और नई ऊर्जा मिलेगी।
शुभ मुहूर्त : सूर्योदय से दोपहर 12 बजे तक
(कलश, चौकी स्थापना आदि के लिए)
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सभी मनोरथ पूर्ण होते हैं सर्वार्थ सिद्धि योग में
आचार्य डॉ. हरिगोपाल शर्मा ने बताया कि सर्वार्थ सिद्धि योग में सभी मनोरथ पूर्ण होते हैं। अमृत और रवि योग से शक्ति और ऊर्जा मिलती है। शारदीय नवरात्र में मां की कृपा बरसेगी, देश को नई शक्ति और नई ऊर्जा मिलेगी।
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शुभ मुहूर्त : सूर्योदय से दोपहर 12 बजे तक
(कलश, चौकी स्थापना आदि के लिए)
पूजा विधि
माता की चौकी
विधि : पूर्व या उत्तर दिशा में स्थापना करें, लाल या पीला वस्त्र बिछाएं।
मान्यता: प्रतिमा या तस्वीर की स्थापना होती है, ऐसे माता को आमंत्रित किया जाता है।
कलश स्थापना
विधि : कलश में सिक्का, चावल, चंदन डालें, नारियल से ढक दें।
मान्यता: कलश शुभता का प्रतीक है, इससे समृद्धि आती है।
जौं की बुवाई
विधि : मिट्टी से भरे पात्र में जौं डाल दें, पानी दें।
मान्यता: संपति वृद्धि के लिए बोए जाते हैं, जौं धन आने का सूचक भी है।
हवन
विधि : आम की लकड़ी जलाएं, घी, गुग्गल इत्यादि डालें, लौंग का जोड़ा चढ़ाएं।
मान्यता: वृद्धि हवन/ यज्ञ की आहुति माध्यम होती है मां तक प्रार्थना पहुंचाने का
विधि : पूर्व या उत्तर दिशा में स्थापना करें, लाल या पीला वस्त्र बिछाएं।
मान्यता: प्रतिमा या तस्वीर की स्थापना होती है, ऐसे माता को आमंत्रित किया जाता है।
कलश स्थापना
विधि : कलश में सिक्का, चावल, चंदन डालें, नारियल से ढक दें।
मान्यता: कलश शुभता का प्रतीक है, इससे समृद्धि आती है।
जौं की बुवाई
विधि : मिट्टी से भरे पात्र में जौं डाल दें, पानी दें।
मान्यता: संपति वृद्धि के लिए बोए जाते हैं, जौं धन आने का सूचक भी है।
हवन
विधि : आम की लकड़ी जलाएं, घी, गुग्गल इत्यादि डालें, लौंग का जोड़ा चढ़ाएं।
मान्यता: वृद्धि हवन/ यज्ञ की आहुति माध्यम होती है मां तक प्रार्थना पहुंचाने का
नवरात्र में यह करें
ज्योतिषाचार्य पूनम वार्ष्णेय के अनुसार
1. नवरात्र में पीले और लाल वस्त्र पहनने चाहिए। काले वस्त्रों से बचना चाहिए।
2. दुर्गा चालीसा, दुर्गा सप्तशती एवं यज्ञ के द्वारा मां की उपासना करनी चाहिए।
3. घर में वातावरण शुद्ध रहना चाहिए, तन और मन पवित्र रखने चाहिए।
4. घर में कलह न हो, खान पान में मदिरा आदि तामसिक चीजों का सेवन न करें।
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1. नवरात्र में पीले और लाल वस्त्र पहनने चाहिए। काले वस्त्रों से बचना चाहिए।
2. दुर्गा चालीसा, दुर्गा सप्तशती एवं यज्ञ के द्वारा मां की उपासना करनी चाहिए।
3. घर में वातावरण शुद्ध रहना चाहिए, तन और मन पवित्र रखने चाहिए।
4. घर में कलह न हो, खान पान में मदिरा आदि तामसिक चीजों का सेवन न करें।
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