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जुमे की नमाज के बाद गुस्से का गुबार

Sat, 13 Dec 2014 02:05 PM IST
ब्यूरो, अमर उजाला आगरा
ब्यूरो, अमर उजाला आगरा Updated Sat, 13 Dec 2014 02:05 PM IST
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muslim became angry after namaz on religion conversion
धर्मांतरण को लेकर सड़क से संसद तक हंगामा बरपा हुआ है। इसके खिलाफ मुस्लिम संगठन मुखर हो गए हैं। वहीं, संघ और भाजपा पूरे प्रकरण से खुद को कोसों दूर रख रही है।
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यह अलग बात है कि विरोधियों के सवालों का जवाब देने के लिए उन्होंने घर वापसी कार्यक्रम में साजिशन बांग्लादेशी घुसपैठियों के प्रवेश को मुद्दा उछाल दिया है। इस बीच मुख्य आरोपी नंदकिशोर अलग-थलग पड़ गया है। संघ ने तो उससे किनारा कर ही दिया है, भाजपा ने भी दूरी बना ली है।
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आठ दिसंबर को धर्म परिवर्तन मामले में 24 घंटे बाद ही यू टर्न आ गया था। सिर पर टोपी लगाकर हवन में आहुति डालने वालों ने न सिर्फ इस आयोजन पर सवाल खड़े कर दिए थे बल्कि इसके सूत्रधार नंदकिशोर वाल्मीकि को भी कटघरे में खड़ा कर दिया। विवाद ने जोर पकड़ा तो बुधवार को नंदकिशोर के खिलाफ मुकदमा भी दर्ज हो गया, अब उस पर इनाम भी घोषित कर दिया गया है।
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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के धर्म जागरण प्रकल्प के प्रांत संयोजक के रूप में सालों से सक्रियता के साथ घर वापसी जैसे कार्यक्रम आयोजित करने वाला नंदकिशोर कभी संघ की आंखों का तारा हुआ करता था। मगर, आठ दिसंबर के बाद अचानक उसे छिटक दिया गया।

इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि संघ ने उसके बचाव में बयान देना तो दूर, बल्कि उसे पहचानने तक से इनकार कर दिया है। संघ के स्थानीय पदाधिकारियों का कहना है कि उनके यहां नंदकिशोर नाम का शख्स है तो सही, लेकिन वह संस्कार भारती से जुड़े हुए हैं, नंदकिशोर वाल्मीकि कोई दूसरा है, जिसको वह नहीं जानते।

नंदकिशोर के बारे में भाजपा की भी ऐसी ही कुछ प्रतिक्रिया है। गुरुवार को भाजपा कार्यालय पर प्रेसवार्ता में ब्रजक्षेत्र अध्यक्ष पुरुषोत्तम खंडेलवाल ने नंदकिशोर को ‘एक नंदकिशोर नाम के व्यक्ति’ संबोधित करते हुए उससे किनारा कर लिया था।

केंद्रीय मंत्री की तीन मांग

पूरे प्रकरण पर केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री प्रो. रामशंकर कठेरिया ने तीन बिंदुओं पर जांच की मांग रखी है। उनका कहना है कि सबसे पहले तो इस पूरे प्रकरण की सत्यता की जांच होनी चाहिए। ताकि यह पता चल सके कि घर वापसी करने वाले स्वेच्छा से आए थे या उनके साथ जबरदस्ती की गई थी। उन्होंने तर्क दिया कि इस तरह से एक साथ इतने सारे लोगों को गुमराह करना आसान नहीं है।


दूसरा, उन्होंने घर वापसी कार्यक्रम में साजिशन कुछ बांग्लादेशी घुसपैठियों के प्रवेश को लेकर भी जांच की मांग की है। बस्ती में रहने वाले सभी लोगों की नागरिकता की गहनता से जांच होनी चाहिए। तीसरी, उन्होंने लोगों के बयान पलटने को लेकर जांच की मांग की है। उनका यह भी कहना है कि जांच में यदि घर वापसी कराने के लिए किसी के साथ जबरदस्ती करने की बात सामने आती है तो दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए।
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