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Fatehpur Sikri: मुगलों के दौर में जहां ढाले जाते थे सोने-चांदी के सिक्के, वहां दिखेगा इतिहास का खजाना
Thu, 18 Apr 2024 08:36 AM IST
धीरेन्द्र सिंह
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
Published by: धीरेन्द्र सिंह
Updated Thu, 18 Apr 2024 08:36 AM IST
सार
फतेहपुर सीकरी में टकसाल की इमारत में इंटरप्रिटेशन सेंटर बनाया गया है। जहां इबादतखाना, फतेहपुर सीकरी का निर्माण समेत कई दुर्लभ पेंटिंग दिखेंगी।
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मुगलिया टकसाल
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
आगरा के फतेहपुर सीकरी की मुगलिया टकसाल, जहां शहंशाह अकबर के शासन में सोने और चांदी के सिक्के ढाले जाते थे, अब वहां पर्यटकों को इतिहास का खजाना मिलेगा। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ने टकसाल की खाली पड़ी इमारत में इंटरप्रिटेशन सेंटर बनाया है, जिसमें पर्यटक कई दुर्लभ पेंटिंग देखने के साथ सीकरी के निर्माण, वैभव और वास्तुकला की जानकारी ले पाएंगे।
शहंशाह अकबर ने जब वर्ष 1569 में फतेहपुर सीकरी को अपनी राजधानी बनाया, तब यहां दीवान-ए-आम के पास सबसे बड़ी टकसाल का निर्माण कराया, जहां सोने-चांदी के शाही मुहर वाले सिक्के ढाले जाते थे। इसी परिसर में एएसआई ने इंटरप्रिटेशन की शुरूआत की है। पर्यटकों को यहां सीकरी के इतिहास की जानकारी न केवल डिस्पले बोर्ड से होगी, बल्कि वीडियो और ऑडियो प्रजेंटेशन के जरिए भी वह मुगलिया राजधानी के बारे में सब कुछ जान पाएंगे।
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के अधीक्षण पुरातत्वविद डॉ. राजकुमार पटेल ने बताया कि फतेहपुर सीकरी में म्यूजियम को नया रंगरूप दिया गया है। वहीं, इंटरप्रिटेशन सेंटर के जरिए पर्यटक सीकरी के भ्रमण से पहले उसके बारे में जानकारी ले सकेंगे। पतसाल आदि क्षेत्रों में रॉक पेंटिंग, उत्खनन के साथ ऐतिहासिक तथ्यों को जान सकेंगे।
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सेंटर में यह दिखेगा खास
फतेहपुर सीकरी में प्रागैतिहासिक काल की राॅक पेंटिंग, मुगल काल में भवनों का निर्माण, शहंशाह अकबर से जुड़ी पेंटिंग, 1986 में हुए उत्खनन, शाही हमाम, बीरबल महल, अनूप तालाब का उत्खनन, वीर छबीली टीले, टकसाल क्षेत्र का उत्खनन और इमारतों की तस्वीरें प्रदर्शित की गई हैं। इबादतखाना की खोज को इंटरप्रिटेशन सेंटर में प्रमुखता दी गई है।
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शहंशाह अकबर ने जब वर्ष 1569 में फतेहपुर सीकरी को अपनी राजधानी बनाया, तब यहां दीवान-ए-आम के पास सबसे बड़ी टकसाल का निर्माण कराया, जहां सोने-चांदी के शाही मुहर वाले सिक्के ढाले जाते थे। इसी परिसर में एएसआई ने इंटरप्रिटेशन की शुरूआत की है। पर्यटकों को यहां सीकरी के इतिहास की जानकारी न केवल डिस्पले बोर्ड से होगी, बल्कि वीडियो और ऑडियो प्रजेंटेशन के जरिए भी वह मुगलिया राजधानी के बारे में सब कुछ जान पाएंगे।
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भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के अधीक्षण पुरातत्वविद डॉ. राजकुमार पटेल ने बताया कि फतेहपुर सीकरी में म्यूजियम को नया रंगरूप दिया गया है। वहीं, इंटरप्रिटेशन सेंटर के जरिए पर्यटक सीकरी के भ्रमण से पहले उसके बारे में जानकारी ले सकेंगे। पतसाल आदि क्षेत्रों में रॉक पेंटिंग, उत्खनन के साथ ऐतिहासिक तथ्यों को जान सकेंगे।
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सेंटर में यह दिखेगा खास
फतेहपुर सीकरी में प्रागैतिहासिक काल की राॅक पेंटिंग, मुगल काल में भवनों का निर्माण, शहंशाह अकबर से जुड़ी पेंटिंग, 1986 में हुए उत्खनन, शाही हमाम, बीरबल महल, अनूप तालाब का उत्खनन, वीर छबीली टीले, टकसाल क्षेत्र का उत्खनन और इमारतों की तस्वीरें प्रदर्शित की गई हैं। इबादतखाना की खोज को इंटरप्रिटेशन सेंटर में प्रमुखता दी गई है।