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अमर उजाला पड़ताल: छत्रपति शिवाजी म्यूजियम का ऐसा हुआ हाल, एसी कबाड़; तीन साल से झाड़ू भी नहीं लगी
Tue, 30 May 2023 07:42 AM IST
धीरेन्द्र सिंह
देश दीपक तिवारी, आगरा
देश दीपक तिवारी, आगरा
Published by: धीरेन्द्र सिंह
Updated Tue, 30 May 2023 07:42 AM IST
सार
2020 में सीएम योगी ने मुगल नाम हटाकर छत्रपति शिवाजी म्यूजियम कराया था। इसके बाद यहां के ढांचे में एक नई ईंट तक नहीं लगी।
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छत्रपति शिवाजी
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
ताजमहल पूर्वी गेट के शिल्पग्राम पार्किंग से चंद कदम की दूरी पर बना म्यूजियम राजनीति की भेंट चढ़ गया है। वर्ष 2020 में सीएम योगी आदित्यनाथ ने मुगल म्यूजियम का नाम बदलकर छत्रपति शिवाजी म्यूजियम रखवा दिया। लगा कि जल्द इसकी दशा बदल जाएगी, पर तीन साल से म्यूजियम के ढांचे में एक नई ईंट तक नहीं लगी। तब से झाड़ू भी नहीं लगवाया गया। म्यूजियम के लिए आए एसी (एयर कंडीशनर) खुले में पड़े कबाड़ हो रहे हैं।
पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने आगरा में मुगल म्यूजियम बनाने का ख्वाब देखा था। बतौर मुख्यमंत्री 2016 में उन्होंने इसका शिलान्यास किया। 141.89 करोड़ रुपये से म्यूजियम का निर्माण टाटा कंपनी को करना था। वही टाटा कंपनी जिसने नए संसद भवन का निर्माण किया है। सूबे में 2017 में सत्ता परिवर्तन हुआ। 2020 तक म्यूजियम का ढांचा व अन्य निर्माण पर 90 करोड़ रुपये खर्च भी हो गए। हालांकि करीब 70 करोड़ रुपये का भुगतान होना बताया गया।
सितंबर 2020 में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विधानसभा चुनाव से पहले मुगल म्यूजियम का नाम बदलकर छत्रपति शिवाजी म्यूजियम रख दिया। तब से यहां काम बंद पड़ा है। सोमवार को अमर उजाला टीम पड़ताल के लिए पहुंची तो म्यूजियम के नाम पर ढांचा खड़ा मिला। चौकीदार ने बताया कि 3 साल से यहां झाड़ू तक नहीं लगा। बिजली कट गई। करीब 10 बीघा क्षेत्र में बनने वाले इस म्यूजियम में झाड़-फूस उग आए हैं। एक कोने में रखे लाखों रुपये कीमत के एसी कबाड़ हो रहे हैं। टाटा कंपनी के ठेकेदार ने बताया कि करीब 20 करोड़ रुपये बकाया है, इसलिए सामान की रखवाली कर रहे हैं।
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म्यूजियम निर्माण को लेकर तीन साल से बैठकों का दौर चल रहा है। दूसरी तरफ निर्माण की गुणवत्ता को लेकर पहले आईआईटी रुड़की की टीम ने जांच की। कुछ कमियां निकलीं। अब फिर आईआईटी बनारस की टीम जांच कर सकती है। एक जांच मंडलायुक्त अमित गुप्ता के निर्देश पर टास्क फोर्स ने भी की है।
इतिहासवेत्ता के मुताबिक, छत्रपति शिवाजी का 100 साल पुराना म्यूजियम दक्षिण मुंबई के फोर्ट विलयम में एलफिस्टन कॉलेज के सामने है। इस वस्तु संग्रहालय का निर्माण वेल्स के राजकुमार की भारत यात्रा के समय मुंबई के उद्योगपतियों ने 1922 में कराया था।
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पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने आगरा में मुगल म्यूजियम बनाने का ख्वाब देखा था। बतौर मुख्यमंत्री 2016 में उन्होंने इसका शिलान्यास किया। 141.89 करोड़ रुपये से म्यूजियम का निर्माण टाटा कंपनी को करना था। वही टाटा कंपनी जिसने नए संसद भवन का निर्माण किया है। सूबे में 2017 में सत्ता परिवर्तन हुआ। 2020 तक म्यूजियम का ढांचा व अन्य निर्माण पर 90 करोड़ रुपये खर्च भी हो गए। हालांकि करीब 70 करोड़ रुपये का भुगतान होना बताया गया।
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सितंबर 2020 में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विधानसभा चुनाव से पहले मुगल म्यूजियम का नाम बदलकर छत्रपति शिवाजी म्यूजियम रख दिया। तब से यहां काम बंद पड़ा है। सोमवार को अमर उजाला टीम पड़ताल के लिए पहुंची तो म्यूजियम के नाम पर ढांचा खड़ा मिला। चौकीदार ने बताया कि 3 साल से यहां झाड़ू तक नहीं लगा। बिजली कट गई। करीब 10 बीघा क्षेत्र में बनने वाले इस म्यूजियम में झाड़-फूस उग आए हैं। एक कोने में रखे लाखों रुपये कीमत के एसी कबाड़ हो रहे हैं। टाटा कंपनी के ठेकेदार ने बताया कि करीब 20 करोड़ रुपये बकाया है, इसलिए सामान की रखवाली कर रहे हैं।
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