Agra News: नगर पालिका चलाती थी 12 अस्पताल, अब दो हेल्थ सेंटर भी नहीं
नगर निगम ने आगरा स्मार्ट सिटी के सहयोग से शहर में 10 जगह स्मार्ट हेल्थ सेंटर शुरू करने की कवायद वर्ष 2019 में शुरू की, जिनमें नगर निगम के गेट पर और आवास विकास कॉलोनी में एक हेल्थ सेंटर शुरू किया गया, पर यह दोनों भी चल नहीं सके।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
जब कमाई लाखों में थी तब आगरा नगर पालिका शहर के लोगों की सेहत का ख्याल रखते हुए 12 अस्पतालों का संचालन कर रही थी। अब जब बजट 800 करोड़ के पार है, तब पीपीपी मॉडल पर बनाए दो हेल्थ सेंटर भी बंद पड़े हैं। 120 साल पहले शहर में नगर पालिका के छत्ता के अस्पतालों में 80 हजार और जीवनीमंडी के अस्पतालों में 68 हजार मरीजों का इलाज किया गया था। तब नगर पालिका तीन अस्पताल, 7 डिस्पेंसरीज और दो मेटरनिटी होम का संचालन करती थी।
नगर निगम सचिवालय के पूर्व कर्मचारी वीरेंद्र सिंह ने बताया कि शहर में लोगों की सेहत, स्वास्थ्य, पढ़ाई, टीकाकरण, पानी, रजिस्ट्री, टैक्स, सीवर आदि सुविधाओं की जिम्मेदारी नगर पालिका के ऊपर हुआ करती थी। नगर महापालिका के गठन से पहले नगर पालिका के संचालन के समय वर्ष 1958 की रिपोर्ट के मुताबिक ताजगंज की डिस्पेंसरी में 59,914 मरीजों को देखा गया तो गांधी स्मारक अस्पताल में 19530, जीवनीमंडी में 68,899, छत्ता में 79,218, सरदार पटेल डिस्पेंसरी में 1.58 लाख मरीजों को इलाज दिया गया था।
नगर पालिका तब एत्माद्दौला और धूलियागंज के दो आयुर्वेदिक अस्पतालों से भी लोगों के स्वास्थ्य का ध्यान रखती थी। 64 साल पहले एत्माद्दौला अस्पताल से 55985 और धूलियागंज से 61,477 लोग आयुर्वेदिक दवाएं लेकर गए। ताजगंज के कुष्ठ रोग अस्पताल का संचालन भी तब नगर पालिका के हाथ में था, जो 50 बेड का था। इसके अलावा नगर पालिका मदन मोहन गर्ग आई हॉस्पिटल को इलाज के लिए अनुदान भी देती थी।
शाहगंज में बनाया संक्रामक रोग अस्पताल
नगर निकाय के जानकार राजीव सक्सेना बताते हैं कि आगरा म्यूसिपलिटी के गठन के बाद संक्रामक रोगों के इलाज के लिए पुराने शहर से दूर शाहगंज क्षेत्र में इन्फेक्शियस डिजीजेज हॉस्पिटल (आईडीएच) का निर्माण किया गया जो 50 बेड का था। संक्रामक रोगों के लिए तब यह यूनाइटेड प्राविंस का एकमात्र अस्पताल था, जिसे बाद में गरीबखाना नाम दिया गया। वर्ष 1965 के आगरा गजेटियर के मुताबिक साल 1948 तक गरीबखाने में एंटी रैबीज इंजेक्शन लगाने का काम चालू रहा, जिसे बाद में एसएन मेडिकल कॉलेज को दे दिया गया। 1956 में भी शाहगंज के गरीबखाना अस्पताल में 32,175 मरीजों को इलाज दिया गया।
दो हेल्थ सेंटर शुरू किए
नगर निगम ने आगरा स्मार्ट सिटी के सहयोग से शहर में 10 जगह स्मार्ट हेल्थ सेंटर शुरू करने की कवायद वर्ष 2019 में शुरू की, जिनमें नगर निगम के गेट पर और आवास विकास कॉलोनी में एक हेल्थ सेंटर शुरू किया गया, पर यह दोनों भी चल नहीं सके। नगर निगम के गेट पर 50 रुपये में परामर्श और सस्ती दवाएं देने की सुविधा शुरू की जो कोरोना संक्रमण के बाद चल नहीं सकी। नगर निगम परिसर में बनाई गई स्मार्ट पैथोलोजी लैब को भी एक साल के अंदर बंद करना पड़ गया।