हमारे सांसद, विधायकों को रोडवेज की सीटें नहीं पसंद, कहा बंद करो सुविधा
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आगरा में यूं तो कुर्सी की लड़ाई नगर निगम से लेकर सत्ता के सर्वोच्च शिखर संसद तक है, लेकिन एक कुर्सी ऐसी भी है, जो हमारे जनप्रतिनिधियों को पसंद ही नहीं है। इस कुर्सी पर सांसद और विधायकों का ही नाम लिखा है, लेकिन कई साल बीत गए, जब किसी भी सांसद और विधायक ने इस कुर्सी पर बैठना मुनासिब नहीं समझा।
जनाब, ये कुर्सी है रोडवेज बस की। उत्तर प्रदेश राज्य परिवहन निगम की हर बस में सांसद, विधायक, पूर्व सांसद, पूर्व विधायकों के लिए सीटें आरक्षित हैं, लेकिन इनमें आगरा के किसी भी जनप्रतिनिधि ने सफर नहीं किया। परिवहन निगम के पास मौजूद ब्योरे में मौजूदा सांसद या विधायक का नाम तो नहीं है, पर पूर्व विधायक बहादुर सिंह के नाम से दो बार 3 जून और 23 जून को तथा तीन सितंबर को अनाम पूर्व विधायक के नाम से सफर किया गया।
ईटीएम से टिकट के बाद तो यह ब्योरा मिलना भी बंद हो गया। इसे एक रजिस्टर पर दर्ज कर लिया जाता है। परिवहन निगम अधिकारियों के मुताबिक 25 साल से किसी सांसद, विधायक को उन्होंने बस में सफर करते नहीं देखा। पुराने विधायक कभी कभी अपने पास का उपयोग करते दिख जाते हैं।
परिवहन निगम के पास मौजूद ब्योरे में आगरा के किसी भी सांसद और विधायक ने साधारण, एसी, वोल्वो, स्कैनिया बस में सफर नहीं किया। दो बार के सांसद हों या दो-तीन बार के विधायक, वह महंगी एसयूवी में अपने समर्थकों के साथ ही सफर करते रहे हैं, न कि आम जनता के बीच और उनके साथ।
दरअसल, विधायकों को तीन लाख रुपये तक के रेल कूपन, हवाई यात्रा की सुविधा है। इनमें वह डीजल भत्ते के रूप में 8 हजार रुपये ले सकते हैं। पूर्व सरकार ने विधायकों को बिना ब्याज के वाहन खरीदने के लिए लोन दिया था।
रोडवेज बस में सांसद, विधायक, पूर्व सांसद, पूर्व विधायक, स्वतंत्रता संग्राम सेनानी, लोकतंत्र रक्षक, मान्यता प्राप्त पत्रकार, विकलांग और महिलाओं के लिए सीटें आरक्षित रहती हैं। बस में आगे की तीन सीटें इनके लिए आरक्षित रखी जाती है।
वह किसी भी स्टेशन से बैठ सकते हैं, इसके लिए कोई फार्म नहीं भरा जाता बल्कि केवल पहचान पत्र देखकर ही सीट दे दी जाती है।
एत्मादपुर विधायक राम प्रताप सिंह चौहान का कहना है कि हमें हर क्षेत्र में घूमना पड़ता है। लखनऊ की यात्रा के लिए अपनी कार का उपयोग करते हैं। ऐसे में रोडवेज बस में विधायकों के नाम पर सीटों का आरक्षण खत्म किया जाए, वह इसकी मांग करेंगे।
आगरा दक्षिण के विधायक योगेंद्र उपाध्याय का कहना है कि विधायक बनने के बाद मैंने बस का सफर नहीं किया। सरकार हमें वाहन और डीजल की सुविधा देती है, इसलिए मैं मांग करुंगा कि बसों में सीटों का आरक्षण खत्म कर दिया जाए। यह व्यावहारिक नहीं है।
- सरकार ने जो व्यवस्था की है, हम तो उसका पालन करते हैं। बसों में सीटें आरक्षित हैं। अगर कोई नहीं बैठता है तो उन सीटों पर हम नियमित यात्रियों को जगह देते हैं। ये सीटें खाली नहीं रहती हैं।
बीके लोहानी
एआरएम, परिवहन निगम