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Agra News: वैकल्पिक सीढ़ी लगी न चली मोटरबोट...परेशान हैं 150 गांवों के लोग
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न वैकल्पिक सीढ़ी लगी, न मोटरबोट चली... तीन सप्ताह से चंबल घाट पर मनमानी का आरोप
- फोटो : 1
पिनाहट। चंबल नदी के पिनाहट घाट से मोटरबोट का संचालन 6 अगस्त से बंद है। पुल के वैकल्पिक सीढ़ी भी अब तक नहीं लगाई जा सकी है। इससे मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के करीब 150 गांवों के लोग परेशान हैं। ग्रामीणों को 90 किलोमीटरराक अतिरिक्त रास्ता तय करने की मजबूरी झेलनी पड़ रही है।
चंबल नदी के पिनाहट घाट पर पांटून पुल 15 अक्तूबर से 15 जून तक रहता है। बारिश के मौसम में बाढ़ के मद्देनजर पांटून पुल हटा लिया जाता है। घाट पर यात्रियों को पार उतारने के लिए पीडब्ल्यूडी मोटर बोट का संचालन कराती है। पांटून पुल हटाए जाने के बाद इस साल भी मोटरबोट का संचालन शुरू किया गया था। बाद में अनुमति न होने का हवाला देते हुए मध्य प्रदेश प्रशासन ने इसे बंद करा दिया। लोगों की समस्या को देखते हुए प्रशासन की ओर से पक्के पुल पर वैकल्पिक सीढ़ी लगाने की बात कही गई थी, लेकिन अब तक सीढ़ी भी नहीं लगाई जा सकी है।
पक्के पुल के फोरमैन मुकेश ने बताया कि फिलहाल वैकल्पिक सीढ़ी बनाने का कोई काम नहीं चल रहा है। पक्के पुल का एप्रोच निर्माण कार्य किया जाएगा। वहीं, ग्रामीणों का आरोप है कि एक ओर मोटरबोट संचालन की अनुमति होने के बावजूद सेवा शुरू नहीं की जा रही है, वहीं दूसरी ओर वैकल्पिक रास्ते की व्यवस्था भी नहीं की गई। इससे ग्रामीणों में प्रशासन के प्रति नाराजगी बढ़ रही है।
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चंबल नदी के पिनाहट घाट पर पांटून पुल 15 अक्तूबर से 15 जून तक रहता है। बारिश के मौसम में बाढ़ के मद्देनजर पांटून पुल हटा लिया जाता है। घाट पर यात्रियों को पार उतारने के लिए पीडब्ल्यूडी मोटर बोट का संचालन कराती है। पांटून पुल हटाए जाने के बाद इस साल भी मोटरबोट का संचालन शुरू किया गया था। बाद में अनुमति न होने का हवाला देते हुए मध्य प्रदेश प्रशासन ने इसे बंद करा दिया। लोगों की समस्या को देखते हुए प्रशासन की ओर से पक्के पुल पर वैकल्पिक सीढ़ी लगाने की बात कही गई थी, लेकिन अब तक सीढ़ी भी नहीं लगाई जा सकी है।
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पक्के पुल के फोरमैन मुकेश ने बताया कि फिलहाल वैकल्पिक सीढ़ी बनाने का कोई काम नहीं चल रहा है। पक्के पुल का एप्रोच निर्माण कार्य किया जाएगा। वहीं, ग्रामीणों का आरोप है कि एक ओर मोटरबोट संचालन की अनुमति होने के बावजूद सेवा शुरू नहीं की जा रही है, वहीं दूसरी ओर वैकल्पिक रास्ते की व्यवस्था भी नहीं की गई। इससे ग्रामीणों में प्रशासन के प्रति नाराजगी बढ़ रही है।
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