{"_id":"68e95534812ad0774207d955","slug":"mothers-will-have-regular-blood-tests-even-after-delivery-mainpuri-news-c-174-1-mt11005-146975-2025-10-11","type":"story","status":"publish","title_hn":"Agra News: प्रसव के बाद भी प्रसूताओं की होगी नियमित खून की जांच","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Agra News: प्रसव के बाद भी प्रसूताओं की होगी नियमित खून की जांच
विज्ञापन
सीएमओ कार्यालय
मैनपुरी। जिले की महिलाओं की प्रसव के दौरान ही नहीं, अब प्रसव बाद भी नियमित खून की जांच कराई जाएगी। प्रसूताओं की हीमोग्लोबिन की जांच रिपोर्ट का ब्योरा मातृ-शिशु सुरक्षा कार्ड पर दर्ज किया जाएगा। यह निर्णय महिलाओं को एनीमिया से बचाने के लिए लिया गया है। इसके लिए परिवार कल्याण महानिदेशक डॉ. पवन कुमार अरुण ने सीएमओ को पत्र भेजा है।
महानिदेशक ने पत्र में कहा कि प्रसव से पहले तो महिलाओं की जांच पर ध्यान दिया जाता है, लेकिन प्रसव के बाद जांच न किए जाने से कई महिलाओं की जान खतरे में पड़ जाती है। उन्होंने कहा कि महिलाओं की सेहत की लगातार निगरानी होनी चाहिए। प्रदेश की करीब 58 प्रतिशत महिलाएं एनीमिया से पीड़ित हैं। इसे देखते हुए टेस्टिंग, ट्रेसिंग और ट्रीटमेंट की रणनीति अपनानी होगी। प्रसव के बाद हीमोग्लोबिन की नियमित जांच से उपचार में आसानी होगी। प्रसव बाद होने वाली तीन फॉलोअप जांचें आशा कार्यकर्ता सुनिश्चित करेंगी। पत्र में कहा गया है कि प्रसव के 48 घंटे, डेढ़ माह, ढाई माह और साढ़े तीन माह में जांच जरूरी है।
-- -
निजी अस्पतालों में प्रसव होने पर भी मिलेगा लाभ
सीएमओ डॉ.आरसी गुप्ता ने बताया कि किसी भी महिला को छूटने नहीं दिया जाएगा। यदि प्रसव निजी अस्पताल में हुआ है तो संबंधित आशा कार्यकर्ता घर जाकर उसकी जांच कर स्वास्थ्य केंद्र पर रेफर करेंगी। गंभीर एनीमिया के मामलों में महिलाओं को उच्च केंद्र पर भेजने के लिए 102 एंबुलेंस सेवा उपलब्ध कराई जाएगी। उन्होंने बताया कि सभी स्वास्थ्य इकाइयों एवं एएनएम के पास डिजिटल हीमोग्लोबिनोमीटर उपलब्ध हैं जिससे जांच में पारदर्शिता और त्वरित परिणाम सुनिश्चित होंगे।
विज्ञापन
विज्ञापन
महानिदेशक ने पत्र में कहा कि प्रसव से पहले तो महिलाओं की जांच पर ध्यान दिया जाता है, लेकिन प्रसव के बाद जांच न किए जाने से कई महिलाओं की जान खतरे में पड़ जाती है। उन्होंने कहा कि महिलाओं की सेहत की लगातार निगरानी होनी चाहिए। प्रदेश की करीब 58 प्रतिशत महिलाएं एनीमिया से पीड़ित हैं। इसे देखते हुए टेस्टिंग, ट्रेसिंग और ट्रीटमेंट की रणनीति अपनानी होगी। प्रसव के बाद हीमोग्लोबिन की नियमित जांच से उपचार में आसानी होगी। प्रसव बाद होने वाली तीन फॉलोअप जांचें आशा कार्यकर्ता सुनिश्चित करेंगी। पत्र में कहा गया है कि प्रसव के 48 घंटे, डेढ़ माह, ढाई माह और साढ़े तीन माह में जांच जरूरी है।
विज्ञापन
निजी अस्पतालों में प्रसव होने पर भी मिलेगा लाभ
सीएमओ डॉ.आरसी गुप्ता ने बताया कि किसी भी महिला को छूटने नहीं दिया जाएगा। यदि प्रसव निजी अस्पताल में हुआ है तो संबंधित आशा कार्यकर्ता घर जाकर उसकी जांच कर स्वास्थ्य केंद्र पर रेफर करेंगी। गंभीर एनीमिया के मामलों में महिलाओं को उच्च केंद्र पर भेजने के लिए 102 एंबुलेंस सेवा उपलब्ध कराई जाएगी। उन्होंने बताया कि सभी स्वास्थ्य इकाइयों एवं एएनएम के पास डिजिटल हीमोग्लोबिनोमीटर उपलब्ध हैं जिससे जांच में पारदर्शिता और त्वरित परिणाम सुनिश्चित होंगे।
विज्ञापन