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सारी दुनिया का 'बोझ' वो उठाती है...एक मां के संघर्ष की कहानी, जो 12 साल से कर रही कुली का काम

Sun, 12 May 2019 01:34 PM IST
मुकेश कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मथुरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मथुरा Published by: मुकेश कुमार Updated Sun, 12 May 2019 01:34 PM IST
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mother's day 2019 struggle story of woman porter meenu sharma in mathura
स्टेशन पर यात्रा का सामान ढो रहीं मीनू शर्मा - फोटो : अमर उजाला
मां के लिए अपनी संतान से बढ़कर कुछ नहीं होता है। संतान के लिए मां हर विपरीत परिस्थिति का डटकर मुकाबला करती है। भले ही वो तपती धूप में रहे, लेकिन अपने बच्चों को हमेशा ठंडी छांव का अहसास कराती है। ऐसी मां हैं मीन शर्मा, जो अपने बच्चों की खातिर आज सारी दुनिया का बोझ उठाती हैं। 
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मीनू 12 साल से मथुरा जंक्शन पर कुली का काम कर रही हैं। इसी पैसे से घर का खर्च चलता है। बच्चों की पढ़ाई हो रही है। मीनू चाहती हैं कि उसके बच्चे पढ़-लिखकर रेलवे में बड़े अधिकारी बन जाएं। जिस दिन उसकी यह इच्छा पूरी हो जाएगी उसे भी लगेगा कि उसकी तपस्या पूरी हो गई।
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मीनू की जिंदगी संघर्ष भरी है। वो यूं ही कुली नहीं बन गईं। टाउनशिप स्थित कांशीराम कॉलोनी में रहने वाली मीनू के पति योगेश बीमार रहते थे। बाईपास सर्जरी भी हो चुकी है। आज से करीब 12 साल पहले स्थिति यह हो गई थी कि परिवार के सामने बड़ा आर्थिक संकट आ गया था। 
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लोगों ने मारे थे ताने

बच्चों की पढ़ाई तो छोड़िए भरपेट भोजन के लिए भी जूझना पड़ रहा था। इसी बीच मीनू ने मथुरा जंक्शन पर कुली का काम शुरू कर दिया। सुबह से शाम तक यात्रियों का सामान ढोना और जो पैसा मिलता उससे परिवार का खर्च चलाना। 

मीनू कहती हैं कि क्या क्या नहीं सुना, लेकिन बच्चों की बड़ी जिम्मेदारी थी। लिहाजा वो पूरी मेहनत के साथ अपना काम करती रहीं। बच्चों को पढ़ाया भी। आज उनकी बेटी गौरेय्या और बेटा वरुण हाईस्कूल कर चुके हैं। मीनू का कहना है कि अब तो बस एक ही इच्छा है कि बच्चे पढ़ लिखकर अधिकारी बन जाएं। 

मीनू शर्मा ने बताया कि एक दिन तो वह था तब वो सुबह से शाम तक जंक्शन पर यत्रियों का माल ढोया करती थीं। घर पर बच्चों के लिए खाना बनाकर आना और फिर शाम को जाकर खाना बनाना। 

घर की साफ-सफाई और बच्चो के कपड़ों का काम रहा वह अलग। सुबह को चार बजे उठ जाया करती थीं। अब गर्मियों में केवल शाम को जंक्शन पर पहुंचती हैं। मीनू की पति योगेश कालोनी के मंदिर पर ही पुजारी का काम करने लगे हैं।
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