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मदर्स डे: 'यशोदा मां' बन ममता और प्यार से सींच रही बेटियों का जीवन
न्यूज डेस्क, अमर उजाला एटा
Updated Sun, 13 May 2018 11:19 AM IST
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बेटियों के साथ दीपिका सक्सेना
- फोटो : अमर उजाला
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हर किसी के जीवन में मां की एक खास जगह होती है। इसे कोई और नहीं ले सकता। एटा जिले में ऐसी भी कई मां हैं, जिन्होंने बेटियों को गोद लेकर समाज में नई मिसाल कायम की। उनकी कोख से बेटियों ने जन्म नहीं लिया, लेकिन उन पर ममता और प्यार खूब लुटा रही है।
शहर के कांशीराम कॉलोनी निवासी दीपिका सक्सेना अपनी तीन साल की बेटी तनिष्का पर कुछ ऐसे ही ममता की बरसा रही हैं। वे बताती हैं कि उनकी गोद सूनी थी, तो हर दम अकेलापन लगता था।
तीन साल पहले उनकी बहन ने बेटी को जन्मा और दीपिका उनसे मिलने गई। अनायास ही अपनी सूनी कोख को भरने और बेटी को प्यार देने का ख्याल मन में आया। दीदी से बात की और लक्ष्मी मानकर बेटी को घर ले आईं।
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शहर के कांशीराम कॉलोनी निवासी दीपिका सक्सेना अपनी तीन साल की बेटी तनिष्का पर कुछ ऐसे ही ममता की बरसा रही हैं। वे बताती हैं कि उनकी गोद सूनी थी, तो हर दम अकेलापन लगता था।
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तीन साल पहले उनकी बहन ने बेटी को जन्मा और दीपिका उनसे मिलने गई। अनायास ही अपनी सूनी कोख को भरने और बेटी को प्यार देने का ख्याल मन में आया। दीदी से बात की और लक्ष्मी मानकर बेटी को घर ले आईं।
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तनिष्का और सोनिका
इसके डेढ़ साल बाद भगवान ने उनकी गोद भर दी और कन्या रूपी तोहफा दिया। आज बेटी तनिष्का और सोनिका तीन और डेढ़ साल की हो गई हैं। दीपिका उन्हें खूब प्यार और दुलार करती हैं। दीपिका कहती हैं कि वे दोनों बेटियों को पढ़ा लिखाकर डॉक्टर बनाना चाहती हैं।
वहीं पीपल अड्डा निवासी सरस्वती ने भी अनाथ बेटी को गोद लेकर उसे ममता की छांव दी। यूं तो सरस्वती के पास पहले से दो बेटे हैं, लेकिन घर की रौनक को बढ़ाने के लिए उन्होंने बेटी को गोद लिया। छह साल की बिटिया अंशिका आज उनकी आंख का तारा है।
सरस्वती बताती हैं कि इन दिनों प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बेटी पढ़ाओ, बेटी बचाओ को लेकर जागरूकता फैला रहे हैं। समाज की सोच बेटियों को लेकर अलग है। बस इसी सोच को बदलना है। वैसे तो हर मां अपने बच्चे के लिए सब कुछ करती है, लेकिन अनाथ बच्चों की परवरिश करके खुशी मिलती है।
जिले में संगीता और सरस्वती जैसी कई और भी माएं हैं, जिन्होंने अनाथ बच्चों को सहारा देकर उनकी जिंदगी बदली है। समाज में बदलती धारणा ने मां और बेटी के रिश्तों को नई परिभाषा दी है।
वहीं पीपल अड्डा निवासी सरस्वती ने भी अनाथ बेटी को गोद लेकर उसे ममता की छांव दी। यूं तो सरस्वती के पास पहले से दो बेटे हैं, लेकिन घर की रौनक को बढ़ाने के लिए उन्होंने बेटी को गोद लिया। छह साल की बिटिया अंशिका आज उनकी आंख का तारा है।
सरस्वती बताती हैं कि इन दिनों प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बेटी पढ़ाओ, बेटी बचाओ को लेकर जागरूकता फैला रहे हैं। समाज की सोच बेटियों को लेकर अलग है। बस इसी सोच को बदलना है। वैसे तो हर मां अपने बच्चे के लिए सब कुछ करती है, लेकिन अनाथ बच्चों की परवरिश करके खुशी मिलती है।
जिले में संगीता और सरस्वती जैसी कई और भी माएं हैं, जिन्होंने अनाथ बच्चों को सहारा देकर उनकी जिंदगी बदली है। समाज में बदलती धारणा ने मां और बेटी के रिश्तों को नई परिभाषा दी है।