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Mother's Day 2018: इन मांओं की आपबीती जानोगे तो रो पड़ोगे
न्यूज डेस्क, अमर उजाला वृंदावन (मथुरा)
Updated Sun, 13 May 2018 08:09 AM IST
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आश्रय सदन में रहने वाली महिलाएं
- फोटो : अमर उजाला
मदर्स डे पर दुनिया भर में मां को याद किया जा रहा है। बच्चे मां को उपहार भेंट करेंगे, लेकिन वृंदावन के महिला आश्रय सदनों में रहने वाली मांओं को कोई उपहार भेंट नहीं करेगा। उनके लिए तो आश्रय सदन ही उनका घर और परिवार बन गया है।
नौ महीनों तक जिसे अपनी कोख में रखा उसने ही आज मुंह मोड़ लिया। भरा पूरा परिवार है, लेकिन कोई अपना कहने वाला नहीं। उम्र का अंतिम पड़ाव है और अपनों को बूढ़ी पथराई आंखें खोज रहीं हैं, लेकिन दूर दूर तक कोई अपना कहने वाला नहीं।
अब एक ही इच्छा मन में है कि आगे का समय ठाकुर बांके बिहारी के चरणों में बीते। मोक्ष की कामना लिए वृंदावन के आश्रय सदनों में रह रहीं माताओं की आप बीती सुनाते-सुनाते आंखें भर आतीं हैं।
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नौ महीनों तक जिसे अपनी कोख में रखा उसने ही आज मुंह मोड़ लिया। भरा पूरा परिवार है, लेकिन कोई अपना कहने वाला नहीं। उम्र का अंतिम पड़ाव है और अपनों को बूढ़ी पथराई आंखें खोज रहीं हैं, लेकिन दूर दूर तक कोई अपना कहने वाला नहीं।
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अब एक ही इच्छा मन में है कि आगे का समय ठाकुर बांके बिहारी के चरणों में बीते। मोक्ष की कामना लिए वृंदावन के आश्रय सदनों में रह रहीं माताओं की आप बीती सुनाते-सुनाते आंखें भर आतीं हैं।
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अपनों ने बेसहारा छोड़ा
दिल्ली की कृष्णा गुप्ता
- फोटो : अमर उजाला
दिल्ली के सरोजनी नगर निवासी कृष्णा गुप्ता के पति के स्वर्गवास के बाद दोनों बेटों ने उन्हें रखने से इंकार दिया। इसके बाद वो वृंदावन आ गईं और फिर यहीं की होकर रह गईं। औलाद ने उनका हाल भी नहीं पूछा।
ग्वालियर की राजकिशोरी का भी भरा पूरा परिवार है, लेकिन रखने के लिए कोई तैयार नहीं। 10 साल से आश्रय सदन में रह कर जीवन काट रही हैं। संस्था ने अगरबत्ती बनाने की ट्रेनिंग ले रहीं लेकर आत्मनिर्भर हो गई।
महिला आश्रय सदन की अधीक्षिका गीता दीक्षित बताती हैं कि कई महिलाएं भरे पूरे परिवार की हैं। लेकिन मां को रखने के लिए किसी के पास जगह नहीं। अब इन महिलाओं का यही संसार है और ठाकुरजी उनका परिवार।
ग्वालियर की राजकिशोरी का भी भरा पूरा परिवार है, लेकिन रखने के लिए कोई तैयार नहीं। 10 साल से आश्रय सदन में रह कर जीवन काट रही हैं। संस्था ने अगरबत्ती बनाने की ट्रेनिंग ले रहीं लेकर आत्मनिर्भर हो गई।
महिला आश्रय सदन की अधीक्षिका गीता दीक्षित बताती हैं कि कई महिलाएं भरे पूरे परिवार की हैं। लेकिन मां को रखने के लिए किसी के पास जगह नहीं। अब इन महिलाओं का यही संसार है और ठाकुरजी उनका परिवार।