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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Agra News ›   Mother reached family counseling center with daughter born seven days ago, said - now in-laws will not keep

Agra: सात दिन की बेटी को लेकर परिवार परामर्श केंद्र पहुंची मां, बोली- अब ससुराल लौटने की नहीं उम्मीद

Mon, 05 Sep 2022 03:33 PM IST
धीरेन्द्र सिंह अमर उजाला ब्यूरो, आगरा
अमर उजाला ब्यूरो, आगरा Published by: धीरेन्द्र सिंह Updated Mon, 05 Sep 2022 03:33 PM IST
सार

बेटी के जन्म से एक मां की ससुराल जाने की उम्मीद टूट गई। सात दिन पहले जन्मी बेटी को आंचल में छुपाए वो परिवार परामर्श केंद्र पहुंची। उसने कहा कि बेटी का पालन-पोषण खुद कर लूंगी, लेकिन इसके पिता साथ होते, तो अच्छा होता।  

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Mother reached family counseling center with daughter born seven days ago, said - now in-laws will not keep
girl demo - फोटो : फाइल फोटो

विस्तार

आगरा के परिवार परामर्श केंद्र में बेटी को आंचल में छुपाए जब एक मां पहुंची, तो सभी की निगाहें उस पर टिक गईं। उसकी आंखें वहां मौजूद लोगों से न जाने कितने सवाल कर रही थीं। कसूरवार कौन था, वो बेटी जिसके जन्म से मां का परिवार बिखर रहा था या फिर लोगों की वो सोच, जिसने आज भी बेटा और बेटी में इतना बड़ा फर्क कर रखा है। वो बोली- बेटी पैदा होने के बाद अब ससुराल वाले मुझे नहीं रखेंगे। बेटा पैदा होता तो पति मुझे साथ रखने के लिए राजी भी हो जाता। बेटी के पैदा होने से उसकी गृहस्थी बसने की आखिरी उम्मीद भी टूट गई। यह कहते हुए उसकी आंखों से आंसू बहने लगे। पर, अगले ही पल वह कहने लगी कि मैं अपनी बेटी का पालन पोषण कर लूंगी। उसके पिता भी साथ होंगे तो अच्छा होता।
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सात दिन की बेटी को लेकर रविवार को परिवार परामर्श केंद्र में पीड़िता न्याय मांगने के लिए पहुंची थी। विवाहिता नरी पुरा की रहने वाली है। उसने बताया कि दो साल पहले किरावली के युवक के साथ हुई थी। बहन और उसकी शादी एक ही घर में हुई थी। शादी के छह माह बाद बहन का पति गुजर गया। कुछ दिन बाद ससुराल वालों ने उसके साथ मारपीट शुरू कर दी और उसके बाद घर से निकाल दिया। महिला ने बताया कि जब उसे घर से निकाला तो गर्भवती थी। वह आठ महीने से मायके में रह रही है। सात दिन पहले ही बच्ची को जन्म दिया है। 
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उसने कहा कि बच्ची होने से मुझे कोई फर्क नहीं हैं, लेकिन मेरे ससुराल वाले पहले ही मुझे घर ले जाने से मना कर रहे थे। अब तो बेटी हो गई है तो और भी ज्यादा दिक्कत होगी। पति को फोन कर बताया कि बेटी हुई है तो पति ने फोन काट दिया और कहा कि तुम दोनों मां बेटी की मुझे कोई जरूरत नहीं हैं। अगर बेटा होता तो मैं तुझे घर लाने की सोचता भी। तीन तारीख में भी पत्नी को साथ ले जाने से इंकार करने पर मामले में मुकदमे के आदेश किए गए हैं। 
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पांच जोड़ों में हुई सुलह, 8 में मुकदमे के आदेश

परिवार परामर्श केंद्र की प्रभारी कमर सुल्ताना ने बताया कि केंद्र पर आज 50 जोड़ों को बुलाया गया था। जिनमें से लगभग 30 जोड़े पहुंचे। पांच जोड़ों की विदाई कराई गई और 8 मामलों में मुकदमा के आदेश दिए गए हैं।
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