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भाषा के हिंदी और अंग्रेजी विषयों में सर्वाधिक रुझान
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आगरा। डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय से संबद्ध कॉलेजों के स्नातक प्रथम वर्ष में राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप प्रवेश लिए जा रहे हैं। प्रत्येक वर्ग के विद्यार्थी को दूसरे वर्ग से विषय चुनना पड़ रहा है। कोई छात्र दूसरे वर्ग से मेजर विषय नहीं ले रहा तो माइनर लेना ही पड़ रहा है। इस व्यवस्था में सर्वाधिक रुझान भाषा वर्ग के हिंदी और अंग्रेजी विषयों की ओर है। वहीं, कला वर्ग में राजनीतिशास्त्र, इतिहास, अर्थशास्त्र व समाजशास्त्र विषयों को चुन रहे हैं। इन विषयों में छात्रों के प्रवेश का दबाव बढ़ गया है। ऐसे में कॉलेज प्रशासन छात्रों को दूसरे विषयों को भी चुनने के लिए प्रेरित कर रहा है।
नियमानुसार प्रत्येक वर्ग का छात्र दो मेजर विषय अपने वर्ग से और एक दूसरे वर्ग से चुन सकता है। वह चाहे तो तीनों मेजर विषय अपने वर्ग से ले सकता है। इसके बाद उसे माइनर विषय दूसरे वर्ग से लेना ही पड़ेगा।
विज्ञान और वाणिज्य वर्ग के अधिकतर छात्र भाषा वर्ग के हिंदी और अंग्रेजी विषय के साथ कला वर्ग के राजनीतिशास्त्र, इतिहास, अर्थशास्त्र व समाजशास्त्र जैसे विषयों को चुन रहे हैं।
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कला और भाषा वर्ग के छात्र अपवाद स्वरूप ही विज्ञान और वाणिज्य वर्ग के विषय चुन रहे हैं। कला वर्ग के छात्र भाषा के विषय और भाषा वर्ग के छात्र कला वर्ग के विषयों को चुन रहे हैं। वजह यह है कि छात्र दूसरे वर्ग का वही विषय चुन सकता हो, जिसे इंटरमीडिएट में पढ़ा हो। कला व भाषा वर्ग के अधिकतर छात्रों ने इंटरमीडिएट में विज्ञान, गणित, बायोलॉजी और वाणिज्य के विषयों को नहीं पढ़ा है।
कॉलेज में कला व भाषा वर्ग के छात्र विज्ञान वर्ग में नहीं जा रहे हैं। बड़ी वजह यही है कि उन्होंने इंटरमीडिएट में संबंधित विषयों को नहीं पढ़ा था। भाषा में हिंदी व अंग्रेजी विषयों की ओर अधिक रुझान है। - डॉ. एसपी सिंह, प्राचार्य, सेंट जोंस कॉलेज
भाषा में दो विषयों अंग्रेजी व हिंदी में छात्रों की संख्या अधिक हो गई है। छात्रों को दूसरे विषय भी लेने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। इन विषयों में सीटें सीमित कर दी गई हैं। - डॉ. दीपा रावत, प्रभारी, बीए, आगरा कॉलेज
कॉलेज में विज्ञान वर्ग और वाणिज्य वर्ग की अधिकतर छात्राओं ने हिंदी और अंग्रेजी के साथ शारीरिक शिक्षा को दूसरे संकाय के विषय के रूप में चुना है। - डॉ. पूनम सिंह, प्राचार्या, डॉ. बैकुंठी देवी कन्या महाविद्यालय
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नियमानुसार प्रत्येक वर्ग का छात्र दो मेजर विषय अपने वर्ग से और एक दूसरे वर्ग से चुन सकता है। वह चाहे तो तीनों मेजर विषय अपने वर्ग से ले सकता है। इसके बाद उसे माइनर विषय दूसरे वर्ग से लेना ही पड़ेगा।
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विज्ञान और वाणिज्य वर्ग के अधिकतर छात्र भाषा वर्ग के हिंदी और अंग्रेजी विषय के साथ कला वर्ग के राजनीतिशास्त्र, इतिहास, अर्थशास्त्र व समाजशास्त्र जैसे विषयों को चुन रहे हैं।
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कला और भाषा वर्ग के छात्र अपवाद स्वरूप ही विज्ञान और वाणिज्य वर्ग के विषय चुन रहे हैं। कला वर्ग के छात्र भाषा के विषय और भाषा वर्ग के छात्र कला वर्ग के विषयों को चुन रहे हैं। वजह यह है कि छात्र दूसरे वर्ग का वही विषय चुन सकता हो, जिसे इंटरमीडिएट में पढ़ा हो। कला व भाषा वर्ग के अधिकतर छात्रों ने इंटरमीडिएट में विज्ञान, गणित, बायोलॉजी और वाणिज्य के विषयों को नहीं पढ़ा है।
कॉलेज में कला व भाषा वर्ग के छात्र विज्ञान वर्ग में नहीं जा रहे हैं। बड़ी वजह यही है कि उन्होंने इंटरमीडिएट में संबंधित विषयों को नहीं पढ़ा था। भाषा में हिंदी व अंग्रेजी विषयों की ओर अधिक रुझान है। - डॉ. एसपी सिंह, प्राचार्य, सेंट जोंस कॉलेज
भाषा में दो विषयों अंग्रेजी व हिंदी में छात्रों की संख्या अधिक हो गई है। छात्रों को दूसरे विषय भी लेने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। इन विषयों में सीटें सीमित कर दी गई हैं। - डॉ. दीपा रावत, प्रभारी, बीए, आगरा कॉलेज
कॉलेज में विज्ञान वर्ग और वाणिज्य वर्ग की अधिकतर छात्राओं ने हिंदी और अंग्रेजी के साथ शारीरिक शिक्षा को दूसरे संकाय के विषय के रूप में चुना है। - डॉ. पूनम सिंह, प्राचार्या, डॉ. बैकुंठी देवी कन्या महाविद्यालय