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बारिश से मंडी में मूंगलफली और मक्का की फसल भीगी
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23एमएनपी-09-नवीनमंडी परिसर में बारिश के चलते भीगी किसान की मूंगफली
- फोटो : MAINPURI
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मैनपुरी। मंगलवार को हुई बारिश ने भले ही लोगों को गर्मी से राहत दिलाई, लेकिन नवीन मंडी में किसानों के लिए बारिश मुसीबत बन गई। अचानक हुई बारिश से खुले में पड़ी मक्का और मूंगफली की फसल भीग गई। इससे किसानों को नुकसान हुआ है। अब उन्हें कम कीमत पर फसल बेचनी पड़ेगी।
नवीन मंडी में मंगलवार को जिले भर से किसान अपनी मक्का और मूंगफली की फसल बेचने के लिए आए थे। दोपहर बाद अचानक बारिश शुरू हो गई। ऐसे में जिन किसानों की फसल खुले चबूतरों पर पड़ी थी, वह भी गई। मक्का और मूूंगफली की फसल भीगने से किसानों को झटका लगा है। दरअसल अब भीगी हुई फसल को व्यापारी नहीं खरीदेंगे। किसानों को मंडी में ही फसल सुखानी होगी। इसके साथ ही अगर कोई व्यापारी भीगी हुई फसल खरीदेगा भी तो किसानों को 70 प्रतिशत तक ही दाम मिलेगा। इससे उन्हें बड़ा नुकसान होगा। इतना ही नहीं दोनों ही फसलें भीगने के बाद काली भी पड़ सकती है। ऐसे में किसानों को समझ नहीं आ रहा है वे क्या करें। मंगलवार की शाम को बारिश बंद होने के बाद किसान अपनी फसलें सुखाने के लिए फैलाते नजर आए। अगर दोबारा बारिश होती है तो उनकी मुश्किलें और बढ़ जाएंगी।
कोई भी आपदा आए नुकसान तो किसानों का ही होती है। बारिश में फसल भीगने से उसकी कीमत गिरना तय है। इसमें आढ़ती या व्यापारी का कोई नुकसान नहीं है।
रामवीर सिंह, इलाहबांस।
नवीन मंडी में फसल बेचने आने वाले किसानों के लिए खुले चबूतरे बने हैं। हर साल बारिश के दौरान फसलें भीग जाती हैं। उन्हें बचा पाना संभव नहीं होता है।
श्यामवीर सिंह, अमृत नगर।
कुछ आढ़तियों ने अपनी दुकान के बाहर टिनशेड डाल रखे हैं। लेकिन इनमें कितने किसान फसल डाल सकते हैं। बाकी को तो खुले में ही अपनी फसल डालनी पड़ती है।
विजय बाबू, खरकॉल।
अब या तो किसान फसल को तीन दिन तक मंडी में ही सुखाएं या अपने घर ले जाएं। दोनों ही सूरतों में किसानों को नुकसान उठाना पड़ेगा, वे कुछ नहीं कर सकते हैं।
रूपलाल, अंगौथा नगरिया।
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नवीन मंडी में मंगलवार को जिले भर से किसान अपनी मक्का और मूंगफली की फसल बेचने के लिए आए थे। दोपहर बाद अचानक बारिश शुरू हो गई। ऐसे में जिन किसानों की फसल खुले चबूतरों पर पड़ी थी, वह भी गई। मक्का और मूूंगफली की फसल भीगने से किसानों को झटका लगा है। दरअसल अब भीगी हुई फसल को व्यापारी नहीं खरीदेंगे। किसानों को मंडी में ही फसल सुखानी होगी। इसके साथ ही अगर कोई व्यापारी भीगी हुई फसल खरीदेगा भी तो किसानों को 70 प्रतिशत तक ही दाम मिलेगा। इससे उन्हें बड़ा नुकसान होगा। इतना ही नहीं दोनों ही फसलें भीगने के बाद काली भी पड़ सकती है। ऐसे में किसानों को समझ नहीं आ रहा है वे क्या करें। मंगलवार की शाम को बारिश बंद होने के बाद किसान अपनी फसलें सुखाने के लिए फैलाते नजर आए। अगर दोबारा बारिश होती है तो उनकी मुश्किलें और बढ़ जाएंगी।
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कोई भी आपदा आए नुकसान तो किसानों का ही होती है। बारिश में फसल भीगने से उसकी कीमत गिरना तय है। इसमें आढ़ती या व्यापारी का कोई नुकसान नहीं है।
रामवीर सिंह, इलाहबांस।
नवीन मंडी में फसल बेचने आने वाले किसानों के लिए खुले चबूतरे बने हैं। हर साल बारिश के दौरान फसलें भीग जाती हैं। उन्हें बचा पाना संभव नहीं होता है।
श्यामवीर सिंह, अमृत नगर।
कुछ आढ़तियों ने अपनी दुकान के बाहर टिनशेड डाल रखे हैं। लेकिन इनमें कितने किसान फसल डाल सकते हैं। बाकी को तो खुले में ही अपनी फसल डालनी पड़ती है।
विजय बाबू, खरकॉल।
अब या तो किसान फसल को तीन दिन तक मंडी में ही सुखाएं या अपने घर ले जाएं। दोनों ही सूरतों में किसानों को नुकसान उठाना पड़ेगा, वे कुछ नहीं कर सकते हैं।
रूपलाल, अंगौथा नगरिया।