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UP: पहले रेप और फिर समझौता...दूसरी बार यौन उत्पीड़न की शिकायत लेकर कोर्ट पहुंची पीड़िता, नहीं मिली राहत
Fri, 07 Feb 2025 12:09 PM IST
धीरेन्द्र सिंह
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
Published by: धीरेन्द्र सिंह
Updated Fri, 07 Feb 2025 12:09 PM IST
सार
महिला ने पहले जिस पर दुष्कर्म का आरोप लगाया, उसे प्रेमी बताते हुए समझौता कर लिया। अब एक बार फिर वो उसी की शिकायत लेकर कोर्ट पहुंची। इस बार सत्र न्यायालय से उसे राहत नहीं मिली।
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- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
आगरा में एक युवती ने युवक के खिलाफ केस दर्ज कराने के बाद समझौता कर लिया। इसके बाद फिर से दुष्कर्म का आरोप लगाकर केस दर्ज कराने के लिए एसीजेएम-2 की अदालत में प्रार्थनापत्र दिया। अदालत ने युवती के खिलाफ ही परिवाद दर्ज करने के आदेश दिए। इस पर युवती ने सत्र न्यायालय में रिवीजन दाखिल की, जिसे एडीजे-15 राजीव कुमार पालीवाल ने निरस्त कर दिया।
थाना छत्ता क्षेत्र की युवती ने ताजगंज निवासी पवन सिकरवार के विरुद्ध शादी का झांसा देकर दुष्कर्म व अन्य धाराओं में केस दर्ज कराने के लिए वर्ष 2024 में एसीजेएम-2 की अदालत में प्रार्थनापत्र प्रस्तुत किया था। अदालत ने प्रार्थनापत्र को परिवाद के रूप में दर्ज करने के आदेश दिए। इस पर युवती ने रिवीजन दाखिल की।
आरोपी पवन सिकरवार के अधिवक्ताओं ने तर्क दिए कि रिवीजन करने वाले ने तथ्यों को छिपाया है। 2023 में युवती पवन के खिलाफ केस दर्ज करा चुकी है। उसमें उसने अपने बयानों में कहा था कि उसके आरोपी से प्रेम संबंध थे। उसके साथ कोई गलत काम नहीं हुआ था। गुस्से में केस दर्ज कराया था। बयान के आधार पर विवेचक ने एफआर लगाई थी। अदालत में युवती ने खुद एफआर स्वीकृति का आग्रह किया था।
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थाना छत्ता क्षेत्र की युवती ने ताजगंज निवासी पवन सिकरवार के विरुद्ध शादी का झांसा देकर दुष्कर्म व अन्य धाराओं में केस दर्ज कराने के लिए वर्ष 2024 में एसीजेएम-2 की अदालत में प्रार्थनापत्र प्रस्तुत किया था। अदालत ने प्रार्थनापत्र को परिवाद के रूप में दर्ज करने के आदेश दिए। इस पर युवती ने रिवीजन दाखिल की।
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आरोपी पवन सिकरवार के अधिवक्ताओं ने तर्क दिए कि रिवीजन करने वाले ने तथ्यों को छिपाया है। 2023 में युवती पवन के खिलाफ केस दर्ज करा चुकी है। उसमें उसने अपने बयानों में कहा था कि उसके आरोपी से प्रेम संबंध थे। उसके साथ कोई गलत काम नहीं हुआ था। गुस्से में केस दर्ज कराया था। बयान के आधार पर विवेचक ने एफआर लगाई थी। अदालत में युवती ने खुद एफआर स्वीकृति का आग्रह किया था।
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