बैंक डकैती के लिए चालक की हत्या कर लूटी थी वैन, ब्लेड से नहीं कटा गला तो आरी चलाई
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आगरा की थाना जगदीशपुरा पुलिस ने गुरुवार को लोडिंग टेंपो चालक हत्याकांड का खुलासा कर दिया। पुलिस ने चार बदमाशों को पकड़ा है। उनके पास लोडिंग टेंपो के पार्ट्स भी बरामद कर लिए। बदमाशों से पूछताछ में चौंकाने वाली बातें सामने आई हैं।
बदमाशों ने टेंपो के इंजन को कारखाना की मशीन में लगाने के लिए लूट और हत्या को अंजाम दिया था। पकड़े गए बदमाशों ने एक महीने पहले एक अन्य चालक की हत्या कर वैन लूटी थी। वैन को बैंक डकैती में इस्तेमाल करने का प्लान बनाया था।
इसके बाद 20 जनवरी को बोदला के अमरपुरा निवासी नवल किशोर राठौर के बेटे महेश की हत्या कर लोडिंग टेंपो लूट लिया गया था। उसकी लाश बिचपुरी नहर के पास पड़ी मिली थी। इसकी भी बेरहमी से हत्या की गई थी।
इनकी हुई गिरफ्तारी
इस मामले में पुलिस ने आकाश शर्मा निवासी किशोरपुरा, ज्ञानेंद्र इंदौलिया निवासी किरावली, परवेश कुमार निवासी सांवरा, फतेहपुर सीकरी और गोविंद राठौर निवासी सेक्टर तीन, आवास विकास कालोनी गिरफ्तार किया है। उनकी निशानदेही पर लोडर ऑटो की बॉडी और इंजन बरामद किया गया।
इंस्पेक्टर थाना जगदीशपुरा रमेश भारद्वाज ने बताया कि एक ईको कार भी मिली, जो कि 17 दिसंबर को चालक अनिल निवासी प्रकाश नगर की हत्या कर लूटी गई थी। पुलिस की पूछताछ में ज्ञानेंद्र ने बताया कि उसका पत्थर डिजाइनिंग का कारखाना है। इसमें मोटर लगी है।
मगर, उस पर ज्यादा डीजल खर्च होता है। इस कारण उसे छोटे मोटर के इंजन की जरूरत थी। वो लोडर टेंपो में होता है। इसलिए उसे लूटने का प्लान बनाया। आकाश ने बोदला से महेश का टेंपो कर लिया। उससे गेहूं के बोरे लाने की बात कही।
बेसमेंट बंधक बनाकर रखा
रात में ईको वैन से शव को फेंक आए। जिस पेट्रोल पंप से डीजल भरवाया था। वहां के सीसीटीवी कैमरों के फुटेज में आकाश की फोटो आ गई। फुटेज की मदद से पुलिस आरोपियों तक पहुंच गई।
इंस्पेक्टर रमेश कुमार भारद्वाज ने बताया कि आरोपी ज्ञानेंद्र का किरावली में पत्थर डिजाइनिंग का कारखाना है। आकाश डिजायनर और परवेश मजदूर है। गोविंद की घर में कंप्यूटर वर्क की दुकान है।
ब्लेड से नहीं मरा तो आरी से काटा गला
ज्ञानेंद्र ने गोविंद को कंप्यूटर ठीक करने के लिए बुलाया था। इससे उसकी मुलाकात हुई थी। ज्ञानेंद्र को कारखाना में ज्यादा फायदा नहीं हो रहा था। इस कारण वह बड़ा हाथ मारना चाहता था। उसने बैंक लूट की प्लानिंग की।
इसके लिए पश्चिमपुरी की एक बैंक की रेकी की थी। उन्हें रुपये ले जाने के लिए एक गाड़ी की आवश्यकता थी। इसके लिए तलाश शुरू कर दी। 17 दिसंबर को ज्ञानेंद्र रामबाग स्थित एक हास्पिटल में भर्ती अपने दोस्त को देखने गया।
उसके साथ परवेश और गोविंद भी थे। उन्होंने वैन लूटने का प्लान बनाया। अनिल की ईको वैन को किरावली तक मरीज ले जाने के लिए 1500 रुपये में तय कर लिया। उसे अपने कारखाना में ले जाकर टेप से बांध दिया।
इसके बाद वैन में ले जाकर ब्लेड से गला काटने लगे। मगर, गला कटा नहीं। बाद में वापस कारखाना आकर आरी ले गए। चलती वैन में उससे अनिल का गला काट दिया। इसके बाद लेदर पार्क के पास फेंककर भाग गए।