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अपनों का चेहरा भी नहीं पहचान पाए परिजन
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मिरहची के मोहल्ला गड्ढ़ा में आतिसबाजी के धमाके के बाद मौके पर जाने वाली भीड़ को रोकती पुलिस,वहीं ?
- फोटो : ETAH
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एटा। मिरहची कस्बा में वर्षों से पटाखे बनाने का काम किया जा रहा है। शनिवार को पटाखों में विस्फोट हुआ तो चीत्कार गूंजने लगे। शवों के अंग-भंग और जली अवस्था में देखकर लोग अपनों के चेहरे भी नहीं पहचान पाए। यही वजह रही कि एक की शिनाख्त देर शाम तक नहीं हो सकी। लोगों का जिला अस्पताल में तांता लगा रहा और लोग अपनों को खोजने में लगे रहे।
पटाखा विस्फोट होने के बाद एंबुलेंस के माध्यम से घायलों को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। छह घायलों की हालत नाजुक होने पर सैफई रेफर किया गया। महिला मुन्नी देवी की मौत जिला अस्पताल में उपचार के दौरान हो गई। जबकि पूजा, माधुरी, सोनी, रिजवान, मीरा और रजनी गंभीर रूप से जल गईं। इनमें सबसे ज्यादा खराब हालात रजनी और मीरा की है। दोनों बुरी तरह जल गईं हैं। घायलों में कुछ बच्चे ऐसे भी हैं जो धमाके के समय घर में मौजूद थे। मृतकों में खुशी का शरीर अंग भंग हो गया। मुन्नी देवी का एक हाथ कट कर हवा में उड़कर गायब हो गया। हादसे में ज्यादातर लोगों की मौत जलने से हुई है। इनके शरीर की खाल तक गायब होने से परिजन पहचान तक नहीं पा रहे हैं। परिवारीजनों को बुलाकर कई बार शिनाख्त कराने के प्रयास किए गए। एक साथ छह शवों को देखकर लोगों के दिल दहल उठे। अपनों को न पहचान पाने का गम लेकर लोग चीत्कार मचा रहे थे। ऐसी स्थिति में उनको संभालना मुश्किल हो रहा था।
जिला अस्पताल में डटे रहे सीएमओ
सूचना पर सीएमओ डॉ. अजय अग्रवाल जिला अस्पताल पहुंचे गए। ओपीडी कर रहे चिकित्सकों को अलर्ट करते हुए खुद डटे रहे। मरीजों के आते ही डॉक्टर और स्वास्थ्य कर्मियों ने घायलों का इलाज शुरू कर दिया।
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एंबुलेंस की सक्रियता आई नजर
प्रदेश में संचालित एंबुलेंस सेवा 108 और 102 की सक्रियता पटाखा विस्फोट के बाद नजर आई। स्वास्थ्य कर्मियों के साथ एंबुलेंस कर्मचारी घायलों को अस्पताल लाने में जुटे रहे। जिला कोआर्डिनेटर विष्णु यादव ने बताया कि जिले की 15 एंबुलेंस राहत और बचाव कार्य में लगाई गई थी, जबकि तीन एंबुलेंस कासगंज से आई थी। एंबुलेंस के स्टाफ ने पहले जिला अस्पताल और फिर सैफई तक मरीजों को पहुंचाने का कार्य किया।
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पटाखा विस्फोट होने के बाद एंबुलेंस के माध्यम से घायलों को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। छह घायलों की हालत नाजुक होने पर सैफई रेफर किया गया। महिला मुन्नी देवी की मौत जिला अस्पताल में उपचार के दौरान हो गई। जबकि पूजा, माधुरी, सोनी, रिजवान, मीरा और रजनी गंभीर रूप से जल गईं। इनमें सबसे ज्यादा खराब हालात रजनी और मीरा की है। दोनों बुरी तरह जल गईं हैं। घायलों में कुछ बच्चे ऐसे भी हैं जो धमाके के समय घर में मौजूद थे। मृतकों में खुशी का शरीर अंग भंग हो गया। मुन्नी देवी का एक हाथ कट कर हवा में उड़कर गायब हो गया। हादसे में ज्यादातर लोगों की मौत जलने से हुई है। इनके शरीर की खाल तक गायब होने से परिजन पहचान तक नहीं पा रहे हैं। परिवारीजनों को बुलाकर कई बार शिनाख्त कराने के प्रयास किए गए। एक साथ छह शवों को देखकर लोगों के दिल दहल उठे। अपनों को न पहचान पाने का गम लेकर लोग चीत्कार मचा रहे थे। ऐसी स्थिति में उनको संभालना मुश्किल हो रहा था।
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जिला अस्पताल में डटे रहे सीएमओ
सूचना पर सीएमओ डॉ. अजय अग्रवाल जिला अस्पताल पहुंचे गए। ओपीडी कर रहे चिकित्सकों को अलर्ट करते हुए खुद डटे रहे। मरीजों के आते ही डॉक्टर और स्वास्थ्य कर्मियों ने घायलों का इलाज शुरू कर दिया।
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एंबुलेंस की सक्रियता आई नजर
प्रदेश में संचालित एंबुलेंस सेवा 108 और 102 की सक्रियता पटाखा विस्फोट के बाद नजर आई। स्वास्थ्य कर्मियों के साथ एंबुलेंस कर्मचारी घायलों को अस्पताल लाने में जुटे रहे। जिला कोआर्डिनेटर विष्णु यादव ने बताया कि जिले की 15 एंबुलेंस राहत और बचाव कार्य में लगाई गई थी, जबकि तीन एंबुलेंस कासगंज से आई थी। एंबुलेंस के स्टाफ ने पहले जिला अस्पताल और फिर सैफई तक मरीजों को पहुंचाने का कार्य किया।