{"_id":"5a297b6c4f1c1b6a678c06c3","slug":"minor-boy-and-girl-in-agra-arrested-for-theft","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"11 साल की उम्र में लगा ऐसा शौक, मासूमों को 'बंटी-बबली' बनने में नहीं लगी देर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
11 साल की उम्र में लगा ऐसा शौक, मासूमों को 'बंटी-बबली' बनने में नहीं लगी देर
ब्यूरो/अमर उजाला आगरा
Updated Fri, 08 Dec 2017 08:55 AM IST
विज्ञापन
चोरी
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
11 साल की उम्र में स्कूटी चलाने का शौक हुआ तो आगरा में कक्षा छह के छात्र-छात्रा ने चोरी का रास्ता चुन लिया। जहां स्कूटी खड़ी देखते, उसे चोरी कर लेते। इसमें जब तक पेट्रोल रहता था, तब तक दौड़ाते।
इसके बाद सड़क किनारे रखकर चल देते। घर ले जाते तो पकड़े जाने का डर था। कमला नगर में स्कूटी चोरी का प्रयास करते छात्र को पकड़ लिया गया। पूछताछ में उसने कई स्कूटी चोरी करना कबूला। बच्चों की हरकत के बारे में सुनकर पुलिस भी सकते में पड़ गई।
मामला थाना न्यू आगरा क्षेत्र का है। बुधवार को एक कांप्लेक्स के बाहर से एक 11 साल का बालक स्कूटी की डिकी खोलने का प्रयास कर रहा था। स्कूटी मालिक ने उसे देख लिया। उसने बालक को पकड़ लिया। इसके बाद पुलिस को सूचना दी।
विज्ञापन
पुलिस ने उससे पूछताछ की। उसने बताया कि वह शौक पूरा करने के लिए स्कूटी चोरी करते हैं। वह न्यू आगरा क्षेत्र के एक मोहल्ले में रहता है। घर के पास ही रहने वाली एक बालिका से उसकी दोस्ती है। वह भी चोरी में साथ देती है। बालक और बालिका हरीपर्वत सर्किल के स्कूलों में पढ़ते हैं।
विज्ञापन
इसके बाद सड़क किनारे रखकर चल देते। घर ले जाते तो पकड़े जाने का डर था। कमला नगर में स्कूटी चोरी का प्रयास करते छात्र को पकड़ लिया गया। पूछताछ में उसने कई स्कूटी चोरी करना कबूला। बच्चों की हरकत के बारे में सुनकर पुलिस भी सकते में पड़ गई।
विज्ञापन
मामला थाना न्यू आगरा क्षेत्र का है। बुधवार को एक कांप्लेक्स के बाहर से एक 11 साल का बालक स्कूटी की डिकी खोलने का प्रयास कर रहा था। स्कूटी मालिक ने उसे देख लिया। उसने बालक को पकड़ लिया। इसके बाद पुलिस को सूचना दी।
विज्ञापन
पुलिस ने उससे पूछताछ की। उसने बताया कि वह शौक पूरा करने के लिए स्कूटी चोरी करते हैं। वह न्यू आगरा क्षेत्र के एक मोहल्ले में रहता है। घर के पास ही रहने वाली एक बालिका से उसकी दोस्ती है। वह भी चोरी में साथ देती है। बालक और बालिका हरीपर्वत सर्किल के स्कूलों में पढ़ते हैं।
ऐसे हुई शुरुआत
एक दिन छात्र ने अपने दोस्तों को स्कूटी पर आता देखा था। इसलिए खुद भी स्कूटी लाने की सोची। मगर, घरवालों ने मना कर दिया। इस पर दोनों ने एक साल पहले स्कूटी चारी की। घर में झूठ बोल दिया कि दोस्त की लेकर आए हैं।
इसके बाद दोस्तों को बताया कि वह खरीदकर लाए हैं। स्कूटी में जब तक पेट्रोल रहता, उसे चलाते थे। इसके बाद सड़क पर कहीं भी खड़ी करके चल देते थे। इसी तरह कई स्कूटी को चोरी कर चुके हैं। बालक के पास से चाभियों का गुच्छा भी मिला, जिसमें स्कूटी की कई चाभियां थीं।
इसके बाद दोस्तों को बताया कि वह खरीदकर लाए हैं। स्कूटी में जब तक पेट्रोल रहता, उसे चलाते थे। इसके बाद सड़क पर कहीं भी खड़ी करके चल देते थे। इसी तरह कई स्कूटी को चोरी कर चुके हैं। बालक के पास से चाभियों का गुच्छा भी मिला, जिसमें स्कूटी की कई चाभियां थीं।
पुलिस भी नहीं कर पा रही थी खोज
इंस्पेक्टर थाना न्यू आगरा के मुताबिक, क्षेत्र में कई बार एक्टिवा चोरी की घटनाएं र्हुईं। इनमें से कई एक्टिवा कुछ दिन बाद बरामद हो जाती थी। इससे पता नहीं चल पा रहा था कि स्कूटी को कौन चुरा रहा है। पकड़े गए बालक और बालिका ही एक्टिवा को चोरी करते थे। कुछ दिन चलाने के बाद छोड़ जाते थे।
पकड़े गए बालक के पिता नहीं हैं। पुलिस ने उसकी मां को बुलाया। वहीं बालिका के माता-पिता को बुलाया गया। दोनों ने सुना तो शर्मिंदा हुए। सीओ हरीपर्वत एएसपी श्लोक कुमार ने बताया कि दोनों 11 साल के हैं।
उन्हें किशोर न्याय बोर्ड के समक्ष पेश किया जाएगा। अभी उन्हें परिवारीजनों के सुपुर्द किया गया है। स्कूटी चोरी करने के बाद दोनों डिकी चेक करते थे। उसमें कभी पर्स तो कभी टिफिन में भोजन मिलता था। पर्स में रुपये मिलने पर खर्च कर देते थे।
पकड़े गए बालक के पिता नहीं हैं। पुलिस ने उसकी मां को बुलाया। वहीं बालिका के माता-पिता को बुलाया गया। दोनों ने सुना तो शर्मिंदा हुए। सीओ हरीपर्वत एएसपी श्लोक कुमार ने बताया कि दोनों 11 साल के हैं।
उन्हें किशोर न्याय बोर्ड के समक्ष पेश किया जाएगा। अभी उन्हें परिवारीजनों के सुपुर्द किया गया है। स्कूटी चोरी करने के बाद दोनों डिकी चेक करते थे। उसमें कभी पर्स तो कभी टिफिन में भोजन मिलता था। पर्स में रुपये मिलने पर खर्च कर देते थे।