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Mig-29 Crash: समंदर के रास्ते 37 साल पहले लाए गए थे रूसी बाज, भारत था ऐसा पहला देश, जिसे सबसे पहले मिले मिग-29

Thu, 07 Nov 2024 09:45 AM IST
विजय पुंडीर अमित कुलश्रेष्ठ, अमर उजाला, आगरा
अमित कुलश्रेष्ठ, अमर उजाला, आगरा Published by: विजय पुंडीर Updated Thu, 07 Nov 2024 09:45 AM IST
सार

पाकिस्तान के पास मौजूद अमेरिकी एफ-16 विमानों के मुकाबले के लिए खरीदे गए रूसी बाज मिग-29 को 37 साल पहले ही भारतीय वायुसेना ने अपने बेड़े में शामिल किया था।

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Mig-29 aircraft were brought via sea route 37 years ago
फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

आदमपुर एयरफोर्स स्टेशन से उड़ान भरकर आगरा में दुर्घटनाग्रस्त हुआ मिग-29 विमान 37 साल पुराना है। रूस से 37 साल पहले 4 जनवरी 1987 को समंदर के रास्ते पानी के जहाज से मिग-29 यानी बाज को भारत लाया गया था। इन्हें मुंबई बंदरगाह पर उतारा गया। रूस में तैयार किए गए 40 विमानों के कलपुर्जों को खोलकर समुद्री जहाज से लाया गया, जिन्हें नासिक की हिंदुस्तान एयरोनोटिक्स लिमिटेड में फिर से तैयार किया गया था।

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पाकिस्तान के पास मौजूद अमेरिकी एफ-16 विमानों के मुकाबले के लिए खरीदे गए रूसी बाज मिग-29 को 37 साल पहले ही भारतीय वायुसेना ने अपने बेड़े में शामिल किया था। समुद्री मार्ग से लाने के बाद इन्हें रूस से आए 6 इंजीनियरों ने नासिक की एचएएल फैक्टरी में जोड़ा और रूस के 8 लड़ाकू विमान पायलटों ने इनका परीक्षण किया। 4 मई 1987 तक मिग-29 विमानों के दो स्क्वाड्रन मिल गए थे। इन विमानों का 7 माह तक परीक्षण चला। रूस से हुई डील के तहत 45 विमान रूस से आने थे, जबकि 135 मिग-29 विमान एचएएल की नासिक फैक्टरी में तैयार किए जाने थे।

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पुणे में बना वायुसेना का हिस्सा
सात माह के परीक्षण के बाद रूसी बाज मिग-29 विमानों को पुणे में हुए एक कार्यक्रम में 6 दिसंबर 1987 को भारतीय वायुसेना का हिस्सा बनाया गया। तत्कालीन रक्षामंत्री केसी पंत ने इनकी पहली उड़ान को हरी झंडी दिखाई थी। एक माह बाद 8 जनवरी 1988 को तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने भी मिग-29 विमानों के कॉकपिट में जाकर मिग-29 के पायलट और वीर चक्र विजेता विंग कमांडर हरीश सामंद से इन विमानों की तकनीकी खूबियों के बारे में जानकारी की थी। वायुसेना ने मिग-29 की दो स्क्वाड्रन तैयार कीं। 28 वीं और 47 वीं स्क्वाड्रन मिग-29 विमान के लिए जानी गईं।

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भारत पहला देश, जिसे मिग-29 मिले
अमेरिका के एफ-16 फाइटर जेट का मुकाबला करने के लिए रूस ने दो इंजन वाले अत्याधुनिक मिग-29 विमानों का निर्माण किया था। भारत पहला ऐसा देश था, जिसे यह सबसे पहले दिया गया। भारत सरकार ने रूस से 45 मिग-29 विमानों की खरीद का फैसला 1986 में किया था। मिग-21 विमानों के लगातार हादसों के बाद सरकार ने मिग-29 की खरीद को अंतिम रूप दिया था। इन्हें 4 जनवरी 1987 को भारत में अर्धविकसित स्थिति में लाया गया। मिग-29 विमान तय समय से चार माह पहले ही भारत को सौंप दिए गए थे। रूस से वार्सा संधि संगठन वाले देशों को भी तब मिग-29 विमान नहीं दिए थे।

हल्दिया में मिग-29 के लिए स्वदेशी ईंधन
रूस से मिग-29 विमान 1987 में ही मिल गए, लेकिन इनके लिए पूरी तरह से स्वदेशी ईंधन को 5 साल बाद 1992 में तैयार किया जा सका। भारतीय तेल निगम की हल्दिया रिफाइनरी में मिग-29 विमानों के लिए ईंधन तैयार किया गया। दो इंजन वाले अत्याधुनिक मिग-29 विमानों में 9 हथियार लगाने की जगह थी, जिनमें 6 ए-10 मिसाइल, दो मिसाइल विंग के नीचे और इंजन एयर डक्ट के नीचे एक लगाने की व्यवस्था थी। स्क्वाड्रन लीडर (रि) एके सिंह के मुताबिक 37 साल पहले मिग-29 विमान अमेरिकी एफ-16 फाइटर जेट के मुकाबले के लिए लाए गए थे। यह कई मायनों में एफ-16 से बेहतर और शानदार विमान है।

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