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बसपाः चुनावों में हार की टीस पर निकाले सातों नेता, कभी नौ एमएलए-एमएलसी थे, अब एक भी नहीं

Tue, 12 Nov 2019 11:01 AM IST
Abhishek Saxena न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा Published by: Abhishek Saxena Updated Tue, 12 Nov 2019 11:01 AM IST
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Mayawati Expelled Seven Leaders From Bsp Up Political Update News
सुनील चित्तौड़, पूर्व एमएलसी - फोटो : अमर उजाला
लोकसभा चुनाव में आगरा लोकसभा से बसपा, सपा गठबंधन से लड़े मनोज सोनी की हार के बाद ही तय हो गया था कि बसपा में बड़े पैमाने पर नेताओं का निष्कासन होना है।
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दलितों की राजधानी माने जाने वाले आगरा से बसपा ने जीत की उम्मीद लगाई थी, लेकिन परिणाम आने पर स्थानीय नेताओं पर हार का ठीकरा फोड़ा गया। तभी से चारों पूर्व विधायक और तीनों पूर्व जिलाध्यक्षों के निष्कासन की पटकथा लिखी जाने लगी थी।
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लोकसभा चुनाव में हार के बाद एक तिहाई यूपी के कोऑर्डिनेटर, सेक्टर प्रभारी बनाए गए सुनील चित्तौड़ को उत्तराखंड भेज दिया गया था। केवल एक विधानसभा में दो अन्य प्रभारियों के साथ उन्हें काम करने को कहा गया। हाल में छह नवंबर को लखनऊ में हुई बैठक में चित्तौड़ को बुलाया नहीं गया। इसी तरह पूर्व विधायक कालीचरन सुमन, वीरू सुमन को कोई जिम्मेदारी नहीं सौंपी गई।
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दस महीने में तीसरी बार भारतेंदु का निष्कासन
बसपा के जिलाध्यक्ष रहे भारतेंदु अरुण को महज दस महीने में तीन बार निष्कासन झेलना पड़ा। उन्हें जनवरी में पार्टी प्रमुख के जन्मदिन के एक दिन बाद ही हटाया गया, वहीं लोकसभा चुनाव की घोषणा के तुरंत बाद फिर से निष्कासित कर दिया गया। हार के बाद पार्टी में वह वापस लिए गए तो अब फिर से निष्कासित कर दिए गए।

कभी नौ एमएलए-एमएलसी थे, अब एक भी नहीं
दलितों की राजधानी माने जाने वाले आगरा में बसपा ने 2007 के विधानसभा चुनाव में जिले की नौ में से छह विधानसभा सीटें जीतीं। 2012 में एत्मादपुर, फतेहाबाद, खेरागढ़, फतेहपुर सीकरी, आगरा ग्रामीण, आगरा छावनी सीट पर बसपा विधायक जीते।

तब तीन एमएलसी सुनील चित्तौड़, वीरू सुमन और प्रताप सिंह बघेल भी थे, लेकिन अब बसपा में वह एक भी नेता शामिल नहीं है, जिन्होंने विधानसभा चुनाव लड़ा। पूर्व एमएलसी सुनील चित्तौड़ से पहले धर्म प्रकाश भारतीय भी पार्टी से निष्कासित किए जा चुके हैं। इसी साल फतेहपुर सीकरी लोकसभा चुनाव लड़ चुके गुड्डू पंडित भी निष्कासित किए जा चुके हैं।
 

पार्टी अध्यक्ष को गुमराह किया गया, हमारी गलती नहीं
मैने पूरी शिद्दत से पार्टी के लिए काम किया। जहां लगाया, वहां मेहनत की। लोकसभा चुनाव में पार्टी का वोट दो लाख बढ़ाया जो पूरे मंडल की सीटों में सबसे ज्यादा है। किसी ने बहनजी को गुमराह किया है। अनुशासनहीनता का एक भी मामला नहीं है। -सुनील चित्तौड़, पूर्व एमएलसी

पार्टी अध्यक्ष के सामने अपना पक्ष रखेंगे
मैं और मेरे पिता ने बसपा के सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय की नीतियों के मुताबिक ही काम किया। बहनजी को जो गुमराह कर रहे हैं, वह पार्टी हित में नहीं हैं। हम दोनों पार्टी अध्यक्ष से मिलकर अपना पक्ष रखने का प्रयास करेंगे। हम किसी दल में नहीं जा रहे। -वीरू सुमन, पूर्व एमएलसी
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