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मेरी पहचान मेरी लाडलीः ग्रीस की रेसलर को पटखनी देकर इस बिटिया ने बनाई पहचान
न्यूज डेस्क, अमर उजाला मथुरा
Updated Mon, 22 Jan 2018 11:39 AM IST
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नीलम अपने कोच के साथ
- फोटो : अमर उजाला
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किशोरावस्था में ग्रीस की पहलवान को चित्त कर कांस्य पदक जीतने वाली फैंचरी की नीलम चौधरी राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय खेलों में भारत का प्रतिनिधित्व करने की तमन्ना रखती है। पदक हासिल कर इंडिया का नाम रोशन करने के लिए वह लालायित भी दिख रही है।
वर्तमान में फुफेरी बहन के साथ फ्रांस के कोच से बंगलूरू में रेसलिंग के दांव-पेच सीख रही नीलम देश की युवतियों को आत्मरक्षा के लिए रेसलर बनने की वकालत करती हैं।
वृंदावन के गांव फैंचरी की पगडंडियों पर खेलकूद कर बड़ी हुई नीलम 11 साल की उम्र में अपने फूफा जर्नादन पहलवान से कुश्ती के गुर सीखने लगी। इसके बाद नीलम ने जीतोड़ मेहनत करके अपने को कुश्ती के लिए मजबूत किया।
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वर्तमान में फुफेरी बहन के साथ फ्रांस के कोच से बंगलूरू में रेसलिंग के दांव-पेच सीख रही नीलम देश की युवतियों को आत्मरक्षा के लिए रेसलर बनने की वकालत करती हैं।
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वृंदावन के गांव फैंचरी की पगडंडियों पर खेलकूद कर बड़ी हुई नीलम 11 साल की उम्र में अपने फूफा जर्नादन पहलवान से कुश्ती के गुर सीखने लगी। इसके बाद नीलम ने जीतोड़ मेहनत करके अपने को कुश्ती के लिए मजबूत किया।
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16 साल की हुई नीलम ने तीन माह पूर्व ग्रीस में हुई महिला कुश्ती में ग्रीस की पहलवान को पटखनी देकर कांस्य पदक जीत लिया। नीलम की तमन्ना है कि वह देश के लिए कॉमनवेल्थ और एशियाड खेलों में प्रतिनिधित्व करे। इन खेलों में विरोधी पहलवानों को चित्तकर देश के पदक जीते।
वर्तमान में नीलम चौधरी बंगलूरू के जेएसडब्लू ट्रेनिंग सेंटर में फ्रांस के कोच डेमिन से कुश्ती और आत्मरक्षा के गुर सीख रही है। रेसलर नीलम का कहना है कि वह ब्रज की युवतियों में पहलवानी से लेकर दूसरे क्षेत्रों में नाम कमाने का पूरा माद्दा है लेकिन उनको सही मार्गदर्शन की जरूरत है।
वर्तमान में नीलम चौधरी बंगलूरू के जेएसडब्लू ट्रेनिंग सेंटर में फ्रांस के कोच डेमिन से कुश्ती और आत्मरक्षा के गुर सीख रही है। रेसलर नीलम का कहना है कि वह ब्रज की युवतियों में पहलवानी से लेकर दूसरे क्षेत्रों में नाम कमाने का पूरा माद्दा है लेकिन उनको सही मार्गदर्शन की जरूरत है।