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नगर निगम के बाद ऐसे बदलेगी मथुरा की सूरत
ब्यूरो/अमर उजाला मथुरा
Updated Tue, 09 May 2017 10:07 PM IST
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नक्शा
- फोटो : अमर उजाला
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नगर निगम बनाए गए मथुरा को पांच साल के भीतर 500 करोड़ का बजट मिलेगा। 100 करोड़ रुपया इसी साल में जारी होगा। प्रदेश सरकार के प्रवक्ता और कैबिनेट मंत्री श्रीकांत शर्मा ने कहा कि मथुरा- वृंदावन के विकास में पैसे की कहीं कोई कमी नहीं आने दी जाएगी। विकास की योजनाओं का जल्द ही खाका तैयार किया जाएगा। सड़कें, नालियां, लाइटिंग, बिजली और नगर निगम की सीमा में शामिल होने वाले गांवों का विकास किया जाएगा।
नगर पालिका को नगर निगम बनने के साथ ही कई बड़ी योजनाओं की शुरुआत की जाएगी। नया भवन बनाया जाएगा। पचास से भी ज्यादा पदों का सृजन किया जाएगा। पांच साल के भीतर विकास के लिए 500 करोड़ रुपया मिलेगा। इसी वर्ष में 100 करोड़ का बजट जारी किया जाएगा।
बताया जाता है कि शासन ने नगर निगम की घोषणा के साथ ही मथुरा के विकास का प्रस्तावित बजट तय कर लिया है। मथुरा को तीर्थस्थल भी घोषित किया जाना है लिहाजा यमुना के किनारे आकर्षक घाट तैयार होंगे। मथुरा से वृंदावन तक मेट्रो की तर्ज पर ट्रेनों का संचालन कराया जाएगा। मथुरा में आने वाले कृष्ण भक्तों के ठहराव के लिए भी सरकारी व्यवस्था की जाएगी। गेस्ट हाउस का निर्माण होगा।
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नगर पालिका को नगर निगम बनने के साथ ही कई बड़ी योजनाओं की शुरुआत की जाएगी। नया भवन बनाया जाएगा। पचास से भी ज्यादा पदों का सृजन किया जाएगा। पांच साल के भीतर विकास के लिए 500 करोड़ रुपया मिलेगा। इसी वर्ष में 100 करोड़ का बजट जारी किया जाएगा।
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बताया जाता है कि शासन ने नगर निगम की घोषणा के साथ ही मथुरा के विकास का प्रस्तावित बजट तय कर लिया है। मथुरा को तीर्थस्थल भी घोषित किया जाना है लिहाजा यमुना के किनारे आकर्षक घाट तैयार होंगे। मथुरा से वृंदावन तक मेट्रो की तर्ज पर ट्रेनों का संचालन कराया जाएगा। मथुरा में आने वाले कृष्ण भक्तों के ठहराव के लिए भी सरकारी व्यवस्था की जाएगी। गेस्ट हाउस का निर्माण होगा।
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ये ये होगा
यमुना के घाटों पर स्नान
- फोटो : अमर उजाला
- नगर आयुक्त की तैनाती होगी
- अपर नगर आयुक्त पोस्ट किए जाएंगे
- अधिशासी अभियंताओं की तैनाती होगी
- जूनियर इंजीनियरों की फौज खड़ी होगी
- पथ प्रकाश व्यवस्था का अलग विभाग होगा
- जलकल विभाग का उच्चीकरण किया जाएगा
- अतिक्रमण हटाने को पूरी टीम तैनात होगी
- गृहकर और जलकर वसूली के लिए टीमें बनेंगी
- नगर निगम में शामिल 51 गांवों का विकास होगा
- यमुना के किनारे आकर्षक घाट बनाए जाएंगे
- मथुरा को तीर्थस्थल घोषित किया जाएगा
- अपर नगर आयुक्त पोस्ट किए जाएंगे
- अधिशासी अभियंताओं की तैनाती होगी
- जूनियर इंजीनियरों की फौज खड़ी होगी
- पथ प्रकाश व्यवस्था का अलग विभाग होगा
- जलकल विभाग का उच्चीकरण किया जाएगा
- अतिक्रमण हटाने को पूरी टीम तैनात होगी
- गृहकर और जलकर वसूली के लिए टीमें बनेंगी
- नगर निगम में शामिल 51 गांवों का विकास होगा
- यमुना के किनारे आकर्षक घाट बनाए जाएंगे
- मथुरा को तीर्थस्थल घोषित किया जाएगा
167 किमी में फैला है मथुरा-वृंदावन नगर निगम
mathura
- फोटो : amar ujala
मथुरा-वृंदावन नगर निगम 167 किलोमीटर के दायरे में फैला होगा। 6.25 लाख की आबादी आती है निगम के दायरे में। इसमें मथुरा पालिका की आबादी 5,63,691 है, जिसमें नए 51 गांवों की आबादी 2.23 लाख भी शामिल है। इसके अलावा वृंदावन नगर पालिका क्षेत्र की आबादी 63,117 भी इसी का हिस्सा है। इस तरह मथुरा-वृंदावन 6,25,808 आबादी वाला नगर निगम हो गया है।
क्षेत्रफल के मामले में नया नगर निगम 16529.075 हेक्टेयर में है। इसमें मथुरा का क्षेत्रफल 16146.931 हेक्टेयर और वृंदावन नगर पालिका का क्षेत्रफल हिस्सा बना है। वृंदावन में 1.20 लाख मकान मौजूद हैं, जिसमें मथुरा पालिका क्षेत्र में स्थित एक लाख भवन हैं।
करीब एक दशक से भगवान श्रीकृष्ण की जन्म और लीला स्थली को नगर निगम का दर्जा दिए जाने की पहल हो रही थी। अखिलेश सरकार में इसका प्रस्ताव तीन बार शासन को भेजा गया। गोवर्धन आगमन के दौरान तो उन्होंने इसकी घोषणा भी कर दी थी, लेकिन स्थानीय अंतर विरोध के चलते अखिलेश सरकार ने कदम पीछे खींच लिए। डेढ़ माह पहले सत्ता संभालते ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इसकी इच्छा जता दी। छठवीं कैबिनेट में इसे मंगलवार को स्वीकृति प्रदान कर दी गई।
क्षेत्रफल के मामले में नया नगर निगम 16529.075 हेक्टेयर में है। इसमें मथुरा का क्षेत्रफल 16146.931 हेक्टेयर और वृंदावन नगर पालिका का क्षेत्रफल हिस्सा बना है। वृंदावन में 1.20 लाख मकान मौजूद हैं, जिसमें मथुरा पालिका क्षेत्र में स्थित एक लाख भवन हैं।
करीब एक दशक से भगवान श्रीकृष्ण की जन्म और लीला स्थली को नगर निगम का दर्जा दिए जाने की पहल हो रही थी। अखिलेश सरकार में इसका प्रस्ताव तीन बार शासन को भेजा गया। गोवर्धन आगमन के दौरान तो उन्होंने इसकी घोषणा भी कर दी थी, लेकिन स्थानीय अंतर विरोध के चलते अखिलेश सरकार ने कदम पीछे खींच लिए। डेढ़ माह पहले सत्ता संभालते ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इसकी इच्छा जता दी। छठवीं कैबिनेट में इसे मंगलवार को स्वीकृति प्रदान कर दी गई।