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मथुरा: शिखर पर पहुंचे विष्णु पहलवान, पकड़ी विजय पताका
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मथुरा। वृंदावन स्थित रंगजी मंदिर प्रांगण में मेले मे लट्ठे पर चढ़ते अंतर्यामी अखाड़े के पहलवान।
- फोटो : VRINDAVAN
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वृंदावन (मथुरा)। उत्तर भारत का प्रसिद्ध रंगजी मंदिर प्रांगण बुधवार को लठा मेला का साक्षी बना। करीब 40 फीट ऊंचे लकड़ी के चिकने खंभे पर चढ़ने के लिए जब पहलवानों ने जोर आजमाइश की तो वहां मौजूद हजारों लोगों की भीड़ ने उनकी हौसलाअफजाई की। काफी प्रयास के बाद विष्णु पहलवान शिखर पर पहुंचे और विजय पताका पकड़ी तो परिसर भगवान रंगनाथ के जयकारे से गुंजायमान हो गया।
पिछले वर्ष कोरोना महामारी के चलते आयोजित न होने वाले लठा मेले को लेकर इस वर्ष भक्तों में खासा उत्साह देखा गया। सायंकाल ठाकुर श्री गोदा रंगमन्नार भगवान कल्पवृक्ष पर सवार होकर मुख्य गर्भगृह से बाहर निकले। चहुंओर ठाकुरजी की जयजयकार सुनाई देने लगी। मंदिर के सिंहद्वार पर सवारी के पहुंचते ही पहले से तैयार खड़े अंतर्यामी अखाड़ा दुसायत के पहलवान ठाकुरजी का आशीर्वाद लेने पहुंचे।
इसके बाद करीब 40 फुट ऊंचे लकड़ी के चिकने खंभे पर चढ़ने को जोर आजमाइश शुरू हो गई। इधर, पहलवान पिरामिड बनाकर क्रमबद्ध ऊपर चढ़ने की कवायद शुरू करते उधर ऊपर मंच पर बैठे मंदिर के कर्मचारी तेल मिश्रित पानी की तेज धार पहलवानों पर गिराना शुरू कर देते। जिससे ऊपर चढ़ने का प्रयास कर रहे पहलवान नीचे गिर जाते। यह दौर करीब चालीस मिनट तक चलता रहा।
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बाद में पहलवान राधा कृष्ण के नेतृत्व में चालीस पहलवानों का दल पहुंचा और चढ़ने का प्रयास किया। इस प्रयास में विष्णु पहलवान सबसे पहले शिखर तक पहुंच गए। जैसे ही उन्होंने विजय पताका पकड़ी संपूर्ण परिसर रंगनाथ भगवान की जयजयकार से गुंजायमान हो उठा।
इसके बाद विजयी पहलवानों को मंदिर प्रबंधन की तरफ से कार्यवाहक प्रबंधक लखनलाल पाठक ने ठाकुरजी की कृपा प्रसादी भेंट की। जितेंद्र, सुरेशचंद्र, अमर सिंह, गिरधारी राजपूत, प्रशांत, नवरत्न, रामजीत सिंह, विष्णु, लोकेश, बांके, चिराग, चंद्रपाल, जगन्नाथ, मनमोहन, रमेशचंद्र शास्त्री, नत्थी सिंह, आशीष ठाकुर, अरुण राजपूत आदि शामिल रहे।
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पिछले वर्ष कोरोना महामारी के चलते आयोजित न होने वाले लठा मेले को लेकर इस वर्ष भक्तों में खासा उत्साह देखा गया। सायंकाल ठाकुर श्री गोदा रंगमन्नार भगवान कल्पवृक्ष पर सवार होकर मुख्य गर्भगृह से बाहर निकले। चहुंओर ठाकुरजी की जयजयकार सुनाई देने लगी। मंदिर के सिंहद्वार पर सवारी के पहुंचते ही पहले से तैयार खड़े अंतर्यामी अखाड़ा दुसायत के पहलवान ठाकुरजी का आशीर्वाद लेने पहुंचे।
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इसके बाद करीब 40 फुट ऊंचे लकड़ी के चिकने खंभे पर चढ़ने को जोर आजमाइश शुरू हो गई। इधर, पहलवान पिरामिड बनाकर क्रमबद्ध ऊपर चढ़ने की कवायद शुरू करते उधर ऊपर मंच पर बैठे मंदिर के कर्मचारी तेल मिश्रित पानी की तेज धार पहलवानों पर गिराना शुरू कर देते। जिससे ऊपर चढ़ने का प्रयास कर रहे पहलवान नीचे गिर जाते। यह दौर करीब चालीस मिनट तक चलता रहा।
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बाद में पहलवान राधा कृष्ण के नेतृत्व में चालीस पहलवानों का दल पहुंचा और चढ़ने का प्रयास किया। इस प्रयास में विष्णु पहलवान सबसे पहले शिखर तक पहुंच गए। जैसे ही उन्होंने विजय पताका पकड़ी संपूर्ण परिसर रंगनाथ भगवान की जयजयकार से गुंजायमान हो उठा।
इसके बाद विजयी पहलवानों को मंदिर प्रबंधन की तरफ से कार्यवाहक प्रबंधक लखनलाल पाठक ने ठाकुरजी की कृपा प्रसादी भेंट की। जितेंद्र, सुरेशचंद्र, अमर सिंह, गिरधारी राजपूत, प्रशांत, नवरत्न, रामजीत सिंह, विष्णु, लोकेश, बांके, चिराग, चंद्रपाल, जगन्नाथ, मनमोहन, रमेशचंद्र शास्त्री, नत्थी सिंह, आशीष ठाकुर, अरुण राजपूत आदि शामिल रहे।