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यमुना में प्रदूषण से भक्त आहत: बोले- जितना अधिक बजट बना उतना ही ज्यादा प्रदूषण हुआ

Fri, 16 Jul 2021 02:00 PM IST
मुकेश कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मथुरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मथुरा Published by: मुकेश कुमार Updated Fri, 16 Jul 2021 02:00 PM IST
सार

मथुरा में यमुना नदी में बढ़ते प्रदूषण से लोग आहत हैं। उनका कहना है कि 40 वर्षों में यमुना के जल में प्रदूषण को दूर करने के लिए करोड़ों रुपये बहा दिए, जबकि वास्तविकता में यमुना का जल दिल्ली से एक बूंद भी नहीं आ रहा। 

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Mathura Devotees hurt due to pollution in Yamuna
यमुना नदी में किनारे जमा हुई गंदगी - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

यमुना जल लाओ अभियान के संस्थापक मुकेश चतुर्वेदी एडवोकेट ने सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा है कि आजादी के बाद देश का सबसे बड़ा घोटाला यमुना प्रदूषण योजना है, जिसमें अंतरराष्ट्रीय स्तर से करोड़ों रुपये सहयोग राशि के रूप में भारत सरकार ने लिए हैं और करोड़ों रुपये सरकार ने नमामि गंगे परियोजना के तहत खर्च किए। इस योजना के अंतर्गत यमुना प्रदूषण का कार्य भी शामिल कर दिया। करोड़ों के बजट बने, जितना अधिक बजट बना उतना ही अधिक प्रदूषण यमुना में होता रहा।  

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यमुना भक्त संजय चतुर्वेदी महल का कहना है कि जब कोई भी व्यक्ति नदी में किसी भी तरह की प्रतिबंधित वस्तु डालता है तो उसके ऊपर केस दर्ज हो जाता है, जुर्माना होता है, लेकिन यमुना नदी में धारा को बिल्कुल रोक दिया गया है और फिर उसमें दिल्ली, हरियाणा और उत्तर प्रदेश सरकार जब सीधे नाले नदी में बहा रहे हैं तो उनके ऊपर कार्रवाई क्यों नहीं। क्या वह कानून से ऊपर हैं। 
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यमुना प्रदूषण निवारण समिति के अध्यक्ष महेश लड्डू चतुर्वेदी का कहना है नमामि गंगे के अंतर्गत 500 करोड़ रुपये का कार्य जिसकी अवधि 2020 फरवरी में पूर्ण हो चुकी है लेकिन करोना काल के दौरान कार्यदायी संस्था को पूरा समय मिला। इसके बावजूद भी एक छोटा नाला यमुना में जाने से नहीं रोका। ऐसी संस्थाओं के विरुद्ध कार्रवाई होनी चाहिए। 
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यमुना की निर्मल धारा न रोकी जाए: विजय
विश्वधर्म रक्षकदल के अध्यक्ष विजय चतुर्वेदी ने बताया कि हथिनी कुंड के आगे 140 किमी तक यमुना सूखी रेत है। सरकार यमुना सफाई के नाम पर करोड़ों रुपये का घोटाला कर रही है। केंद्र एवं राज्य सरकारों ने जिस सीवर ट्रीटमेंट प्लांटों पर जनता के धन का दुरुपयोग किया है वो गंदे नालों की सफाई के लिए किया है न कि यमुना सफाई के लिए। यमुना जल तो अपने आप में विशुद्ध और निर्मल है। यदि यमुना गंगा की निर्मल धारा को न रोका जाए तो देश में शुद्ध जल की कमी नहीं रह सकती और न ही संस्कृति का विनाश होगा। 

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