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मथुरा: मस्जिद कमेटी ने श्रीकृष्ण जन्मभूमि के दावे को बताया गलत, कोर्ट से खारिज करने की मांग
Tue, 23 Mar 2021 12:38 AM IST
मुकेश कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मथुरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मथुरा
Published by: मुकेश कुमार
Updated Tue, 23 Mar 2021 12:38 AM IST
सार
- सिविल जज सीनियर डिवीजन की अदालत में दाखिल किया जवाब
- अदालत ने अगली सुनवाई की तारीख एक अप्रैल की तय
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श्रीकृष्ण जन्मस्थान मंदिर और पास में स्थित शाही मस्जिद ईदगाह, मथुरा।
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
मथुरा के श्रीकृष्ण जन्मस्थान की 13.37 एकड़ जमीन को लेकर चल रहे कानूनी विवाद में दावे के प्रतिवादी इंतजामिया शाही मस्जिद कमेटी के सचिव ने ठाकुर केशवदेव महाराज के दावे को गलत बताया है। उन्होंने कहा कि दावा पूजा स्थल अधिनियम 1991 के खिलाफ है।
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सोमवार को दावे को खारिज करने की मांग अदालत से की गई। वहीं, दावे के वादी श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्ति आंदोलन समिति के अध्यक्ष ने कहा है कि उक्त एक्ट को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी जा रही है। इधर, अदालत ने अगली सुनवाई की तारीख एक अप्रैल तय की है।
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समिति के अध्यक्ष एडवोकेट महेंद्र प्रताप सिंह द्वारा अदालत में दावा किया कि शाही मस्जिद ईदगाह को इसी जमीन पर मंदिर को तोड़कर बनाया गया है। प्रतिवादी पक्षों में यूपी सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड चेयरमैन, कमेटी ऑफ मैनेजमेंट ट्रस्ट शाही मस्जिद के सचिव के अलावा श्रीकृष्ण जन्मभूमि ट्रस्ट के ट्रस्टी व श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संस्थान के सचिव शामिल हैं।
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यह आरोप लगाया था
महेंद्र प्रताप सिंह ने शाही मस्जिद के सचिव व यूपी सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड चेयरमैन पर आरोप लगाया गया था कि वह मस्जिद में लगे उन पत्थरों को हटाने का प्रयास कर रहे हैं जो कि मंदिर तोड़कर मस्जिद बनाते समय लगाए थे। इसे लेकर उनके द्वारा अदालत में अमीन कमीशन की रिपोर्ट, स्टे, रिसीवर आदि की मांग की गई थी।
समिति के अध्यक्ष ने कहा कि पूजा स्थल अधिनियम 1991 को एडवोकेट अश्वनी उपाध्याय द्वारा सुप्रीम कोर्ट में चैलेंज किया गया है। उनकी याचिका स्वीकार कर ली गई है, जिस पर सुनवाई होनी शेष है।
वहीं, इस अधिनियम के तहत भी यह अधिनियम उन मामलों में लागू नहीं होता जिनका केस 1947 से पूर्व चल चुका है। श्रीकृष्ण जन्मस्थान भी उन केसों में से एक है। इसका विवाद भी 1947 से पूर्व अदालत में चल चुका है। अदालत ने अगली सुनवाई की एक अप्रैल की तारीख तय की है।
केस की सुनवाई 7 अप्रैल को
सुप्रीम कोर्ट की अधिवक्ता रंजना अग्निहोत्री द्वारा जमीन को लेकर किए गए दावे की रिवीजन में रूप में जिला जज की अदालत ने सोमवार को सात अप्रैल की तारीख तय की है। बता दें कि यह दावा अभी तक अदालत में दर्ज नहीं हो सका है।
जिला जज की अदालत में इस केस को रिवीजन के रूप में सुना जा रहा था। जिला शासकीय अधिवक्ता (डीजीसी) शिवराम तरकर ने बताया कि अदालत में नोवर्क होने के कारण अदालत ने 07 अप्रैल की सुनवाई की तारीख तय की है।
महेंद्र प्रताप सिंह ने शाही मस्जिद के सचिव व यूपी सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड चेयरमैन पर आरोप लगाया गया था कि वह मस्जिद में लगे उन पत्थरों को हटाने का प्रयास कर रहे हैं जो कि मंदिर तोड़कर मस्जिद बनाते समय लगाए थे। इसे लेकर उनके द्वारा अदालत में अमीन कमीशन की रिपोर्ट, स्टे, रिसीवर आदि की मांग की गई थी।
समिति के अध्यक्ष ने कहा कि पूजा स्थल अधिनियम 1991 को एडवोकेट अश्वनी उपाध्याय द्वारा सुप्रीम कोर्ट में चैलेंज किया गया है। उनकी याचिका स्वीकार कर ली गई है, जिस पर सुनवाई होनी शेष है।
वहीं, इस अधिनियम के तहत भी यह अधिनियम उन मामलों में लागू नहीं होता जिनका केस 1947 से पूर्व चल चुका है। श्रीकृष्ण जन्मस्थान भी उन केसों में से एक है। इसका विवाद भी 1947 से पूर्व अदालत में चल चुका है। अदालत ने अगली सुनवाई की एक अप्रैल की तारीख तय की है।
केस की सुनवाई 7 अप्रैल को
सुप्रीम कोर्ट की अधिवक्ता रंजना अग्निहोत्री द्वारा जमीन को लेकर किए गए दावे की रिवीजन में रूप में जिला जज की अदालत ने सोमवार को सात अप्रैल की तारीख तय की है। बता दें कि यह दावा अभी तक अदालत में दर्ज नहीं हो सका है।
जिला जज की अदालत में इस केस को रिवीजन के रूप में सुना जा रहा था। जिला शासकीय अधिवक्ता (डीजीसी) शिवराम तरकर ने बताया कि अदालत में नोवर्क होने के कारण अदालत ने 07 अप्रैल की सुनवाई की तारीख तय की है।