फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Agra News ›   Margashirsha mela importance of Panchkosi Parikrama of Shukarkshetra on Mokshada Ekadashi know what Mahamandel

मेला मार्गशीर्ष: मोक्षदा एकादशी पर पंचकोसी परिक्रमा लगाने का महत्व, जानें क्या कहते हैं महामंडेलश्वर

Tue, 19 Dec 2023 09:59 PM IST
धीरेन्द्र सिंह संवाद न्यूज एजेंसी, कासगंज
संवाद न्यूज एजेंसी, कासगंज Published by: धीरेन्द्र सिंह Updated Tue, 19 Dec 2023 09:59 PM IST
सार

मोक्षदा एकादशी पर शूकरक्षेत्र की पंचकोसी परिक्रमा लगाना का विशेष महत्व है। इस परिक्रमा  के लिए देश भर से संत महामंडलेश्वर शिष्यों व अनुयायियों के साथ लगातार तीर्थनगरी में पहुंच रहे हैं।  
 

विज्ञापन
Margashirsha mela importance of Panchkosi Parikrama of Shukarkshetra on Mokshada Ekadashi know what Mahamandel
मेला मार्गशीर्ष की तैयारियां - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो

विस्तार

कासगंज के सोरोंजी में मोक्षदा एकादशी को शूकरक्षेत्र की पंचकोसी परिक्रमा लगाने के लिए देश भर से संत महामंडलेश्वर शिष्यों व अनुयायियों के साथ लगातार तीर्थनगरी में पहुंच रहे हैं। सोशल मीडिया के माध्यम से देश के प्रख्यात कथावाचक लोगों को शूकरक्षेत्र की पंचकोसी परिक्रमा का महत्व बताकर उसमें भाग लेने का आव्हान कर रहे हैं। 23 दिसंबर को मोक्षदा एकादशी पर लगने वाली इस पंचकोसी परिक्रमा के लिए हिंदूवादी संगठन आरएसएस, विहिप धर्म प्रसार शाखा पूरे बृज प्रांत में जनसंपर्क कर अधिक से अधिक धर्मप्रेमियों को शूकरक्षेत्र की पंचकोसी परिक्रमा लगाने के लिए प्रेरित कर रहे हैं।
विज्ञापन


मथुरा से आए महामंडलेश्वर स्वामी प्रकाशानंद जी महाराज ने बताया कि शूकरक्षेत्र में भगवान वराह ने पृथ्वी को हिरण्याक्ष से मुक्त कराकर भार मुक्त व पाप मुक्त किया तथा गंगा प्रकट कर गंगा में निर्वाण को प्राप्त किया। इससे पूर्व पृथ्वी ने भगवान वराह की परिक्रमा की थी। यह पुरातन परंपरा आज तक चली आ रही है। मैं इस तुलसी वराह की पवित्र भूमि पर मोक्षदा एकादशी को अपने हजारों शिष्यों अनुयायियों के साथ शूकर क्षेत्र की पंचकोसी परिक्रमा लगाने आया हूं।
विज्ञापन


वृंदावन के भागवताचार्य आचार्य रामविलास चतुर्वेदी ने बताया कि श्रीमद्भागवत के तृतीय स्कंध के 13वें अध्याय में भगवान वराह का वर्णन है। भगवान वराह ने पृथ्वी को जिस स्थान पर स्थापित किया वही शूकरक्षेत्र है। यहां पर सभी देवताओं ने भगवान वराह की स्तुति कर परिक्रमा करते हुए उन पर पुष्प वर्षा की थी। शूकरक्षेत्र की पंचकोसी परिक्रमा सभी व्याधियों से मुक्ति दिलाती है तथा प्राणी सुखानुभूति करते हुए परमधाम को प्राप्त हो जाता है।
विज्ञापन
विज्ञापन


वृंदावन के आचार्य ज्ञानेश गौड ने बताया कि श्री हरिविष्णु ने ब्रह्माजी की नासिका से उत्पन्न होकर वराह रूप धारण किया था तथा हिरण्याक्ष का वध कर भूदेवी को स्थापित किया। भगवान वराह ने भू देवी को सृष्टि संचालन का उपदेश दिया। ऐसी पवित्र तीर्थनगरी में मोक्षदा एकादशी को पंचकोसी परिक्रमा करने वाले का प्रभु कल्याण करते हैं।


श्रीधाम वृंदावन के स्वामी सत्यमित्रानंद महाराज ने बताया कि जिन लोगों को बार बार असफलता मिलती हैं वह भगवान वराह के धाम जाकर शूकर क्षेत्र की पंचकोसी परिक्रमा अवश्य करें। जब भूदेवी को भगवान वराह ने संकट से उबारकर पुन: स्थापित किया तब देवताओं ने पंचकोसी परिक्रमा मार्ग पर खड़े होकर भगवान वराह पर पुष्प वर्षा कर स्तुति की। ऐसी पावन पंचकोसी परिक्रमा मार्ग की परिक्रमा करने से असम्भव कार्य संभव होते हैं। 
 
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed