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मेला मार्गशीर्ष: कोरोना संक्रमण ने तोड़ी परंपरा, ब्रिटिशकाल से लगता है मेला

Fri, 25 Dec 2020 12:16 AM IST
Abhishek Saxena न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कासगंज
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कासगंज Published by: Abhishek Saxena Updated Fri, 25 Dec 2020 12:16 AM IST
सार

  • दशकों पुरानी टूटती परंपराओं से आहत हैं पुरोहित, 
  • कोरोना के कारण इस बार आयोजन पर लगी रोक
  • मेले को प्रांतीय मेले का दर्जा मिलने से उत्साहित थे पुरोहित

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Margashirsha Mela 2020: Corona Infection Broke Tradition
मेला (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

प्रसिद्ध तीर्थनगरी सोरों में 152 साल पुराने मेले के आयोजन की परंपरा इस बार टूटने से पुरोहितों की भावनाएं आहत हैं। जहां एक ओर मेले को प्रांतीय मेले का दर्जा मिलने से वह खुश थे और उन्हें पहले साल काफी उम्मीदें थीं, वहीं अब वे मायूस हैं। कोरोना संक्रमण के चलते प्रशासन से अनुमति न मिलने के कारण पालिका और पुरोहितों की तैयारियां धरी रह गईं। 
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तीर्थनगरी सोरों में वर्ष 1868 ब्रिटिशकाल से मेला मार्गशीर्ष का आयोजन होता आ रहा है, लेकिन इस बार कोरोना संक्रमण ने 152 साल पुरानी इस परंपरा को तोड़ दिया। इस मेले को लेकर तीर्थपुरोहितों और लोगों में उत्सुकता दिखाई देती थी, लेकिन इस बार मेले का आयोजन न होने से मेला ग्राउंड सूना पड़ा है।
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- मेरी उम्र 85 साल की है। जब से होश संभाला है तब से मेले का आयोजन देखते आ रहे हैं। हमें अभी तक ध्यान है जब हम छोटे थे तो हमारे परिवार के लोग बैलगाड़ियों से मेले में जाते थे और फिर वहां सात-सात दिन तक डेरा जमा लेते थे। वहीं रहकर दिन-रात मेले का लुत्फ उठाते थे। - हरीश चंद्र सिंह, लुहर्रा।

- मेले के वो पल हमें अभी तक याद हैं कि जब गांव में एक दिन पहले ही बुजुर्ग बुलावा लगवा देते थे। आवाज लगती थी चलो बालकों मेला में। कुछ ही लोगों पर बैलगाड़ियां होती थीं। सुबह ही बैलगाड़ियां सज जाती थीं। मेले में जाने के लिए पकवान भी बनते थे। अभी भी मेले का क्रेज कुछ कम नहीं है। - राधेश्याम, नगला दौली।

खाली है ग्राउंड न सर्कस, न साउंड
मार्गशीर्ष एकादशी से पहले हर साल जो मेला ग्राउंड पूरी तरह सज जाता था। साउंड का शोर शराबा सुनाई देता था, वहां अब पूरी तरह सन्नाटा छाया हुआ है। यहां मार्गशीर्ष मेले के मुख्य आकर्षण सर्कस, सिनेमा, मौत का कुआं, मैजिक शो, वैरायटी शो, थिएटर, ऊंचे झूले, अप्पू घर आदि खेल तमाशों के अलावा हर प्रकार के सामान की दुकानें सजती थीं। विभिन्न सरकारी विभागों की प्रदर्शनी व सम्मेलनों का आयोजन होता था, लेकिन इस बार रौनक गायब है।

निजी जगहों पर सजी दुकानें
मेला ग्राउंड में जगह किराए पर नहीं उठाई गई हैं, लेकिन उम्मीदें लेकर कुछ दुकानदार यहां आ गए हैं। कंबल, गर्म कपड़े, खिलौने, बक्से, ढोलक, खाजला आदि की दुकानें निजी जगहों पर सजी हुई हैं।
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