{"_id":"58e13c7d4f1c1bc06e5b438c","slug":"many-relatives-of-yadav-singh-underground","type":"story","status":"publish","title_hn":"यादव सिंह के कई रिश्तेदार भूमिगत","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
यादव सिंह के कई रिश्तेदार भूमिगत
अमर उजाला ब्यूरो आगरा
Updated Sun, 02 Apr 2017 11:31 PM IST
विज्ञापन
yadav singh
- फोटो : अमर उजाला
ग्रेटर नोएडा व यमुना एक्सप्रेसवे प्राधिकरण के पूर्व चीफ इंजीनियर यादव सिंह के ठिकानों पर शनिवार को हुई ताबड़तोड़ छापामारी से पहले ही उसके कई रिश्तेदार भूमिगत हो गए हैं। ये आगरा और फिरोजाबाद के रहने वाले हैं। माना जा रहा है कि पूछताछ के डर से ये लोग घर से दूर निकल गए हैं। इन्होंने अपने मोबाइल फोन भी स्विच आफ कर लिए हैं। इनमें से दो यादव सिंह की फर्जी कंपनियों में भी साझीदार बताए गए हैं। यादव सिंह की फरार चल रही पत्नी कुसुम लता का मायका फिरोजाबाद में है। सीबीआई उसके बारे में भी पूछताछ कर सकती है।
यादव सिंह की कोठी आगरा के देवरी रोड पर है। यह हरी कोठी नाम से चर्चित है। सीबीआई यहां कई बार आ चुकी है। इसकेपास ही उसके कई रिश्तेदार रहते हैं। ये लोग पिछले कई दिनों से भूमिगत बताए जा रहे हैं। पुलिस सूत्रों का कहना है कि सीबीआई की टीम जब पिछली बार आई थी, तब उसकी कोठी पर नजर रखने के लिए कह गई थी।
लेकिन तब से वहां कोई आया नहीं है। पड़ोस में रहने वाले कई रिश्तेदार भी घर पर नहीं है। सीबीआई इनके मोबाइल नंबर ले गई थी। ये भी स्विच आफ बताए जा रहे हैं। उधर यह भी जानकारी आ रही है कि यादव सिंह ने जिन फर्जी कंपनियों में करोड़ों रुपये लगाए थे, उनमें उसके रिश्तेदार और दोस्त भी साझीदार हैं। इस बिन्दू पर भी जांच पड़ताल की जा रही है।
विज्ञापन
यादव सिंह की चिट्ठी पर लग जाती थी नौकरी
आगरा।
यादव सिंह के पड़ोसी बताते हैं कि जब वह नोएडा में चीफ इंजीनियर था, तब उसकी सरकार में ही नहीं, प्राइवेट कंपनियों में भी बहुत चलती थी। उससे नौकरी मांगने के लिए आगरा से भी सैंकड़ों लोग गए। इनमें से कई को उसने सिफारिश की चिट्ठी दे दी। इसी से प्राइवेट कंपनी में उनकी नौकरी लग गई। उसने आगरा के कई लोगों को सरकारी ठेके भी दिलवाए।
विज्ञापन
यादव सिंह की कोठी आगरा के देवरी रोड पर है। यह हरी कोठी नाम से चर्चित है। सीबीआई यहां कई बार आ चुकी है। इसकेपास ही उसके कई रिश्तेदार रहते हैं। ये लोग पिछले कई दिनों से भूमिगत बताए जा रहे हैं। पुलिस सूत्रों का कहना है कि सीबीआई की टीम जब पिछली बार आई थी, तब उसकी कोठी पर नजर रखने के लिए कह गई थी।
विज्ञापन
लेकिन तब से वहां कोई आया नहीं है। पड़ोस में रहने वाले कई रिश्तेदार भी घर पर नहीं है। सीबीआई इनके मोबाइल नंबर ले गई थी। ये भी स्विच आफ बताए जा रहे हैं। उधर यह भी जानकारी आ रही है कि यादव सिंह ने जिन फर्जी कंपनियों में करोड़ों रुपये लगाए थे, उनमें उसके रिश्तेदार और दोस्त भी साझीदार हैं। इस बिन्दू पर भी जांच पड़ताल की जा रही है।
विज्ञापन
यादव सिंह की चिट्ठी पर लग जाती थी नौकरी
आगरा।
यादव सिंह के पड़ोसी बताते हैं कि जब वह नोएडा में चीफ इंजीनियर था, तब उसकी सरकार में ही नहीं, प्राइवेट कंपनियों में भी बहुत चलती थी। उससे नौकरी मांगने के लिए आगरा से भी सैंकड़ों लोग गए। इनमें से कई को उसने सिफारिश की चिट्ठी दे दी। इसी से प्राइवेट कंपनी में उनकी नौकरी लग गई। उसने आगरा के कई लोगों को सरकारी ठेके भी दिलवाए।