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ताजनगरी को न सिविल एन्क्लेव मिला और न ही हेलीपोर्ट, अधर में अटकी हैं कई योजनाएं
Sat, 01 Jun 2019 10:37 AM IST
मुकेश कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
Published by: मुकेश कुमार
Updated Sat, 01 Jun 2019 10:37 AM IST
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ताजमहल
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आगरावासियों का इंतजार खत्म नहीं हो पा रहा है। सरकारों के दावों और वादों के बाद भी उन्हें अब तक न सिविल एन्क्लेव मिल पाया है और न ही हेलीपोर्ट। यमुना पर बैराज को लेकर अब तक स्थिति स्पष्ट नहीं हो सकी है। चुनाव से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शहर को गंगाजल की सौगात तो दे दी लेकिन यह नालों में बह रहा है। घरों तक पहुंचाने की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है।
स्मार्ट सिटी के काम कछुआ गति से चल रहे हैं। पिछले ढाई साल से इनर रिंग रोड के दूसरे चरण का काम काफी धीमी गति से चल रहा है। इसकी वजह से धूल के गुबार वातावरण के लिए परेशानी खड़ी कर रहे हैं। मुख्य सचिव डॉ. अनूप चंद्र पांडेय आज शहर में हैं। ऐसे में शहरवासियों को उनसे उम्मीद है कि इन रुकी योजनाओं के आड़े आ रही दिक्कतों को दूर कर, इन्हें अंजाम तक पहुंचाएं।
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324 करोड़ रुपये की लागत से सिविल एन्क्लेव विकसित करने के लिए टेंडर की प्रक्रिया भी शुरू की गई। मगर, पर्यावरण से संबंधित अनापत्ति प्रमाणपत्र न मिलने की वजह से काम शुरू नहीं हो सका है। सिविल एन्क्लेव के अभाव में आगरा का पर्यटन उद्योग उड़ान नहीं भर पा रहा है।
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स्मार्ट सिटी के काम कछुआ गति से चल रहे हैं। पिछले ढाई साल से इनर रिंग रोड के दूसरे चरण का काम काफी धीमी गति से चल रहा है। इसकी वजह से धूल के गुबार वातावरण के लिए परेशानी खड़ी कर रहे हैं। मुख्य सचिव डॉ. अनूप चंद्र पांडेय आज शहर में हैं। ऐसे में शहरवासियों को उनसे उम्मीद है कि इन रुकी योजनाओं के आड़े आ रही दिक्कतों को दूर कर, इन्हें अंजाम तक पहुंचाएं।
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सिविल एन्क्लेव
खेरिया हवाई अड्डे के पास ही सिविल एन्क्लेव विकसित करने की योजना है। इसके लिए सदर तहसील के अंतर्गत धनौली, अभयपुरा में जमीन का अधिग्रहण किया गया है। पिछले साल की शुरुआत में इसकी चारदीवारी का काम भी शुरू हुआ।
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324 करोड़ रुपये की लागत से सिविल एन्क्लेव विकसित करने के लिए टेंडर की प्रक्रिया भी शुरू की गई। मगर, पर्यावरण से संबंधित अनापत्ति प्रमाणपत्र न मिलने की वजह से काम शुरू नहीं हो सका है। सिविल एन्क्लेव के अभाव में आगरा का पर्यटन उद्योग उड़ान नहीं भर पा रहा है।
यमुना नदी
- फोटो : अमर उजाला
हेलीपोर्ट
आगरा में पर्यटन को बढ़ाने के लिए प्रदेश सरकार ने हेलीकॉप्टर सेवा शुरू करने की घोषणा की थी। पर्यटकों को हेलीकॉप्टर से आगरा भ्रमण की योजना है। इसके लिए आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे के पास उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण की जमीन भी चिह्नित कर ली गई है।लोकसभा चुनाव से पहले इस योजना को लेकर काफी कवायद हुई थी। मगर यह योजना भी अधर में लटकी है। अब तक इस पर काम शुरू नहीं हो सका है। इससे पर्यटन को प्रोत्साहन नहीं मिल पा रहा है।
यमुना पर बैराज
यमुना नदी पर बैराज के मुद्दे पर सरकार असमंजस में है। प्रधानमंत्री से लेकर मुख्यमंत्री तक कई बार आगरा में बैराज को लेकर दावे कर चुके हैं लेकिन योजना की रूपरेखा अब तक तय नहीं है। सीएम योगी के निर्देश पर पहले ताजमहल से डेढ़ किमी आगे नगला पैमा में बैराज का प्रस्ताव पास किया गया।इसकी डीपीआर भी तैयार हो गई। बाद में इसमें परिवर्तन करते हुए यहां रबर डैम बनाने की योजना को हरी झंडी दी गई। अब फिर से बैराज बनाने का दावा किया जा रहा है। बैराज के अभाव में यमुना नाले का रूप लेती जा रही है।
सिकंदरा स्थित वाटर वक्स में गंगाजल
- फोटो : अमर उजाला
गंगाजल वितरण
सालों के इंतजार के बाद आगरा में गंगाजल तो पहुंच गया लेकिन अभी भी ये तमाम घरों तक नहीं पहुंच पा रहा। दरअसल, शहर में जलापूर्ति के लिए डाली गईं पानी की अधिकांश पाइप लाइन या तो खराब हैं या फिर चोक हैं। प्रेशर छोड़ने पर फट जाती हैं। कई क्षेत्रों में अब तक पानी की पाइप लाइन ही नहीं हैं। ऐसे में अधिकांश गंगाजल घरों तक पहुंचने की बजाय नालों में बह रहा है।इनर रिंग रोड का दूसरा चरण
एनएच दो स्थित कुबेरपुर से फतेहाबाद रोड, शमसाबाद रोड, ग्वालियर रोड होते हुए दिल्ली रोड स्थित रैपुरा जाट तक इनर रिंग रोड विकसित करने की योजना है। ताकि भारी वाहन शहर के अंदर प्रवेश न करें।इनर रिंग रोड के पहले चरण के अंतर्गत कुबेरपुर से फतेहाबाद रोड तक का काम पूरा हो चुका है। ग्वालियर रोड से रैपुरा जाट तक दक्षिणी बाईपास बना दिया गया है। लेकिन फतेहाबाद रोड से ग्वालियर रोड के बीच दूसरे चरण के तहत बनने वाली इनर रिंग रोड अब तक अधर में है।