{"_id":"5f68e6d38ebc3ef47d7e1d51","slug":"mandi-mainpuri-news-agr4602963104","type":"story","status":"publish","title_hn":"मंडी में रही हड़ताल, मायूस लौटे फसल बेचने आए किसान","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मंडी में रही हड़ताल, मायूस लौटे फसल बेचने आए किसान
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मैनपुरी। आगरा रोड स्थित नवीन मंडी में हड़ताल के चलते फसल बेचने पहुंचे किसानों को मायूस होकर लौटना पड़ा। मंडी शुल्क के विरोध में आढ़ती हड़ताल पर हैं।
नवीन मंडी के गेट पर सोमवार को सुबह 11 बजे के करीब औंछा के गांव नगला मोती से किसान राजकिशोर एक ट्राली गेहूं लेकर बिक्री के लिए पहुंचे। गेट पर मौजूद कर्मचारियों ने उन्हें रोक दिया। उन्होंने जब बताया कि मंडी में हड़ताल है तो वे परेशान हो गए। आगामी छह दिनों तक खरीद न होने की जानकारी पर वे मायूस ही वापस लौट गए। उन्होंने बताया कि मंडी बंद होने से जहां 700 रुपये का डीजल बेकार गया तो वहीं समय भी बरबाद हुआ।
कई अन्य किसानों का हाल भी ऐसा ही रहा। दिन भर मंडी आने वाले किसान लौटाए जाते रहे। आढ़तियों ने 21 सितंबर से लेकर 26 सितंबर तक हड़ताल की घोषणा की है। वह मंडी के बाहर व्यापारी करने वाले आढ़तियों से कर न लिए जाने के आदेश का विरोध कर रहा हैं। फूडग्रेन कमीशन एजेंट एसोसिएशन के अध्यक्ष उपदेश यादव का कहना है कि सरकार को इस नियम को वापस लेना होगा या फिर मंडी में भी कर मुक्त करना होगा।
रोजाना पहुंचते हैं सैकड़ों किसान
नवीन मंडी में जिलेभर से रोजाना सैकड़ों किसान अपनी फसल की बिक्री करने के लिए पहुंचते हैं। नवीन मंडी में 500 से अधिक आढ़ती हैं। इनके यहां रोजाना दो 1000 मीट्रिक टन के करीब गेहूं की बिक्री होती है।
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मंडी के बाहर होने लगी खरीद
नए आदेश के तहत सरकार ने मंडी के बाहर फसलों की खरीद करने वाले व्यापारियों को कर से मुक्त कर दिया है। इसका असर सोमवार को नजर आया। मंडी के बाहर धीरे-धीरे कांटे लगने लगे हैं। हड़ताल के पहले दिन एक-दो किसानों के ही अनाज को इन व्यापारियों ने खरीदा।
जब मंडी के बाहर व्यापार करने पर कर नहीं लगेगा तो हम पर कर क्यों लगाया जा रहा है। ऐसे तो मंडी के आढ़तियों को नुकसान होगा। किसानों को भी आगे इसके परिणाम भुगतने होंगे।
मुकेश कुमार, आढ़ती।
नवीन मंडी में खुली बोली में किसान की फसल बिकती है। बाहर व्यापारी मनमाने दामों पर फसल खरीदेंगे। इससे किसानों को तो नुकसान होगा ही साथ ही सरकारी खजाने को भी घाटा होगा।
रघुनंदन सिंह, आढ़ती।
हम तो अपनी फसल की बिक्री करने के लिए आए थे, लेकिन हड़ताल के चलते हमें लौटना पड़ रहा है। पहले ही गेहूं सस्ता है वहीं अब दोबारा आने से भाड़े का खर्च भी दोगुना हो जाएगा।
राजकिशोर, किसान नगला मोती।
सरकार ने अगर आदेश दिया है तो उसका पालन भी सुनिश्चित कराया जाना चाहिए। अब आदेश के बाद मंडी बंद हो गई है, ऐसे में परेशानी तो किसानों को उठानी पड़ रही है। आखिर वे करें तो क्या करें।
आसाराम, किसान झंडेहार।
आढ़तियों ने मुख्यमंत्री को भेजा ज्ञापन
मैनपुरी। हड़ताल के पहले दिन सोमवार को फूडग्रेन कमीशन एजेंट एसोसिएशन ने मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन सचिव मंडी समिति नवीन कोहली को सौंपा। एसोसिएशन के अध्यक्ष उपदेश यादव ने मुख्यमंत्री से मंडी शुल्क को लेकर लागू की गई दोहरी व्यवस्था को खत्म कराने की मांग की। उन्होंने कहा कि अगर ये आदेश न बदला गया तो प्रदेश में हजारों पल्लेदार, व्यापारी और मंडी से जुड़े कामगार बेरोजगार हो जाएंगे। इस दौरान आढ़ती लक्ष्मीनारायन गुप्ता, अनुपम कुशवाह, बीनू बंसल, दिनेश कुमार आदि मौजूद रहे।
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नवीन मंडी के गेट पर सोमवार को सुबह 11 बजे के करीब औंछा के गांव नगला मोती से किसान राजकिशोर एक ट्राली गेहूं लेकर बिक्री के लिए पहुंचे। गेट पर मौजूद कर्मचारियों ने उन्हें रोक दिया। उन्होंने जब बताया कि मंडी में हड़ताल है तो वे परेशान हो गए। आगामी छह दिनों तक खरीद न होने की जानकारी पर वे मायूस ही वापस लौट गए। उन्होंने बताया कि मंडी बंद होने से जहां 700 रुपये का डीजल बेकार गया तो वहीं समय भी बरबाद हुआ।
कई अन्य किसानों का हाल भी ऐसा ही रहा। दिन भर मंडी आने वाले किसान लौटाए जाते रहे। आढ़तियों ने 21 सितंबर से लेकर 26 सितंबर तक हड़ताल की घोषणा की है। वह मंडी के बाहर व्यापारी करने वाले आढ़तियों से कर न लिए जाने के आदेश का विरोध कर रहा हैं। फूडग्रेन कमीशन एजेंट एसोसिएशन के अध्यक्ष उपदेश यादव का कहना है कि सरकार को इस नियम को वापस लेना होगा या फिर मंडी में भी कर मुक्त करना होगा।
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रोजाना पहुंचते हैं सैकड़ों किसान
नवीन मंडी में जिलेभर से रोजाना सैकड़ों किसान अपनी फसल की बिक्री करने के लिए पहुंचते हैं। नवीन मंडी में 500 से अधिक आढ़ती हैं। इनके यहां रोजाना दो 1000 मीट्रिक टन के करीब गेहूं की बिक्री होती है।
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मंडी के बाहर होने लगी खरीद
नए आदेश के तहत सरकार ने मंडी के बाहर फसलों की खरीद करने वाले व्यापारियों को कर से मुक्त कर दिया है। इसका असर सोमवार को नजर आया। मंडी के बाहर धीरे-धीरे कांटे लगने लगे हैं। हड़ताल के पहले दिन एक-दो किसानों के ही अनाज को इन व्यापारियों ने खरीदा।
जब मंडी के बाहर व्यापार करने पर कर नहीं लगेगा तो हम पर कर क्यों लगाया जा रहा है। ऐसे तो मंडी के आढ़तियों को नुकसान होगा। किसानों को भी आगे इसके परिणाम भुगतने होंगे।
मुकेश कुमार, आढ़ती।
नवीन मंडी में खुली बोली में किसान की फसल बिकती है। बाहर व्यापारी मनमाने दामों पर फसल खरीदेंगे। इससे किसानों को तो नुकसान होगा ही साथ ही सरकारी खजाने को भी घाटा होगा।
रघुनंदन सिंह, आढ़ती।
हम तो अपनी फसल की बिक्री करने के लिए आए थे, लेकिन हड़ताल के चलते हमें लौटना पड़ रहा है। पहले ही गेहूं सस्ता है वहीं अब दोबारा आने से भाड़े का खर्च भी दोगुना हो जाएगा।
राजकिशोर, किसान नगला मोती।
सरकार ने अगर आदेश दिया है तो उसका पालन भी सुनिश्चित कराया जाना चाहिए। अब आदेश के बाद मंडी बंद हो गई है, ऐसे में परेशानी तो किसानों को उठानी पड़ रही है। आखिर वे करें तो क्या करें।
आसाराम, किसान झंडेहार।
आढ़तियों ने मुख्यमंत्री को भेजा ज्ञापन
मैनपुरी। हड़ताल के पहले दिन सोमवार को फूडग्रेन कमीशन एजेंट एसोसिएशन ने मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन सचिव मंडी समिति नवीन कोहली को सौंपा। एसोसिएशन के अध्यक्ष उपदेश यादव ने मुख्यमंत्री से मंडी शुल्क को लेकर लागू की गई दोहरी व्यवस्था को खत्म कराने की मांग की। उन्होंने कहा कि अगर ये आदेश न बदला गया तो प्रदेश में हजारों पल्लेदार, व्यापारी और मंडी से जुड़े कामगार बेरोजगार हो जाएंगे। इस दौरान आढ़ती लक्ष्मीनारायन गुप्ता, अनुपम कुशवाह, बीनू बंसल, दिनेश कुमार आदि मौजूद रहे।