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तुलसी के रचे मानस ने हिंदी को विश्व पटल तक पहुंचाया

Mon, 13 Sep 2021 11:41 PM IST
Agra Bureau आगरा ब्यूरो
Updated Mon, 13 Sep 2021 11:41 PM IST
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Manas created by Tulsi brought Hindi to the world stage
डॉ. राधाकृष्ण दीक्षित। - फोटो : KASGANJ
सोरों(कासगंज)। महाकवि संत तुलसीदास ने न केवल सोरों सूकरक्षेत्र की धरा पर जन्म लिया। यहीं अपने गुरु नरहरिदास से शिक्षा ली और रामचरित मानस जैसे ग्रंथ की रचना की। इस ग्रंथ के माध्यम से संत तुलसीदास का मानस घर घर में पहुंचा। तुलसी के मानस ने हिंदी को प्राचीन समय में लोगों के बीच लोकप्रिय बनाया।
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रामचरित मानस के माध्यम से जन जन की जुबान तक हिंदी पहुंची है। देश में और विदेश में तुलसी मानस का पाठ भगवान राम की स्तुति के लिए किया जाता है। कहीं अखंड रामायण का पाठ होता है तो कहीं रामचरित मानस के सुंदरकांड व अन्य प्रसंगों का। रामचरित मानस के माध्यम से तमाम संत प्रवचन करते हैं। रामचरित मानस के अलावा संत तुलसीदास ने विनय पत्रिका, दोहावली, कवितावली, हनुमान चालीसा, वैराग्य संजीवनी, जानकी मंगल, पार्वती मंगल भी लिखे। न जाने कितने विद्वानों ने मानस पर शोध करके अपने ज्ञान को बढ़ाया है। हिंदी की धारा को प्रवाहित करने में उनका योगदान हमेशा लोगों की जुबान पर रहता है।
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क्या बोले साहित्यकार
- महाकवि संत तुलसीदास ने पवित्र ग्रंथ रामचरित मानस की रचना करके बेहद सरलता के साथ लोगों को भक्ति ज्ञान का मार्ग प्रशस्त किया। हिंदी की भाषा अवधी ओर बृज में रामचरित मानस की रचना की गई। इस ग्रंथ को घर घर में स्थान मिला और लोग इसका हिंदी भाषा में ही गायन करते हैं- उमेश पाठक, साहित्यकार।
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- रामचरित मानस जैसी रचना संत तुलसीदास ने की है, ऐसी रचना हिंदी साहित्य में आज तक नहीं हुई। मानस को पढने के बाद लोग मोक्ष प्राप्त करने का विश्वास करते हैं। हिंदी के लिए महाकवि संत तुलसीदास अभूतपूर्व योगदान है। हिंदी को लोकप्रिय बनाने में बड़ी भूमिका है- डा. राधाकृष्ण दीक्षित, साहित्यकार।

 उमेश पाठक।

उमेश पाठक।- फोटो : KASGANJ

कासगंज के सोरों में स्थापित महाकवि तुलसीदास की प्रतिमा

कासगंज के सोरों में स्थापित महाकवि तुलसीदास की प्रतिमा- फोटो : KASGANJ

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