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मकर संक्रांति 2019: स्नान और दान से पाएंगे पुण्य लाभ, जानें पूजन के शुभ मुहूर्त
Sun, 13 Jan 2019 05:31 PM IST
kapil kumar
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
Published by: kapil kumar
Updated Sun, 13 Jan 2019 05:31 PM IST
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मकर संक्रांति 2019
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मकर संक्रांति पर गंगा स्नान, दान और हरि गुणगान का विशेष महत्व होता है। इस बार इस पर्व को लेकर भ्रम की स्थिति बनी हुई है। विद्वानों का कहना है कि 14 जनवरी की शाम 7:53 बजे सूर्यदेव मकर राशि में प्रवेश करेंगे।
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चूंकि, हिंदू सनातन संस्कृति में उदया तिथि में त्योहारों को ही मनाने की परंपरा रही है। ऐसे में 15 जनवरी को उदया तिथि में स्नान, दान और प्रभु का गुणगान लाभकारी रहेगा। इस दिन सूर्योदय से सूर्यास्त तक मकर संक्रांति रहेगी। हालांकि मकर संक्रांति का पर्व 14 और 15 जनवरी की दोनों ही तिथियों में मान्य बताया जा रहा है।
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पंडित केए दुबे पद्मेश का कहना है कि 14 जनवरी की शाम 7:53 बजे सूर्य मकर राशि में प्रवेश करेंगे। इसी के साथ खरमास खत्म हो जाएंगे और मांगलिक कार्यक्रमों की शुरूआत हो जाएगी।
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दो दिन मनाई जाएगी मकर संक्रांति
Makar Sankranti
आचार्य हरिगोपाल शर्मा के मुताबिक उदया तिथि के अनुसार 15 जनवरी को मकर संक्रांति का पर्व मनाया जाएगा। उन्होंने बताया कि जब सूर्य मकर राशि में प्रवेश करता है तो उत्तरायण हो जाते हैं। इसी के साथ ही शिशिर ऋतु शुरू हो जाती है।
पंडित सत्यनारायण मुद्गल का कहना है कि सूर्य के मकर राशि में प्रवेश करते ही मकर संक्रांति शुरू हो जाती है। कुंभ में शाही स्नान 14 जनवरी को है। इस लिहाज से मकर संक्रांति 14 व 15 जनवरी को मनाई जाएगी।
दान और स्नान का महत्व
मकर संक्रांति के दिन गंगा स्नान या अन्य पवित्र नदियों में स्नान का विशेष महत्व है। इस दिन दान करना अति पुण्यदायक माना जाता है। मकर संक्रांति पर काली उड़द, काले तिल, चावल के अलावा सामर्थ्य के अनुसार ऊनी वस्त्र, कंबल, खिचड़ी का दान शुभ दायक होता है।
यदि कोई व्यक्ति इनकी व्यवस्था नहीं कर सकता है तो किसी एक व्यक्ति को भोजन करा दे। घरों में विशेष पकवान बनाने का भी रिवाज है। इस दिन दाल के मंगोड़े, खिचड़ी खाई जाती है। मकर संक्रांति पर्व के मद्देनजर बाजारों में तिल और तिल से बने खाद्य पदार्थों की महक आ रही है। तिल की गजक, मूंगफली, गुड़ से बनी गजक, कंबल आदि की भरमार है।
पंडित सत्यनारायण मुद्गल का कहना है कि सूर्य के मकर राशि में प्रवेश करते ही मकर संक्रांति शुरू हो जाती है। कुंभ में शाही स्नान 14 जनवरी को है। इस लिहाज से मकर संक्रांति 14 व 15 जनवरी को मनाई जाएगी।
दान और स्नान का महत्व
मकर संक्रांति के दिन गंगा स्नान या अन्य पवित्र नदियों में स्नान का विशेष महत्व है। इस दिन दान करना अति पुण्यदायक माना जाता है। मकर संक्रांति पर काली उड़द, काले तिल, चावल के अलावा सामर्थ्य के अनुसार ऊनी वस्त्र, कंबल, खिचड़ी का दान शुभ दायक होता है।
यदि कोई व्यक्ति इनकी व्यवस्था नहीं कर सकता है तो किसी एक व्यक्ति को भोजन करा दे। घरों में विशेष पकवान बनाने का भी रिवाज है। इस दिन दाल के मंगोड़े, खिचड़ी खाई जाती है। मकर संक्रांति पर्व के मद्देनजर बाजारों में तिल और तिल से बने खाद्य पदार्थों की महक आ रही है। तिल की गजक, मूंगफली, गुड़ से बनी गजक, कंबल आदि की भरमार है।
आ गई रंग बिरंगी पतंगें
पतंग बाजार
- फोटो : अमर उजाला
मकर संक्रांति पर पतंग उड़ाने की भी परंपरा है। हालांकि आगरा में पतंगबाजी अभी फीकी पड़ने लगी है लेकिन पर्व की परंपरा का निर्वहन अवश्य होता है। इसके लिए बाजार में रंग बिरंगी पतंगों से सज गए हैं। शाहगंज, सेव का बाजार, बोदला, लोहामंडी सहित छोटी बड़ी दुकानों में पतंगें आई गई हैं।
माघ मास में स्नान फलदायी
कुंभ न जा पाने वाले लोग माघ मास में किसी पवित्र सरोवर या नदी में स्नान कर पुण्य अर्जित कर सकते हैं। गंगा स्नान और दान से उन्हें विशेष फल की प्राप्ति होगी। प्रयागराज में आयोजित कुंभ में भी शाही स्नान होंगे। जिले से भी बड़ी संख्या में लोग प्रयागराज पहुंचेंगे।
इस बार कुंभ में 14-15 जनवरी को मकर संक्रांति (पहला शाही स्नान), 21 जनवरी को पौष पूर्णिमा, 31 जनवरी को एकादशी स्नान, 04 फरवरी को मौनी अमावस्या (दूसरा शाही स्नान),10 फरवरी को बसंत पंचमी (तीसरा शाही स्नान),19 फरवरी को माघी पूर्णिमा और 04 मार्च को महाशिवरात्रि का स्नान होगा।
माघ मास में स्नान फलदायी
कुंभ न जा पाने वाले लोग माघ मास में किसी पवित्र सरोवर या नदी में स्नान कर पुण्य अर्जित कर सकते हैं। गंगा स्नान और दान से उन्हें विशेष फल की प्राप्ति होगी। प्रयागराज में आयोजित कुंभ में भी शाही स्नान होंगे। जिले से भी बड़ी संख्या में लोग प्रयागराज पहुंचेंगे।
इस बार कुंभ में 14-15 जनवरी को मकर संक्रांति (पहला शाही स्नान), 21 जनवरी को पौष पूर्णिमा, 31 जनवरी को एकादशी स्नान, 04 फरवरी को मौनी अमावस्या (दूसरा शाही स्नान),10 फरवरी को बसंत पंचमी (तीसरा शाही स्नान),19 फरवरी को माघी पूर्णिमा और 04 मार्च को महाशिवरात्रि का स्नान होगा।