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'मौत के अस्पताल': आईसीयू में खामियां, आग से निपटने के उपकरण भी खराब; प्रमाणपत्रों में भी मिली गड़बड़ी
Tue, 02 Jun 2026 09:29 AM IST
Dhirendra Singh
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
Published by: Dhirendra Singh
Updated Tue, 02 Jun 2026 09:29 AM IST
सार
स्वास्थ्य विभाग की जांच में आगरा के कई अस्पतालों और पैथोलॉजी लैब में आईसीयू सुविधाओं, विशेषज्ञ डॉक्टरों, पैरामेडिकल स्टाफ और फायर सेफ्टी मानकों की गंभीर कमी सामने आई है। अधूरे दस्तावेज और मानक पूरे न होने पर संबंधित संस्थानों को नोटिस जारी किए जा रहे हैं।
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अस्पताल - सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : freepik
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विस्तार
आगरा के अस्पताल-पैथोलॉजी के लाइसेंस नवीनीकरण के लिए लगाए प्रमाणपत्रों की जांच लापरवाही सामने आ रही है। आईसीयू में खामियां हैं, तो आग से निपटने के उपकरण भी खराब हैं। ऑडिट रिपोर्ट भी नहीं लगाई है। स्वास्थ्य विभाग ऐसे अस्पतालों की सूची बनाकर नोटिस जारी कर रहा है।
स्वास्थ्य विभाग में बीते साल 1385 चिकित्सकीय संस्थान पंजीकृत हुए थे। इनमें से करीब 300 अस्पताल-लैब में मानक पूरे नहीं मिलने पर 2025-26 के लिए ही लाइसेंस का नवीनीकरण किया। जबकि अन्य चिकित्सकीय संस्थानों का 2025-30 के लिए लाइसेंस का नवीनीकरण कर दिया गया था। अधूरे मानक वाले संस्थानों ने पांच साल के लाइसेंस के लिए नए सिरे से ऑनलाइन आवेदन किया। इनके प्रमाणपत्रों की जांच करने पर आईसीयू में जीवनरक्षक उपकरण और 24 घंटे क्रिटिकल केयर एक्सपर्ट चिकित्सक नहीं होना सामने आया है।
प्रशिक्षित पैरामेडिकल स्टाफ की भी कमी है। आग से निपटने के लिए अग्निशमन विभाग से एनओसी-ऑडिट रिपोर्ट नहीं है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और बायोमेडिकल वेस्ट की एनओसी बीते साल की लगा दी है। पैथोलॉजी लैब में चिकित्सकों ने सेवाएं देने के लिए समय नहीं खोला है। कुछ अस्पतालों में पर्सन इंचार्ज के तौर पर एक से अधिक अस्पताल के लिए आवेदन किया है। सीएमओ डॉ. अरुण श्रीवास्तव ने बताया कि अस्पताल-पैथोलॉजी लैब के लिए संचालकों की ओर से लगाए प्रमाणपत्र अधूरे हैं। कई में मानक पूरे नहीं हैं। इन सभी चिकित्सकीय संस्थानों को मानक पूरे करने के लिए नोटिस दिए जा रहे हैं। अभी इनके लाइसेंस का नवीनीकरण नहीं किया जा रहा है।
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इन बिंदुओं पर अस्पतालों को देनी है रिपोर्ट
सीएमओ ने बताया कि अस्पताल का नाम, बेड संख्या, संचालक का नाम, फुलटाइम चिकित्सक का नाम-डिग्री, आईसीयू में बेड की संख्या, एक्सपर्ट डॉक्टर का नाम, पैरामेकिडकल स्टाफ समेत 17 बिंदुओं पर रिपोर्ट देनी है। इसके अलावा अस्पताल के बाहर चिकित्सक का नाम का बोर्ड लगाना है। अस्पताल में मिलने वाली सुविधाएं और उनका शुल्क के बारे में बोर्ड पर जानकारी दर्ज करनी है। प्रवेश द्वार और चिकित्सक के चैंबर के सीसीटीवी कैमरे भी होने चाहिए।
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स्वास्थ्य विभाग में बीते साल 1385 चिकित्सकीय संस्थान पंजीकृत हुए थे। इनमें से करीब 300 अस्पताल-लैब में मानक पूरे नहीं मिलने पर 2025-26 के लिए ही लाइसेंस का नवीनीकरण किया। जबकि अन्य चिकित्सकीय संस्थानों का 2025-30 के लिए लाइसेंस का नवीनीकरण कर दिया गया था। अधूरे मानक वाले संस्थानों ने पांच साल के लाइसेंस के लिए नए सिरे से ऑनलाइन आवेदन किया। इनके प्रमाणपत्रों की जांच करने पर आईसीयू में जीवनरक्षक उपकरण और 24 घंटे क्रिटिकल केयर एक्सपर्ट चिकित्सक नहीं होना सामने आया है।
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प्रशिक्षित पैरामेडिकल स्टाफ की भी कमी है। आग से निपटने के लिए अग्निशमन विभाग से एनओसी-ऑडिट रिपोर्ट नहीं है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और बायोमेडिकल वेस्ट की एनओसी बीते साल की लगा दी है। पैथोलॉजी लैब में चिकित्सकों ने सेवाएं देने के लिए समय नहीं खोला है। कुछ अस्पतालों में पर्सन इंचार्ज के तौर पर एक से अधिक अस्पताल के लिए आवेदन किया है। सीएमओ डॉ. अरुण श्रीवास्तव ने बताया कि अस्पताल-पैथोलॉजी लैब के लिए संचालकों की ओर से लगाए प्रमाणपत्र अधूरे हैं। कई में मानक पूरे नहीं हैं। इन सभी चिकित्सकीय संस्थानों को मानक पूरे करने के लिए नोटिस दिए जा रहे हैं। अभी इनके लाइसेंस का नवीनीकरण नहीं किया जा रहा है।
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इन बिंदुओं पर अस्पतालों को देनी है रिपोर्ट
सीएमओ ने बताया कि अस्पताल का नाम, बेड संख्या, संचालक का नाम, फुलटाइम चिकित्सक का नाम-डिग्री, आईसीयू में बेड की संख्या, एक्सपर्ट डॉक्टर का नाम, पैरामेकिडकल स्टाफ समेत 17 बिंदुओं पर रिपोर्ट देनी है। इसके अलावा अस्पताल के बाहर चिकित्सक का नाम का बोर्ड लगाना है। अस्पताल में मिलने वाली सुविधाएं और उनका शुल्क के बारे में बोर्ड पर जानकारी दर्ज करनी है। प्रवेश द्वार और चिकित्सक के चैंबर के सीसीटीवी कैमरे भी होने चाहिए।