{"_id":"6aba21636acab80c960f8a6f","slug":"mainpuri-s-ishan-river-dirty-water-from-8-drains-flows-directly-into-river-stp-project-stuck-over-land-2026-09-28","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"सीवेज का जहर और अतिक्रमण: जीवनदायिनी ईशन नदी अब बनी नाला, कभी 400 गांव की बुझाती थी प्यास","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सीवेज का जहर और अतिक्रमण: जीवनदायिनी ईशन नदी अब बनी नाला, कभी 400 गांव की बुझाती थी प्यास
Mon, 28 Sep 2026 01:42 PM IST
Dhirendra Singh
अबरार अहमद, अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, मैनपुरी
अबरार अहमद, अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, मैनपुरी
Published by: Dhirendra Singh
Updated Mon, 28 Sep 2026 01:42 PM IST
सार
मैनपुरी की ईशन नदी में आठ जगहों से शहर का गंदा पानी बिना शोधन के सीधे गिर रहा है, जिससे कभी जीवनदायिनी रही नदी नाले में बदलती जा रही है। नदी की सफाई और सीवेज ट्रीटमेंट के प्रस्ताव महीनों से अटके हैं, जबकि पंपिंग स्टेशन के लिए जमीन न मिलने से एसटीपी परियोजना भी आगे नहीं बढ़ पा रही है।
विज्ञापन
ईशन नदी
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
विस्तार
कभी जनपद के 400 गांवों के लिए जीवनदायिनी रही ईशन नदी अब नाले में तब्दील हो चुकी है। एक-दो नहीं, आठ जगह से शहर का गंदा पानी बिना शोधन के इसमें सीधे गिर रहा है। लाखों रुपये फूंकने के बाद भी नदी मैला ढोने को मजबूर है। इसके पुनरुद्धार के लिए कागजों पर प्रस्ताव तो खूब बने मगर सिस्टम की सुस्ती और अफसरों की लापरवाही से धरातल पर नहीं उतरे।
विज्ञापन
वर्ष 2016 में सिंचाई विभाग ने मोटी रकम खर्च की। वर्ष 2019 में तत्कालीन जिलाधिकारी महेंद्र बहादुर सिंह ने कुछ प्रयास किए लेकिन उनके तबादले के साथ फाइलें अलमारियों में कैद हो गईं। वर्ष 2025 में तत्कालीन डीएम अंजनी कुमार सिंह ने पुसैना पुल से शीतला देवी मंदिर तक ड्रोन से सर्वे कराया, रिपोर्ट बनी, कमियां चिह्नित की गईं मगर नतीजा शून्य रहा।
विज्ञापन
विज्ञापन
शहर के अधिकांश रिहायशी इलाकों का सीवेज सेंट मैरी स्कूल के पास सीधे ईशन में गिर रहा है। यही हाल दीवानी रोड नाले का भी है। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) में अजय प्रताप सिंह बनाम जिलाधिकारी के केस के आंकड़े बताते हैं कि 6 नहीं बल्कि 8 बड़े नाले बिना किसी शोधन के सीधे नदी में जहर उड़ेल रहे हैं लेकिन नगर पालिका के अधिकारियों का दावा है कि गंदगी रोकने के लिए नालों के मुहाने पर जाल लगाए गए हैं।
ईशन की आत्मकथा नामक किताब लिखने वाले गोपीनाथ अड्डा, रामलीला मैदान निवासी साहित्यकार श्रीकृष्ण मिश्र कहते हैं इस नदी से कभी लोग खेतों की सिंचाई करते थे। नदी किनारे घने जंगल थे। पशु-पक्षी इसका पानी पीते थे। जिले की बड़ी आबादी इससे लाभान्वित थी लेकिन धीरे-धीरे लोगों ने अपने फायदे के लिए इस नदी का गला घोंटकर नाला बना दिया।
छह माह से धूल फांक रहे प्रस्ताव
नमामि गंगे योजना के तहत नदी की सफाई के लिए सिंचाई विभाग का 5 से 6 करोड़ का प्रस्ताव बीते 6 महीने से धूल फांक रहा है। सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट बनाने की योजना भी अधर में है। 400 से 500 वर्ग मीटर जमीन (पंपिंग स्टेशन के लिए) न मिलने से पूरा प्रोजेक्ट लटका हुआ है।
नमामि गंगे योजना के तहत नदी की सफाई के लिए सिंचाई विभाग का 5 से 6 करोड़ का प्रस्ताव बीते 6 महीने से धूल फांक रहा है। सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट बनाने की योजना भी अधर में है। 400 से 500 वर्ग मीटर जमीन (पंपिंग स्टेशन के लिए) न मिलने से पूरा प्रोजेक्ट लटका हुआ है।
मुहाने तक खड़े हो गए मॉल और स्कूल
नदी के 50 मीटर के दायरे में कोई निर्माण नहीं करने के एनजीटी के निर्देश के बावजूद ईशन के मुहाने तक बहुमंजिला मकान, दुकानें, स्कूल और मॉल खड़े हो गए हैं। अब जाकर प्रशासन ने सदर तहसील के 60 और भोगांव के 20 अतिक्रमणकारियों को नोटिस भेजा है।
नदी के 50 मीटर के दायरे में कोई निर्माण नहीं करने के एनजीटी के निर्देश के बावजूद ईशन के मुहाने तक बहुमंजिला मकान, दुकानें, स्कूल और मॉल खड़े हो गए हैं। अब जाकर प्रशासन ने सदर तहसील के 60 और भोगांव के 20 अतिक्रमणकारियों को नोटिस भेजा है।
नदी का इतिहास
12वीं सदी में इस नदी को इच्छु के नाम से जाना जाता था। 18वीं सदी आते-आते दस्तावेजों में यह ईशन नदी के रूप में दर्ज हो गई। इसका उद्गम एटा जिले से लगभग 14 किमी दूर नगला सुजान गांव के पास जनसई माइनर (सिकंदराराऊ नाले के टेल/रिजोर कस्बे की झील) से होता है। इसकी कुल लंबाई करीब 317 किमी है। एटा, मैनपुरी और कन्नौज जिलों के 185 से अधिक गांवों से होते हुए यह कानपुर के बिल्हौर में गंगा नदी में मिल जाती है।
12वीं सदी में इस नदी को इच्छु के नाम से जाना जाता था। 18वीं सदी आते-आते दस्तावेजों में यह ईशन नदी के रूप में दर्ज हो गई। इसका उद्गम एटा जिले से लगभग 14 किमी दूर नगला सुजान गांव के पास जनसई माइनर (सिकंदराराऊ नाले के टेल/रिजोर कस्बे की झील) से होता है। इसकी कुल लंबाई करीब 317 किमी है। एटा, मैनपुरी और कन्नौज जिलों के 185 से अधिक गांवों से होते हुए यह कानपुर के बिल्हौर में गंगा नदी में मिल जाती है।
सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता राजीव कुमार ने बताया कि नमामि गंगे के तहत नदी की सफाई, किनारे दुरुस्त करने और जलकुंभी हटाने के लिए 5-6 करोड़ का प्रस्ताव भेजा गया है। एसटीपी के लिए जमीन चिह्नित है। पंपिंग स्टेशन के लिए 400-500 वर्ग मीटर जमीन मिलते ही काम आगे बढ़ेगा।
जल निगम ग्रामीण इकाई के प्रोजेक्ट मैनेजर आरपी सिंह ने बताया कि ईशन नदी में गिर रहे नालों को डायवर्ट करने के लिए पंपिंग स्टेशन बनाया जाना है। इसके लिए जमीन की जरूरत है। जमीन उपलब्ध होने के बाद ही एस्टीमेट बनेगा। कितने पाइप लगेंगे और कितनी क्षमता की मोटर चाहिए होगी। यह सब जमीन मिलने पर ही तय होगा।
नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी ने बुद्धि प्रकाश ने बताया कि ईशन नदी में गिरने वाले नालों से कचरा और गंदगी रोकने के लिए जाल लगाए गए हैं। बारिश की वजह से जाल हटा दिए गए थे, जल्द दोबारा लगा देंगे।