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Agra News: स्टार हेल्थ बीमा कंपनी पर 12 लाख रुपये का वाद दायर
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मैनपुरी। स्टार हेल्थ बीमा कंपनी पर एक व्यक्ति ने अपनी पत्नी के इलाज का 12 लाख रुपये का खर्च न देने और धोखाधड़ी का आरोप लगाते हुए स्थायी लोक अदालत में वाद दायर किया है। उन्होंने बीमा एजेंट पर गलत जानकारी देकर पॉलिसी रिन्यू करवाने और फिर क्लेम रिजेक्ट करने का आरोप लगाया है।
दावाकर्ता नितिन तिवारी के अनुसार 2021 में स्टार हेल्थ का बीमा करवाया था। उनके परिवार के पांच सदस्य शामिल थे। दिसंबर 2021 में उनकी पत्नी अलका तिवारी की किडनी में गंभीर समस्या सामने आई। कानपुर में उनका इलाज शुरू हुआ। नितिन ने शुरुआती इलाज का पूरा खर्च खुद उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि जब उन्होंने पॉलिसी रिन्यू न करने का सोचा तो एजेंट आशुतोष सक्सेना ने उन्हें यह कहकर गुमराह किया कि दो साल बाद कंपनी सारा खर्च वहन करेगी। एजेंट के दबाव में नितिन ने लगातार दो साल पॉलिसी रिन्यू करवाई। मई 2024 में पत्नी की तबीयत बिगड़ने पर उन्हें कानपुर में भर्ती कराना पड़ा और उनकी डायलिसिस हुई। इलाज का खर्च बढ़ने पर नितिन ने क्लेम दाखिल किया। लेकिन कंपनी ने प्रथम उपचार का पर्चा न होने का हवाला देकर दावा खारिज कर दिया।
नितिन ने आरोप लगाया कि एजेंट ने उनके मूल दस्तावेज भी वापस नहीं करवाए। उन्हें अपने विभाग से भी कोई आर्थिक सहायता नहीं मिल पाई। नितिन को स्वयं भी फिस्टुला की समस्या हुई। इसका इलाज कैशलेस पैनल वाले अस्पताल में हुआ। हालांकि बाद में उनकी ड्रेसिंग के बिल भी पास नहीं हुए।
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नितिन तिवारी ने कंपनी और एजेंट पर आर्थिक व मानसिक शोषण का आरोप लगाया है। उन्होंने अधिवक्ता देवेंद्र सिंह कटारिया के माध्यम से स्थायी लोक अदालत में एजेंट आशुतोष सक्सेना, स्टार बीमा के प्रबंधक (फर्रुखाबाद) और चेन्नई हेड ऑफिस के खिलाफ 12 लाख रुपये की क्षतिपूर्ति दिलाने और एजेंट को कंपनी से हटाने की मांग की है। स्थायी लोक अदालत ने मामले को दर्ज कर सभी प्रतिवादियों को पांच अगस्त 2025 को उपस्थित होने को नोटिस जारी किया है।
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दावाकर्ता नितिन तिवारी के अनुसार 2021 में स्टार हेल्थ का बीमा करवाया था। उनके परिवार के पांच सदस्य शामिल थे। दिसंबर 2021 में उनकी पत्नी अलका तिवारी की किडनी में गंभीर समस्या सामने आई। कानपुर में उनका इलाज शुरू हुआ। नितिन ने शुरुआती इलाज का पूरा खर्च खुद उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि जब उन्होंने पॉलिसी रिन्यू न करने का सोचा तो एजेंट आशुतोष सक्सेना ने उन्हें यह कहकर गुमराह किया कि दो साल बाद कंपनी सारा खर्च वहन करेगी। एजेंट के दबाव में नितिन ने लगातार दो साल पॉलिसी रिन्यू करवाई। मई 2024 में पत्नी की तबीयत बिगड़ने पर उन्हें कानपुर में भर्ती कराना पड़ा और उनकी डायलिसिस हुई। इलाज का खर्च बढ़ने पर नितिन ने क्लेम दाखिल किया। लेकिन कंपनी ने प्रथम उपचार का पर्चा न होने का हवाला देकर दावा खारिज कर दिया।
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नितिन ने आरोप लगाया कि एजेंट ने उनके मूल दस्तावेज भी वापस नहीं करवाए। उन्हें अपने विभाग से भी कोई आर्थिक सहायता नहीं मिल पाई। नितिन को स्वयं भी फिस्टुला की समस्या हुई। इसका इलाज कैशलेस पैनल वाले अस्पताल में हुआ। हालांकि बाद में उनकी ड्रेसिंग के बिल भी पास नहीं हुए।
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नितिन तिवारी ने कंपनी और एजेंट पर आर्थिक व मानसिक शोषण का आरोप लगाया है। उन्होंने अधिवक्ता देवेंद्र सिंह कटारिया के माध्यम से स्थायी लोक अदालत में एजेंट आशुतोष सक्सेना, स्टार बीमा के प्रबंधक (फर्रुखाबाद) और चेन्नई हेड ऑफिस के खिलाफ 12 लाख रुपये की क्षतिपूर्ति दिलाने और एजेंट को कंपनी से हटाने की मांग की है। स्थायी लोक अदालत ने मामले को दर्ज कर सभी प्रतिवादियों को पांच अगस्त 2025 को उपस्थित होने को नोटिस जारी किया है।