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Agra News: एक्सक्लूसिवः बधाई मैनपुरी! सारस की आबादी में रिकॉर्ड उछाल, 6 माह में 147 नए मेहमान
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सारसों का कुनबा अठखेलिया करता हुआ।
- फोटो : वन विभाग
मैनपुरी। उत्तर प्रदेश के राजकीय पक्षी सारस के संरक्षण प्रयासों में मैनपुरी जिले ने एक बड़ी सफलता हासिल की है। वन विभाग की ओर से 23 और 24 जून को कराई गई ग्रीष्मकालीन गणना के आंकड़ों ने वन्यजीव प्रेमियों में खुशी की लहर पैदा कर दी है। पिछले छह महीनों में जिले में सारसों की संख्या में रिकॉर्ड 147 की वृद्धि दर्ज की गई है, जिससे कुल सारसों का आंकड़ा अब 2992 पर पहुंच गया है।
आंकड़ों में मैनपुरी रेंज में वयस्क सारसों की संख्या सबसे अधिक पाई गई है। इसके साथ ही सभी रेंजों में सारस के बच्चों की उपस्थिति यह बताती है कि यह क्षेत्र उनके सफल प्रजनन के लिए आदर्श बन गया है। हालांकि इस बीच थोड़ी नाखुश होने वाली बात यह है कि किशनी स्थित समान पक्षी विहार में सारसों का कुनबा घटा है। यहां 97 वयस्क, किशोर 0, बच्चे 15 और अंडे 0 पाए गए हैं। जबकि 2024 शीतकालीन में हुई गणना में 137 सारस यहां पाए गए थे।
पिछली दो गणनाओं में इतने सारस पाए गए
वन विभाग की ओर से जिले में ग्रीष्मकालीन सत्र में जून 2024 में कराई गणना में 2945 सारस में पाए गए थे। शीतकालीन सत्र में दिसंबर 2024 में कराई गणना में 2845 सारस पाए गए थे।
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इस प्रकार हुई गणना
जिले की सभी तहसीलों में गणना कराई गई। प्रत्येक गणना स्थल पर प्रात: 6 बजे से 8 बजे व शाम 4 बजे से 6 बजे के बीच यह हुई। दोनों समय में से अधिकतम संख्या को वास्तविक संख्या माना गया। गणना स्थान ऐसा रखा गया, जहां से अधिक से अधिक संख्या में सारस देखे जा सकें। प्रत्येक गणना स्थल पर टीम द्वारा सारस का एक-एक डिजिटल फोटो भी लिया गया। प्रत्येक गणना स्थल का जीपीएस रीडिंग अर्थात अक्षांश और देशान्तर अंकित किया गया। गणना टीम द्वारा भरे गए गणना प्रपत्र एवं फोटो संबंधित प्रभागीय वनाधिकारी को प्रस्तुत किए जा चुके हैं।
जलाशयों के भराव क्षेत्र में मिलते हैं सारस
जनपद में राजकीय पक्षी सारस बांध, तालाब और नदियों के भराव क्षेत्र में पाए जाते हैं। खासतौर पर नम भूमि (वेटलैण्ड) क्षेत्रों में ये खूब मिलते है। जलाशयों के किनारे की नम भूमि पर इन्हें भोजन मिलता है। इस भूमि की सुरक्षा और संरक्षण की आवश्यकता है।
इन कारणों के चलते बढ़ा कुनबा
देश में सबसे ज्यादा सारस मैनपुरी में पाए जाते हैं। बताया जाता है कि यहां का पर्यावरण और जल सारसों के अनुकूल है। यह पक्षी अपनी आकर्षक बनावट के लिये जाना जाता है।
वर्ष में 2 बार होती है गणना
प्रधान मुख्य वन संरक्षक लखनऊ के आदेश पर राजकीय पक्षी की गणना साल में दो बार होती है। ग्रीष्मकालीन सारस गणना जून में और शीतकालीन दिसंबर में होती है। इसकी रिपोर्ट प्रधान मुख्य वन संरक्षक वन्य जीव लखनऊ को भेजी जाती है।
2025 ग्रीष्मकालीन गणना में रेंजवार यह स्थिति पाई गई
रेंज वयस्क किशोर बच्चे अंडे
मैनपुरी 1016 00 91 00
करहल 652 00 74 00
भोगांव 342 00 24 00
किशनी 725 00 68 00
2024 शीतकालीन गणना में रेंजवार यह स्थिति पाई गई थी
रेंज वयस्क किशोर बच्चे अंडे
किशनी 718 00 88 00
भोगांव 346 00 05 00
मैनपुरी 882 00 88 00
करहल 648 00 70 00
वर्जन
ग्रीष्मकालीन गणना हो चुकी है। गणना में सामने आई संख्या की रिपोर्ट शासन को भेजी जा चुकी है। जिले के लिए यह खुशी की बात है कि यहां सारसों का कुनबा तेजी से बढ़ा है। इसके लिए जिला प्रशासन और वन विभाग के प्रयास भी बहुत हद तक सहायक हैं।
- संजय कुमार मल्ल, डीएफओ
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आंकड़ों में मैनपुरी रेंज में वयस्क सारसों की संख्या सबसे अधिक पाई गई है। इसके साथ ही सभी रेंजों में सारस के बच्चों की उपस्थिति यह बताती है कि यह क्षेत्र उनके सफल प्रजनन के लिए आदर्श बन गया है। हालांकि इस बीच थोड़ी नाखुश होने वाली बात यह है कि किशनी स्थित समान पक्षी विहार में सारसों का कुनबा घटा है। यहां 97 वयस्क, किशोर 0, बच्चे 15 और अंडे 0 पाए गए हैं। जबकि 2024 शीतकालीन में हुई गणना में 137 सारस यहां पाए गए थे।
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पिछली दो गणनाओं में इतने सारस पाए गए
वन विभाग की ओर से जिले में ग्रीष्मकालीन सत्र में जून 2024 में कराई गणना में 2945 सारस में पाए गए थे। शीतकालीन सत्र में दिसंबर 2024 में कराई गणना में 2845 सारस पाए गए थे।
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इस प्रकार हुई गणना
जिले की सभी तहसीलों में गणना कराई गई। प्रत्येक गणना स्थल पर प्रात: 6 बजे से 8 बजे व शाम 4 बजे से 6 बजे के बीच यह हुई। दोनों समय में से अधिकतम संख्या को वास्तविक संख्या माना गया। गणना स्थान ऐसा रखा गया, जहां से अधिक से अधिक संख्या में सारस देखे जा सकें। प्रत्येक गणना स्थल पर टीम द्वारा सारस का एक-एक डिजिटल फोटो भी लिया गया। प्रत्येक गणना स्थल का जीपीएस रीडिंग अर्थात अक्षांश और देशान्तर अंकित किया गया। गणना टीम द्वारा भरे गए गणना प्रपत्र एवं फोटो संबंधित प्रभागीय वनाधिकारी को प्रस्तुत किए जा चुके हैं।
जलाशयों के भराव क्षेत्र में मिलते हैं सारस
जनपद में राजकीय पक्षी सारस बांध, तालाब और नदियों के भराव क्षेत्र में पाए जाते हैं। खासतौर पर नम भूमि (वेटलैण्ड) क्षेत्रों में ये खूब मिलते है। जलाशयों के किनारे की नम भूमि पर इन्हें भोजन मिलता है। इस भूमि की सुरक्षा और संरक्षण की आवश्यकता है।
इन कारणों के चलते बढ़ा कुनबा
देश में सबसे ज्यादा सारस मैनपुरी में पाए जाते हैं। बताया जाता है कि यहां का पर्यावरण और जल सारसों के अनुकूल है। यह पक्षी अपनी आकर्षक बनावट के लिये जाना जाता है।
वर्ष में 2 बार होती है गणना
प्रधान मुख्य वन संरक्षक लखनऊ के आदेश पर राजकीय पक्षी की गणना साल में दो बार होती है। ग्रीष्मकालीन सारस गणना जून में और शीतकालीन दिसंबर में होती है। इसकी रिपोर्ट प्रधान मुख्य वन संरक्षक वन्य जीव लखनऊ को भेजी जाती है।
2025 ग्रीष्मकालीन गणना में रेंजवार यह स्थिति पाई गई
रेंज वयस्क किशोर बच्चे अंडे
मैनपुरी 1016 00 91 00
करहल 652 00 74 00
भोगांव 342 00 24 00
किशनी 725 00 68 00
2024 शीतकालीन गणना में रेंजवार यह स्थिति पाई गई थी
रेंज वयस्क किशोर बच्चे अंडे
किशनी 718 00 88 00
भोगांव 346 00 05 00
मैनपुरी 882 00 88 00
करहल 648 00 70 00
वर्जन
ग्रीष्मकालीन गणना हो चुकी है। गणना में सामने आई संख्या की रिपोर्ट शासन को भेजी जा चुकी है। जिले के लिए यह खुशी की बात है कि यहां सारसों का कुनबा तेजी से बढ़ा है। इसके लिए जिला प्रशासन और वन विभाग के प्रयास भी बहुत हद तक सहायक हैं।
- संजय कुमार मल्ल, डीएफओ