फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Agra News ›   mainpuri news police negligence accident victim acused licence

Agra News: सड़क के यमराजों पर पुलिस की मेहरबानी

Thu, 10 Jul 2025 01:14 AM IST
Agra Bureau आगरा ब्यूरो
Updated Thu, 10 Jul 2025 01:14 AM IST
विज्ञापन
mainpuri news police negligence accident victim acused licence
सड़क हादसे की प्रतीकात्मक फोटो।  - फोटो : एआई
मैनपुरी। सड़क सुरक्षा के तमाम दावों और वादों के बावजूद, सड़कों पर मौत का तांडव थमने का नाम नहीं ले रहा है। पुलिस की लापरवाही ने वाहन चालकों को और भी बेलगाम कर दिया है। 1 जनवरी 2025 से 30 जून 2025 तक की अवधि में 320 सड़क दुर्घटनाएं हुईं, जिनमें 189 लोगों की मौत हो गई और 236 लोग घायल हुए। मगर, छह माह में एक भी आरोपी वाहन चालक का लाइसेंस निलंबित करने के लिए पुलिस ने परिवहन विभाग को कोई संस्तुति पत्र नहीं भेजा है।
विज्ञापन

यह स्थिति तब है जब तत्काली आईजी आगरा रेंज दीपक कुमार ने जिला पुलिस को मंडलीय सड़क सुरक्षा समिति की बैठक में इसी मुद्दे पर फटकार लगाई थी। इसके बाद भी सुधार नहीं हुआ।
विज्ञापन

इतना ही नहीं, दुर्घटनाओं के मामलों में मुकदमा दर्ज करने में भी पुलिस की सुस्ती साफ दिख रही है। कुल 320 दुर्घटनाओं में से महज 143 प्रकरणों में ही केस दर्ज हुआ है। यानी, आधे से भी कम मामलों में कानूनी प्रक्रिया शुरू हो पाई है। इसका सीधा मतलब है कि बड़ी संख्या में लापरवाह चालक बिना किसी डर के घूम रहे हैं, और भविष्य में फिर से किसी की जान लेने के लिए तैयार हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन



आईरेड पर डाटा फीडिंग में भी पुलिस की लापरवाही
आईरेड एप (इंटीग्रेटिड रोड एक्सीडेंट डेटाबेस) में सड़क हादसों का डाटा फीड करने में भी पुलिस लापरवाही बरत रही है। इस एप पर पुलिस पर एक जून 2025 से 30 जून 2025 तक के आंकड़े फाइलों से इतर हैं, कारण पुलिस का समय पर डाटा फीड नहीं करना है। 30 जून तक इस एप पर दर्शाए आंकड़ों के अनुसार जिले में 241 सड़क हादसे हुए हैं। 145 कुल मौत हुई हैं और 160 लोग गंभीर और 24 लोग हल्के घायल हुए हैं।

हादसों की समीक्षा में भी लापरवाही
पुलिस ने आईरेड एप छह माह में हुए हादसों में से 50 की समीक्षा कर रिपोर्ट आईरेड एप पर अपलोड की है। इनमें से ही 8 के करीब मामलों में जांच अधीन लिखा गया है। 60 फीसदी हादसों के पीछे चालक का ध्यान भंग होना कारण दर्शाया है। 20 फीसदी मामलों में सड़क पर हैवी ट्रैफिक व रोड इंजीनियरिंग की कमी और ट्रैफिक नियमों का पालन न करना दर्शाया गया है। हादसों की समीक्षा में सुस्त प्रगति होने से यह सवाल खड़ा हो रहा है कि जब पुलिस कारणों तक ही नहीं पहुंचेगी तो उसका निवारण कैसे होगा।


यह है नियम
सड़क सुरक्षा के तहत यह तय किया गया है कि सड़क हादसे में चालक की लापरवाही पाई जाती है और मुकदमा दर्ज होता है तो उसके लाइसेंस के निलंबन की संस्तुति कर आरटीओ कार्यालय में भेजी जाए। थाना स्तर से इस कार्य को संपादित किए जाने का प्रावधान है। पुलिस रिपोर्ट पर परिवहन विभाग द्वारा तीन माह के लिए लाइसेंस निलंबन का नियम है।

जमानत पाने के बाद फिर चलाने लगते हैं वाहन
जिले में हर वर्ष औसतन 700 सड़क दुर्घटनाएं होती हैं। मगर, इनके सापेक्ष लाइसेंस निलंबन की संस्तुति महज कुछ भी नहीं है। इसके चलते आरोपी चालक जमानत पाने के बाद फिर से वाहन चलाने लग जाते हैं। इससे न सिर्फ चालकों में कार्रवाई का भय कम हो रहा है, बल्कि लोगों की जान को भी सड़क पर चलते समय खतरा बढ़ता है।

पुलिस की यह ''''मेहरबानी'''' सड़क पर आम जनता के लिए जानलेवा साबित हो रही है। जब कानून के रखवाले ही अपराधियों को खुला घूमने देंगे, तो सड़कों पर सुरक्षित यात्रा की उम्मीद करना बेमानी है। यह स्थिति तब तक नहीं सुधरेगी जब तक पुलिस अपनी जिम्मेदारी ईमानदारी से नहीं निभाती और लापरवाह चालकों पर कड़ा शिकंजा नहीं कसती।

- प्रशांत भदौरिया, अधिवक्ता


सड़क हादसे में आरोपी चालक पर मुकदमा दर्ज करने वाले थाने के स्तर से ही लाइसेंस निलंबन की संस्तुति की कार्यवाही संपादित करने का प्रावधान है। अगर, ऐसा नहीं हो रहा है तो इसे दिखवाया जाएगा। सभी थानाध्यक्षों को इसे गंभीरता से लेने के निर्देश पहले से हैं।
- संतोष कुमार सिंह, डीएसपी ट्रैफिक

सड़क हादसे में आरोपी चालक पर मुकदमा दर्ज करने वाले थाने के स्तर से लाइसेंस निलंबन की संस्तुति पत्र आएगा तो तत्काल उस पर कार्रवाई की जाएगी।
- शिवम यादव, एआरटीओ
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed