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Mahashivratri 2024: महाशिवरात्रि पर 300 साल बाद बना दुर्लभ संयोग, लाभ के लिए ऐसे करें पूजा; जानें शुभ मुहूर्त
Fri, 08 Mar 2024 10:35 AM IST
धीरेन्द्र सिंह
संवाद न्यूज एजेंसी, कासगंज
संवाद न्यूज एजेंसी, कासगंज
Published by: धीरेन्द्र सिंह
Updated Fri, 08 Mar 2024 10:35 AM IST
सार
Mahashivratri 2024 Date: महाशिवरात्रि को कहते हैं कि इस दिन भगवान शिव को प्रसन्न करना बेहद आसान होता है। महादेव की कृपा जिस पर हो जाए, उसका जीवन खुशियों से भर जाता है। इस बार महाशिवरात्रि शिव एवं सर्वार्थ सिद्ध योग में मनेगी। ज्योतिषाचार्य के अनुसार 300 साल बाद ऐसे दुर्लभ योग बन रहे हैं।
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महा शिवरात्रि
- फोटो : SOCIAL MEDIA
विस्तार
महाशिवरात्रि पर्व शुक्रवार को शिव एवं सर्वार्थ सिद्ध योग में मनेगा। इसके साथ ही इस दिन श्रवण नक्षत्र रहेगा। वहीं शुक्र प्रदोष व्रत का संयोग बन रहा है। 300 साल बाद बन रहे दुर्लभ संयोगों को ज्योतिष काफी शुभ मान रहे हैं। ज्योतिषों का मानना है इन योगों में भोले नाथ की साधना करने से भक्तों को शीघ्र फल मिलेगा।
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ज्योतिषाचार्य मुकुंद बल्लभ भट्ट ने बताया कि महाशिवरात्रि पर शिव योग का संयोग बन रहा है। शिव योग साधना, मंत्र, जप और तप के लिए बहुत ही अच्छा होता है। इस योग में महाशिवरात्रि का व्रत रखने से भगवान शिव तक आपकी प्रार्थना शीघ्र ही पहुंच जाती है। इस योग का शुभारंभ 4 बजकर 45 मिनट पर होगा, जो पूरे दिन रहेगा। सुबह 6 बजकर 45 मिनट पर सर्वार्थ सिद्ध योग शुरू होगा जो सुबह 10 बजकर 41 मिनट तक रहेगा। महाशिवरात्रि पर ऐसा संयोग लगभग तीन सौ साल बाद बन रहा है।
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इस दिन श्रवण नक्षत्र रहेगा। इस नक्षत्र के स्वामी शनिदेव माने जाते हैं जो कि शिवजी के परम भक्त हैं। श्रवण नक्षत्र में शिव पूजा करने से शिवजी की कृपा का लाभ बहुत ही जल्द देखने को मिलता है। इस दिन मकर राशि में मंगल और चंद्रमा की युति हो रही है। जिससे मंगल योग बन रहा है। कुंभ राशि में शुक्र, शनि और सूर्य की युति से त्रिग्रही योग बन रहा है। जबकि मीन राशि में राहु और बुध की युति हो रही है।
इस तरह करें पूजा
-शिव रात्रि के दिन सूर्योदय से पूर्व स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
-भगवान शंकर को पंचामृत से स्नान करवाएं, साथ ही माँ गौरी, गणेश, कार्तिकेय और नंदी की पूजा करें।
-भगवान शंकर को केसर मिश्रित जल अर्पित कर, सभी को चंदन का तिलक लगाएं।
-तीन बेलपत्र, भांग धतूरा, कमल गट्टे, फल, मिष्ठान, मीठा पान, इत्र व दक्षिणा चढ़ाएं।
-दूध से बनी मिठाई का भोग लगाएं।
-रूद्राक्ष माला से ऊँ नमो भगवते रूद्राय, ऊँ नमः शिवाय रूद्राय् शम्भवाय् भवानीपतये नमो नमः मंत्र का जाप करें।
-शिव सहस्रनाम, शिव चालीसा या शिव पुराण का पाठ करें।
-शिव रात्रि के दिन सूर्योदय से पूर्व स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
-भगवान शंकर को पंचामृत से स्नान करवाएं, साथ ही माँ गौरी, गणेश, कार्तिकेय और नंदी की पूजा करें।
-भगवान शंकर को केसर मिश्रित जल अर्पित कर, सभी को चंदन का तिलक लगाएं।
-तीन बेलपत्र, भांग धतूरा, कमल गट्टे, फल, मिष्ठान, मीठा पान, इत्र व दक्षिणा चढ़ाएं।
-दूध से बनी मिठाई का भोग लगाएं।
-रूद्राक्ष माला से ऊँ नमो भगवते रूद्राय, ऊँ नमः शिवाय रूद्राय् शम्भवाय् भवानीपतये नमो नमः मंत्र का जाप करें।
-शिव सहस्रनाम, शिव चालीसा या शिव पुराण का पाठ करें।
महाशिवरात्रि पर चार प्रहर के पूजा मुहूर्त
-प्रथम प्रहर शाम 06 बजकर 25 मिनट से रात 09 बजकर 28 मिनट तक
-दूसरा प्रहर रात 09 बजकर 28 मिनट से रात 12 बजकर 31 मिनट तक
-तीसरा प्रहर रात 12 बजकर 31 मिनट से तड़के 03 बजकर 34 मिनट तक
-चौथा प्रहर 9 मार्च को प्रात: 03 बजकर 34 मिनट से सुबह 06 बजकर 37 मिनट तक
-प्रथम प्रहर शाम 06 बजकर 25 मिनट से रात 09 बजकर 28 मिनट तक
-दूसरा प्रहर रात 09 बजकर 28 मिनट से रात 12 बजकर 31 मिनट तक
-तीसरा प्रहर रात 12 बजकर 31 मिनट से तड़के 03 बजकर 34 मिनट तक
-चौथा प्रहर 9 मार्च को प्रात: 03 बजकर 34 मिनट से सुबह 06 बजकर 37 मिनट तक