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गाइडलाइनः कम प्रतिरोधक क्षमता वाले स्वास्थ्यकर्मी कोरोना उपचार में नहीं करेंगे ड्यूटी
Wed, 27 May 2020 12:15 PM IST
Abhishek Saxena
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
Published by: Abhishek Saxena
Updated Wed, 27 May 2020 12:15 PM IST
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कोरोना वायरस
- फोटो : PTI
निजी व सरकारी अस्पतालों में कोरोना से बचाव के लिए तय किए गए मानकों (कोविड इन्फेक्शन प्रिवेंशन प्रोटोकॉल) का उल्लंघन होने की शिकायतें मिली हैं। इससे मरीज व स्टाफ दोनों के संक्रमित होने की आशंका है।
ऐसे में प्रोटोकॉल का कड़ाई से पालन और प्रिवेंशन कमेटियों के लिए शासन ने नई गाइडलाइन जारी की है। गर्भवती और कम प्रतिरोधक क्षमता वाले कर्मचारियों को कोरोना उपचार में न लगाने के निर्देश हैं।
प्रमुख सचिव अमित मोहन प्रसाद ने इस संबंध में मुख्य चिकित्सा अधिकारी को निर्देश दिए हैं। इसके लिए स्वास्थ्यकर्मियों को उच्च जोखिम व कम जोखिम की श्रेणियों में बांटा गया है।
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ऐसे में प्रोटोकॉल का कड़ाई से पालन और प्रिवेंशन कमेटियों के लिए शासन ने नई गाइडलाइन जारी की है। गर्भवती और कम प्रतिरोधक क्षमता वाले कर्मचारियों को कोरोना उपचार में न लगाने के निर्देश हैं।
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प्रमुख सचिव अमित मोहन प्रसाद ने इस संबंध में मुख्य चिकित्सा अधिकारी को निर्देश दिए हैं। इसके लिए स्वास्थ्यकर्मियों को उच्च जोखिम व कम जोखिम की श्रेणियों में बांटा गया है।
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इन गतिविधियों की होगी निगरानी
1. अस्पताल में सभी स्टाफ को पर्सनल प्रोटेक्टिव इक्यूपमेंट (पीपीई) किट उपलब्ध कराई जाए।
2. संक्रमण के लक्षण मिलने पर त्वरित सूचना दी जाए।
3. अस्पताल में सभी स्वास्थ्यकर्मियों नियमित थर्मल स्कैनिंग की व्यवस्था की जाए।
4. वार्डों, ओपीडी, आईसीयू से निकलने पर स्टाफ सामाजिक दूरी बनाएं, मास्क लगाएं।
ये लोग 14 दिन क्वारंटीन रहेंगे
1. इनमें कोरोना मरीज का उपचार करने वाले स्वास्थ्य कर्मी, सैंपलिंग टीम व लैब स्टाफ।
2. पीपीई का प्रयोग किए बिना एरोसोल उत्पन्न करने वाली प्रक्रिया में काम करने वाले।
3. बिना मास्क, फेस शील्ड, चश्मा पहने संक्रमित के संपर्क में आने वाले स्वास्थ्यकर्मी।
4. बिना मास्क व उपकरणों के दुर्घटनावश शरीरिक द्रव के संपर्क में आए स्वास्थ्यकर्मी।
इनमें लक्षण मिलने पर जांच होगी
1. ऐसे स्वास्थ्यकर्मी जो गैर कोरोना मरीजों के उपचार में शामिल हैं।
2 इन्हें स्वयं अपने स्वास्थ्य की स्थिति के बारे में प्रबंधन को बताना होगा।
3. इस श्रेणी में काम करने वालों के लिए क्वारंटीन में रहना अनिवार्य नहीं।
3. लक्षण मिलने पर जांच होगी, पॉजिटिव आने पर कोविड अस्पताल में रखा जाएगा।
1. अस्पताल में सभी स्टाफ को पर्सनल प्रोटेक्टिव इक्यूपमेंट (पीपीई) किट उपलब्ध कराई जाए।
2. संक्रमण के लक्षण मिलने पर त्वरित सूचना दी जाए।
3. अस्पताल में सभी स्वास्थ्यकर्मियों नियमित थर्मल स्कैनिंग की व्यवस्था की जाए।
4. वार्डों, ओपीडी, आईसीयू से निकलने पर स्टाफ सामाजिक दूरी बनाएं, मास्क लगाएं।
ये लोग 14 दिन क्वारंटीन रहेंगे
1. इनमें कोरोना मरीज का उपचार करने वाले स्वास्थ्य कर्मी, सैंपलिंग टीम व लैब स्टाफ।
2. पीपीई का प्रयोग किए बिना एरोसोल उत्पन्न करने वाली प्रक्रिया में काम करने वाले।
3. बिना मास्क, फेस शील्ड, चश्मा पहने संक्रमित के संपर्क में आने वाले स्वास्थ्यकर्मी।
4. बिना मास्क व उपकरणों के दुर्घटनावश शरीरिक द्रव के संपर्क में आए स्वास्थ्यकर्मी।
इनमें लक्षण मिलने पर जांच होगी
1. ऐसे स्वास्थ्यकर्मी जो गैर कोरोना मरीजों के उपचार में शामिल हैं।
2 इन्हें स्वयं अपने स्वास्थ्य की स्थिति के बारे में प्रबंधन को बताना होगा।
3. इस श्रेणी में काम करने वालों के लिए क्वारंटीन में रहना अनिवार्य नहीं।
3. लक्षण मिलने पर जांच होगी, पॉजिटिव आने पर कोविड अस्पताल में रखा जाएगा।