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मैनपुरी में दिव्यांगता को मात दे रामशरन बने सहायक आयुक्त उद्योग
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मैनपुरी। दिव्यांगता को मात देकर मोहल्ला अग्रवाल निवासी रमेश सिंह राठौर के छोटे पुत्र रामशरन राठौर ने 17 फरवरी को जारी हुए उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग की परीक्षा में सफलता हासिल की है। रामशरन राठौर ने इस परीक्षा में दिव्यांग कोठे में 19वीं रैक हासिल कर सहायक आयुक्त उद्योग के पद पर चयन पाया है। रामशरन राठौर के पिता रमेश चंद्र राठौर बीएसएनएल विभाग से लाइन मैन के पद से सेवानिवृत्त हैं, माता सुशीला देवी गृहणी हैं।
रामशरन ने जिले के पावर हाउस रोड स्थित गौतबुद्ध उच्चतर माध्यमिक विद्यालय से हाईस्कूल की परीक्षा 2005 में पास की। इसके बाद नगर के एकरसानंद इंटर कॉलेज से वर्ष 2007 में इंटरमीडिएट की परीक्षा पास की। वर्ष 2012 में बीटेक करने के बाद रामशरन ने दिव्यांगता को पीछे छोड़ उड़ान भरने का संकल्प लिया।
वर्ष 2013 से 2016 तक रामशरन ने अहमदाबाद में कैग ऑडिटर के रूप में कार्य किया। इसके बाद वे पुणे में सेंट्रल एक्साइज इंस्पेक्टर के रूप में कार्यरत रहे। फरवरी 2017 में उन्होंने यहां भी नौकरी छोड़ दी और कन्नौज में डिवीजनल एकाउंटेंट ऑफीसर के पद पर चयन पाया।
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पांच साल की उम्र में परिवार को लगा था बड़ा झटका
रामशरन जब पांच साल के थे तब एक दिन उन्हें बुखार आया और एक डॉक्टर के उपचार के बाद वे दिव्यांग हो गए। उनके दाएं पैर ने काम करना बंद कर दिया। रामशरन के माता-पिता को लगा कि बेटे का जीवन बर्बाद हो गया। परिजनों के उत्साह और प्रेरणा ने उन्हें मेहनत करना सिखाया। रामशरन के बड़े भाई पुलिस विभाग में एसआई के पद पर कार्यरत हैं।
गांव रठेरा में भी परिजनों को बधाइयां देने पहुंचे लोग
रामशरन राठौर मूल रूप से जनपद के गांव रठेरा के निवासी है। यहां इनके बाबा मास्टर हेतराम सिंह निवास करते हैं। रामशरन राठौर की सफलता की जानकारी होने पर गांव के लोगों ने मास्टर हेतराम राठौर के घर पहुंचकर बधाई दी।
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रामशरन ने जिले के पावर हाउस रोड स्थित गौतबुद्ध उच्चतर माध्यमिक विद्यालय से हाईस्कूल की परीक्षा 2005 में पास की। इसके बाद नगर के एकरसानंद इंटर कॉलेज से वर्ष 2007 में इंटरमीडिएट की परीक्षा पास की। वर्ष 2012 में बीटेक करने के बाद रामशरन ने दिव्यांगता को पीछे छोड़ उड़ान भरने का संकल्प लिया।
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वर्ष 2013 से 2016 तक रामशरन ने अहमदाबाद में कैग ऑडिटर के रूप में कार्य किया। इसके बाद वे पुणे में सेंट्रल एक्साइज इंस्पेक्टर के रूप में कार्यरत रहे। फरवरी 2017 में उन्होंने यहां भी नौकरी छोड़ दी और कन्नौज में डिवीजनल एकाउंटेंट ऑफीसर के पद पर चयन पाया।
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पांच साल की उम्र में परिवार को लगा था बड़ा झटका
रामशरन जब पांच साल के थे तब एक दिन उन्हें बुखार आया और एक डॉक्टर के उपचार के बाद वे दिव्यांग हो गए। उनके दाएं पैर ने काम करना बंद कर दिया। रामशरन के माता-पिता को लगा कि बेटे का जीवन बर्बाद हो गया। परिजनों के उत्साह और प्रेरणा ने उन्हें मेहनत करना सिखाया। रामशरन के बड़े भाई पुलिस विभाग में एसआई के पद पर कार्यरत हैं।
गांव रठेरा में भी परिजनों को बधाइयां देने पहुंचे लोग
रामशरन राठौर मूल रूप से जनपद के गांव रठेरा के निवासी है। यहां इनके बाबा मास्टर हेतराम सिंह निवास करते हैं। रामशरन राठौर की सफलता की जानकारी होने पर गांव के लोगों ने मास्टर हेतराम राठौर के घर पहुंचकर बधाई दी।