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मनरेगा मजदूर ने 87वां चुनाव लड़ने के लिए खरीदा पर्चा, 34 साल पूर्व एक नेता ने कही थी 'कड़वी बात'
Tue, 19 Mar 2019 02:25 PM IST
मुकेश कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
Published by: मुकेश कुमार
Updated Tue, 19 Mar 2019 02:25 PM IST
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निर्दलीय प्रत्याशी हसनुराम अंबेडकरी
- फोटो : अमर उजाला
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अगर दिल पर कोई बात लग जाए तो आदमी कुछ भी कर सकता। आगरा के खेरागढ़ निवासी हसनुराम अंबेडकरी इसका जीता जागता उदाहरण हैं। हसनुराम अब तक 86 चुनावों में पर्चा भर चुके हैं। इस बार भी लोकसभा चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे हैं।
हसनुराम ने नामांकन प्रक्रिया के पहले दिन मंगलवार को कलेक्ट्रेट आकर पर्चा खरीद लिया है। यह उनका 87वां चुनाव होगा, जिसके लिए वो नामांकन दाखिल करेंगे। वार्ड मेंबर से लेकर राष्ट्रपति तक के चुनाव में हसनुराम नामांकन दाखिल कर चुके हैं।
फतेहपुर सीकरी से लोकसभा चुनाव लड़ने के लिए नामांकन पत्र खरीदने वाले हसनुराम कोई अमीर व्यक्ति नहीं बल्कि मनरेगा मजदूर हैं। पिछले लोकसभा चुनाव में इन्होंने बिना बैनर पोस्टर के प्रचार किया। इस बार घर घर जाकर चुनाव प्रचार कर रहे हैं।
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हसनुराम ने नामांकन प्रक्रिया के पहले दिन मंगलवार को कलेक्ट्रेट आकर पर्चा खरीद लिया है। यह उनका 87वां चुनाव होगा, जिसके लिए वो नामांकन दाखिल करेंगे। वार्ड मेंबर से लेकर राष्ट्रपति तक के चुनाव में हसनुराम नामांकन दाखिल कर चुके हैं।
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फतेहपुर सीकरी से लोकसभा चुनाव लड़ने के लिए नामांकन पत्र खरीदने वाले हसनुराम कोई अमीर व्यक्ति नहीं बल्कि मनरेगा मजदूर हैं। पिछले लोकसभा चुनाव में इन्होंने बिना बैनर पोस्टर के प्रचार किया। इस बार घर घर जाकर चुनाव प्रचार कर रहे हैं।
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हसनुराम हर चुनाव के लिए नामांकन ऐसे ही नहीं करते। इसके पीछे बड़ी वजह है। हसनुराम बताते हैं कि वर्ष 1985 में एक पार्टी के नेता से इन्होंने विधानसभा चुनाव लड़ने के लिए टिकट मांगी तो उसने ऐसी बात कही, जो इनके दिल पर लग गई।
पार्टी के नेता ने इनसे कहा था, 'तुम्हें तुम्हारी बीवी तक नहीं पहचानती है तो कोई और क्या वोट देगा। यही बात हसनुराम को इतनी बुरी लगी कि इन्होंने राष्ट्रपति पद के लिए पर्चा दाखिल कर दिया। कागजी कमी से जब पर्चा खारिज हो गया था।
इसके बाद उन्होंने 1988 में खेरागढ़ से विधानसभा चुनाव लड़ा। तब से आज तक वो लगातार हर चुनाव में हाथ आजमा रहे हैं। आज तक किसी भी चुनाव में जीते नहीं हैं। पर हर बार की तरह हसनुराम इस बार अपनी जीत का दावा कर रहे हैं।
पार्टी के नेता ने इनसे कहा था, 'तुम्हें तुम्हारी बीवी तक नहीं पहचानती है तो कोई और क्या वोट देगा। यही बात हसनुराम को इतनी बुरी लगी कि इन्होंने राष्ट्रपति पद के लिए पर्चा दाखिल कर दिया। कागजी कमी से जब पर्चा खारिज हो गया था।
इसके बाद उन्होंने 1988 में खेरागढ़ से विधानसभा चुनाव लड़ा। तब से आज तक वो लगातार हर चुनाव में हाथ आजमा रहे हैं। आज तक किसी भी चुनाव में जीते नहीं हैं। पर हर बार की तरह हसनुराम इस बार अपनी जीत का दावा कर रहे हैं।