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लोकसभा चुनाव से पहले 'आपसी जंग' में बाजी हार गए भाजपा सांसद, मंत्री ने दी मात

Sat, 23 Mar 2019 04:03 AM IST
विक्रांत चतुर्वेदी चंद्रमोहन शर्मा, अमर उजाला, आगरा
चंद्रमोहन शर्मा, अमर उजाला, आगरा Published by: विक्रांत चतुर्वेदी Updated Sat, 23 Mar 2019 04:03 AM IST
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lok sabha elections 2019 BJP MP Ramshankar Katheria ticket cut in agra
भाजपा सांसद रामशंकर कठेरिया (फाइल) - फोटो : अमर उजाला
आगरा के वर्तमान भाजपा सांसद रामशंकर कठेरिया को एक साथ दो झटके लगे हैं। उनके समर्थकों को एक गम तो इस बात का है कि उन्हें टिकट नहीं मिला। दूसरा, यह कि उम्मीदवार प्रोफेसर एसपी सिंह बघेल को बनाया गया है।
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वही बघेल जिनसे कठेरिया का 36 का आंकड़ा खुल्लम खुल्ला रहा। सियासत की बिसात में दोनों ने न केवल एक दूसरे के खिलाफ चाल चली बल्कि सार्वजनिक मंचों से भी निशाने साधे। धनगर जाति के लोगों को एससी सर्टिफिकेट बनाए जाने के मुद्दे पर दोनों में ठनी हुई थी।
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कठेरिया ने जलेसर में सम्मेलन किया और उसमें बघेल को नहीं बुलाया। बघेल आगरा में हुए एक सम्मेलन में आए और कठेरिया पर निशाना साधा। तभी से माना जा रहा था कि दोनों में खुल्लम खुल्ला विवाद हो गया है। बात हाईकमान तक पहुंची थी। 
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जेपी नड्डा के सामने भी उठा मुद्दा

यूपी के प्रभारी जेपी नड्डा के सामने भी मुद्दा उठा था। लेकिन विवाद नहीं थमा। जिला पंचायत अध्यक्ष राकेश बघेल मैदान में कूद पड़े थे। माना जा रहा था कि उन्हें कठेरिया से शह मिली है। एसपी सिंह बघेल यही आरोप भी लगा रहे थे। शह और मात का खेल शुरू हो चुका था।

दोनों नेता के समर्थकों की नजरें इस पर लगीं थी कि बाजी किसके हाथ लगती है? फिरोजाबाद सीट से एसपी सिंह बघेल की पत्नी मधु बघेल का नाम चला। कठेरिया खेमे से राकेश बघेल दौड़ में शामिल हुए। बाजी इसी पर थी कि अगर मधु को टिकट मिला तो जीत एसपी सिंह और अगर राकेश को मिला तो कठेरिया की।

उधर, बाजी लगी रह गई। इधर, कठेरिया को झटका आगरा में ही लग गया। डर इस बात का था कि उनके करीबी राकेश पर वार होगा, लेकिन गिल्ली खुद कठेरिया की उड़ गई। अब बघेल के दोनों हाथों में लड्डू हैं। अगर वो चुनाव जीत जाते हैं तो केंद्र के मंत्री पद की दौड़ में शामिल होंगे। अगर हार जाते हैं तो भी प्रदेश के काबीना मंत्री बने रहेंगे।
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