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परिवार तो पालना ही है साहब--
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22एमएनपी-09-दिव्यांग शकील
- फोटो : MAINPURI
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मैनपुरी। लॉकडाउन भी एक दिव्यांग का हौसला नहीं डिगा सका। परिवार पालने की मजबूरी में उसने काम ही बदल दिया। ट्राई साइकिल से अब वह रोजाना गली गली घूमकर मास्क बेच रहा है।
आगरा रोड निवासी दिव्यांग शकील लॉकडाउन से पहले कबाड़ खरीदता था।
गलॉकडाउन में पुलिस ने उसको ठेला नहीं लगाने दिया। जब परिवार पालने की समस्या बढ़ी तो उसने ट्राई साइकिल से ही कमाई करने का फैसला किया। पहले तो उसने ट्राईसाइकिल से गलियों में घूमकर बिस्कुट और नमकीन बेची। अब एक महीने से वह गली गली घूमकर मास्क बेच रहा है। शकील का कहना है क्या करें साहब, परिवार तो पालना ही है। परिवार में बुजुर्ग माता, पिता, छोटे दो भाई, बहिन का खर्चा वही उठाता है। लॉकडाउन तो पता नहीं कब तक चलेगा। परिवार पालने के लिए उसको कुछ न कुछ तो करना ही पड़ेगा।
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आगरा रोड निवासी दिव्यांग शकील लॉकडाउन से पहले कबाड़ खरीदता था।
गलॉकडाउन में पुलिस ने उसको ठेला नहीं लगाने दिया। जब परिवार पालने की समस्या बढ़ी तो उसने ट्राई साइकिल से ही कमाई करने का फैसला किया। पहले तो उसने ट्राईसाइकिल से गलियों में घूमकर बिस्कुट और नमकीन बेची। अब एक महीने से वह गली गली घूमकर मास्क बेच रहा है। शकील का कहना है क्या करें साहब, परिवार तो पालना ही है। परिवार में बुजुर्ग माता, पिता, छोटे दो भाई, बहिन का खर्चा वही उठाता है। लॉकडाउन तो पता नहीं कब तक चलेगा। परिवार पालने के लिए उसको कुछ न कुछ तो करना ही पड़ेगा।
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