{"_id":"5e9dd33b8ebc3ed59e042a3d","slug":"lockdown-mainpuri-news-agr4385771174","type":"story","status":"publish","title_hn":"लॉकडाउन: मोक्ष के इंतजार में हैं अस्थियां","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
लॉकडाउन: मोक्ष के इंतजार में हैं अस्थियां
विज्ञापन
20एमएनपी-17-श्मशान घाट स्थित मोक्ष धाम में लॉकडाउन के चलते लटके अस्थि कलश
- फोटो : MAINPURI
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
मैनपुरी। लॉकडाउन ने पूरे जनजीवन को प्रभावित कर दिया है। लोग रोजमर्रा तो छोड़िए जरूरी कामों को भी पूरा नहीं कर पा रहे हैं। यही वजह है कि जिले में सैकड़ों लोगों की अस्थियां भी मोक्ष के इंतजार में हैं। परिजनों की लाख कोशिशों के बाद भी अपनों की अस्थियों का विसर्जन नहीं कर पा रहे हैं। अब उन्हें बस लॉकडाउन खुलने का इंतजार है।
सनातन धर्म में मृत्यु के बाद अंतिम संस्कार का बड़ा महत्व होता है। इसके बाद अस्थियों को गंगा या यमुना में विसर्जित किया जाता है। ऐसी मान्यता है कि अस्थियों का विसर्जन मृतक की आत्मा को मोक्ष दिलाने के लिए किया जाता है, लेकिन लॉकडाउन के दौरान मरने वाले लोगों की अस्थियों को मोक्ष का इंतजार है। दरअसल अब तक एक माह के लॉकडाउन में शहर से लेकर देहात तक सैकड़ों लोगों की मृत्यु हो चुकी है। उनकी अस्थियों का विसर्जन किया जाना है लेकिन, लॉकडाउन के चलते परिजनों को अस्थि विसर्जन के लिए जाने की अनुमति नहीं मिल रही है। जिले से अधिकांश लोग सोरों, फर्रुखाबाद, प्रयागराज में गंगा नदी में अस्थि विसर्जन के लिए जाते हैं। लॉकडाउन के चलते अभी इन अस्थियों को मोक्ष के लिए और इंतजार करना पड़ेगा।
केस: एक
करहल के गांव साज हजीपुर निवासी मनोज दुबे की माताजी उर्मिला देवी और चाचा राजेंद्र दुबे का स्वर्गवास लॉकडाउन के दौरान हो गया था। अब तक उनकी अस्थियों का विसर्जन नहीं किया सका, क्योंकि लॉकडाउन के चलते कहीं जाने की अनुमति नहीं है।
विज्ञापन
केस: दो
कटरा निवासी गुड्डी देवी का निधन एक सप्ताह पहले हो गया था। अंतिम संस्कार के बाद अब परिजनों को अस्थियां विसर्जित करने जाना है, लेकिन उन्हें भी लॉकडाउन के चलते जाने नहीं दिया गया। ऐसे में अस्थि विसर्जन नहीं हो सका।
विज्ञापन
सनातन धर्म में मृत्यु के बाद अंतिम संस्कार का बड़ा महत्व होता है। इसके बाद अस्थियों को गंगा या यमुना में विसर्जित किया जाता है। ऐसी मान्यता है कि अस्थियों का विसर्जन मृतक की आत्मा को मोक्ष दिलाने के लिए किया जाता है, लेकिन लॉकडाउन के दौरान मरने वाले लोगों की अस्थियों को मोक्ष का इंतजार है। दरअसल अब तक एक माह के लॉकडाउन में शहर से लेकर देहात तक सैकड़ों लोगों की मृत्यु हो चुकी है। उनकी अस्थियों का विसर्जन किया जाना है लेकिन, लॉकडाउन के चलते परिजनों को अस्थि विसर्जन के लिए जाने की अनुमति नहीं मिल रही है। जिले से अधिकांश लोग सोरों, फर्रुखाबाद, प्रयागराज में गंगा नदी में अस्थि विसर्जन के लिए जाते हैं। लॉकडाउन के चलते अभी इन अस्थियों को मोक्ष के लिए और इंतजार करना पड़ेगा।
विज्ञापन
केस: एक
करहल के गांव साज हजीपुर निवासी मनोज दुबे की माताजी उर्मिला देवी और चाचा राजेंद्र दुबे का स्वर्गवास लॉकडाउन के दौरान हो गया था। अब तक उनकी अस्थियों का विसर्जन नहीं किया सका, क्योंकि लॉकडाउन के चलते कहीं जाने की अनुमति नहीं है।
विज्ञापन
केस: दो
कटरा निवासी गुड्डी देवी का निधन एक सप्ताह पहले हो गया था। अंतिम संस्कार के बाद अब परिजनों को अस्थियां विसर्जित करने जाना है, लेकिन उन्हें भी लॉकडाउन के चलते जाने नहीं दिया गया। ऐसे में अस्थि विसर्जन नहीं हो सका।