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उधार के मजदूरों से घूम रहा फैक्टरियों का पहिया
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कोसीकलां में मजदूर न मिलने पर काम करता फैक्ट्री संचालक।संवाद
- फोटो : KOSI
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कोसीकलां। लॉकडाउन-4 में शर्तों के साथ फैक्टरियों का पहिया घूमा जरूर, लेकिन रफ्तार पकड़ना बाकी है। औद्योगिक एरिया में अब तक सिर्फ 25-30 फैक्टरियों में संचालन शुरू हुआ है। सबसे बड़ी दिक्कत प्रशिक्षित कर्मचारियों की है। लॉकडाउन खुलने का इंतजार कर प्रशिक्षित श्रमिक अपने घरों को लौट गए हैं। काम के लिए जो श्रमिक आ रहे हैं वह अप्रशिक्षित हैं। उद्यमियों को एक-दूसरे की फैक्टरी से श्रमिक उधार लेकर काम चलाना पड़ रहा है।
इसलिए पड़ रहा अधिक असर
दिल्ली, गाजियाबाद, फरीदाबाद व गुजरात से फैक्टरी संचालकों को कच्चा माल नहीं मिल रहा है। जिससे उत्पादन क्षमता प्रभावित हो रही है। बाजार बंद होने के कारण डिमांड भी न के बराबर है। जिसके कारण अधिकांश फैक्टरियां बंद पड़ी हैं।
खर्च ने कर्जदार बना दिया
ओम साई पैकेजिंग के संचालक नीरज अग्रवाल का कहना है कि लॉकडाउन ने फैक्टरी संचालकों की कमर तोड़ दी है। प्रशिक्षित मजदूरों के अभाव में संचालक खुद काम करने को मजबूर हैं। दस फीसदी मजदूरों के सहारे फैक्टरी चलाई जा रही है। जो फैक्टरी बंद पड़ी हैं, उनके मजदूरों को बुलाकर कार्य कराया जा रहा है। फैक्टरी बंद होने के बावजूद बिजली और चौकीदार के खर्च ने कर्जदार बना दिया है।
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काम हो रहा प्रभावित
जीवी इंडिया प्लास्ट संचालक विवेक बंसल का कहना है कि एक तो मजदूरों का अभाव है। दूसरे दिल्ली में प्रवेश बंद होने के कारण काम प्रभावित हो रहा है। न तो कच्चा माल मिल रहा है और न ही बाजार में डिमांड है। वह स्वयं अप्रशिक्षित कामगारों के साथ मशीन ऑपरेट कर माल तैयार कर रहे हैं। रिपेयरिंग का सामान न मिलने के कारण एक मशीन बंद पड़ी है।
ब्याज और बिजली के बिल में मिले रियायत
कोसी-कोटवन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के अध्यक्ष ध्रुव कुमार पांचाल का कहना है कि औद्योगिक क्षेत्र में 100 फैक्टरियां रेगुलर है तथा अधिकांश फैक्टरियों के मालिक दिल्ली एवं आसपास में रहते हैं। सीमाएं सील होने के कारण वह नहीं आ पा रहे हैं। जिससे औद्योगिक क्षेत्र में 25 से 30 फैक्टरियों का ही संचालन हो पा रहा है। सरकार को बिजली के बिल में रियायत देनी चाहिए। साथ ही फैक्टरियों के पुन: संचालन के लिए बैंक से मिलने वाले लोन में एक वर्ष तक ब्याज में राहत मिलनी चाहिए।
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इसलिए पड़ रहा अधिक असर
दिल्ली, गाजियाबाद, फरीदाबाद व गुजरात से फैक्टरी संचालकों को कच्चा माल नहीं मिल रहा है। जिससे उत्पादन क्षमता प्रभावित हो रही है। बाजार बंद होने के कारण डिमांड भी न के बराबर है। जिसके कारण अधिकांश फैक्टरियां बंद पड़ी हैं।
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खर्च ने कर्जदार बना दिया
ओम साई पैकेजिंग के संचालक नीरज अग्रवाल का कहना है कि लॉकडाउन ने फैक्टरी संचालकों की कमर तोड़ दी है। प्रशिक्षित मजदूरों के अभाव में संचालक खुद काम करने को मजबूर हैं। दस फीसदी मजदूरों के सहारे फैक्टरी चलाई जा रही है। जो फैक्टरी बंद पड़ी हैं, उनके मजदूरों को बुलाकर कार्य कराया जा रहा है। फैक्टरी बंद होने के बावजूद बिजली और चौकीदार के खर्च ने कर्जदार बना दिया है।
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काम हो रहा प्रभावित
जीवी इंडिया प्लास्ट संचालक विवेक बंसल का कहना है कि एक तो मजदूरों का अभाव है। दूसरे दिल्ली में प्रवेश बंद होने के कारण काम प्रभावित हो रहा है। न तो कच्चा माल मिल रहा है और न ही बाजार में डिमांड है। वह स्वयं अप्रशिक्षित कामगारों के साथ मशीन ऑपरेट कर माल तैयार कर रहे हैं। रिपेयरिंग का सामान न मिलने के कारण एक मशीन बंद पड़ी है।
ब्याज और बिजली के बिल में मिले रियायत
कोसी-कोटवन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के अध्यक्ष ध्रुव कुमार पांचाल का कहना है कि औद्योगिक क्षेत्र में 100 फैक्टरियां रेगुलर है तथा अधिकांश फैक्टरियों के मालिक दिल्ली एवं आसपास में रहते हैं। सीमाएं सील होने के कारण वह नहीं आ पा रहे हैं। जिससे औद्योगिक क्षेत्र में 25 से 30 फैक्टरियों का ही संचालन हो पा रहा है। सरकार को बिजली के बिल में रियायत देनी चाहिए। साथ ही फैक्टरियों के पुन: संचालन के लिए बैंक से मिलने वाले लोन में एक वर्ष तक ब्याज में राहत मिलनी चाहिए।