फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Agra News ›   lockdown, factory, open, labour, kosi

उधार के मजदूरों से घूम रहा फैक्टरियों का पहिया

Sat, 23 May 2020 04:48 PM IST
Agra Bureau आगरा ब्यूरो
Updated Sat, 23 May 2020 04:48 PM IST
विज्ञापन
lockdown, factory, open, labour, kosi
कोसीकलां में मजदूर न मिलने पर काम करता फैक्ट्री संचालक।संवाद - फोटो : KOSI
कोसीकलां। लॉकडाउन-4 में शर्तों के साथ फैक्टरियों का पहिया घूमा जरूर, लेकिन रफ्तार पकड़ना बाकी है। औद्योगिक एरिया में अब तक सिर्फ 25-30 फैक्टरियों में संचालन शुरू हुआ है। सबसे बड़ी दिक्कत प्रशिक्षित कर्मचारियों की है। लॉकडाउन खुलने का इंतजार कर प्रशिक्षित श्रमिक अपने घरों को लौट गए हैं। काम के लिए जो श्रमिक आ रहे हैं वह अप्रशिक्षित हैं। उद्यमियों को एक-दूसरे की फैक्टरी से श्रमिक उधार लेकर काम चलाना पड़ रहा है।
विज्ञापन

इसलिए पड़ रहा अधिक असर
दिल्ली, गाजियाबाद, फरीदाबाद व गुजरात से फैक्टरी संचालकों को कच्चा माल नहीं मिल रहा है। जिससे उत्पादन क्षमता प्रभावित हो रही है। बाजार बंद होने के कारण डिमांड भी न के बराबर है। जिसके कारण अधिकांश फैक्टरियां बंद पड़ी हैं।
विज्ञापन

खर्च ने कर्जदार बना दिया
ओम साई पैकेजिंग के संचालक नीरज अग्रवाल का कहना है कि लॉकडाउन ने फैक्टरी संचालकों की कमर तोड़ दी है। प्रशिक्षित मजदूरों के अभाव में संचालक खुद काम करने को मजबूर हैं। दस फीसदी मजदूरों के सहारे फैक्टरी चलाई जा रही है। जो फैक्टरी बंद पड़ी हैं, उनके मजदूरों को बुलाकर कार्य कराया जा रहा है। फैक्टरी बंद होने के बावजूद बिजली और चौकीदार के खर्च ने कर्जदार बना दिया है।
विज्ञापन
विज्ञापन

काम हो रहा प्रभावित
जीवी इंडिया प्लास्ट संचालक विवेक बंसल का कहना है कि एक तो मजदूरों का अभाव है। दूसरे दिल्ली में प्रवेश बंद होने के कारण काम प्रभावित हो रहा है। न तो कच्चा माल मिल रहा है और न ही बाजार में डिमांड है। वह स्वयं अप्रशिक्षित कामगारों के साथ मशीन ऑपरेट कर माल तैयार कर रहे हैं। रिपेयरिंग का सामान न मिलने के कारण एक मशीन बंद पड़ी है।

ब्याज और बिजली के बिल में मिले रियायत
कोसी-कोटवन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के अध्यक्ष ध्रुव कुमार पांचाल का कहना है कि औद्योगिक क्षेत्र में 100 फैक्टरियां रेगुलर है तथा अधिकांश फैक्टरियों के मालिक दिल्ली एवं आसपास में रहते हैं। सीमाएं सील होने के कारण वह नहीं आ पा रहे हैं। जिससे औद्योगिक क्षेत्र में 25 से 30 फैक्टरियों का ही संचालन हो पा रहा है। सरकार को बिजली के बिल में रियायत देनी चाहिए। साथ ही फैक्टरियों के पुन: संचालन के लिए बैंक से मिलने वाले लोन में एक वर्ष तक ब्याज में राहत मिलनी चाहिए।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed