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Agra News: एसएन में पहली बार हुई लिवर बायपास सर्जरी, मरीज के बचे 10 लाख रुपये
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एसएन मेडिकल कॉलेज में सर्जरी करने वाले डॉक्टर। संवाद
आगरा। एसएन मेडिकल कॉलेज में पहली बार लिवर बायपास की सर्जरी हुई है। इससे मरीज की जान बच गई है। अब मरीज के पास लिवर ट्रांसप्लांट कराने के लिए पर्याप्त समय है। एसएन में असाध्य रोग योजना के तहत निशुल्क ऑपरेशन हुआ है। निजी अस्पताल में इसका खर्च करीब 10 लाख रुपये है।
इंटरवेंशनल रेडियोलॉजिस्ट डॉ. पल्लव गुप्ता ने बताया कि शहर के नासिर अली (32) गंभीर हाल में एसएन में भर्ती हुए। इनके पेट में बार-बार पानी भर रहा था और रोजाना दो लीटर से अधिक पानी निकालना पड़ रहा था। नसों से रिसाव होने के चलते मुंह से खून भी आ रहा था। सीटी स्कैन कराने पर इनको लिवर सिरोसिस की परेशानी मिली। इसमें बायपास या फिर लिवर ट्रांसप्लांट ही बेहतर उपचार है। इसके ट्रांसजुगुलर इंट्राहेपेटिक पोर्टोसिस्टेमिक शंट (टिप्स) प्रक्रिया से लिवर बायपास किया। इसमें गर्दन के एक छोटा चीरा लगाकर दो नसों के बीच में स्टेंट डाला। इससे रक्त का प्रवाह लिवर को बायपास करते हुए सीधे हृदय की ओर हो गया। मरीज को डिस्चार्ज कर दिया है।
अब लिवर ट्रांसप्लांट कराने तक मरीज को दिक्कत नहीं होगी। ऑपरेशन में साढ़े तीन घंटे से अधिक समय लगा। यह ऑपरेशन पांच विभागों के विशेषज्ञों की निगरानी में हुआ। एसएन में पहली बार लिवर बायपास हुआ, निजी अस्पताल में मरीज के करीब 10 लाख रुपये खर्च हो जाते। प्राचार्य डॉ. प्रशांत गुप्ता ने बताया कि सुपर स्पेशियलिटी सेंटर बनने से अतिगंभीर बीमारियों के ऑपरेशन भी हो रहे हैं। इससे मरीजों को बड़ी राहत मिल रही है।
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इंटरवेंशनल रेडियोलॉजिस्ट डॉ. पल्लव गुप्ता ने बताया कि शहर के नासिर अली (32) गंभीर हाल में एसएन में भर्ती हुए। इनके पेट में बार-बार पानी भर रहा था और रोजाना दो लीटर से अधिक पानी निकालना पड़ रहा था। नसों से रिसाव होने के चलते मुंह से खून भी आ रहा था। सीटी स्कैन कराने पर इनको लिवर सिरोसिस की परेशानी मिली। इसमें बायपास या फिर लिवर ट्रांसप्लांट ही बेहतर उपचार है। इसके ट्रांसजुगुलर इंट्राहेपेटिक पोर्टोसिस्टेमिक शंट (टिप्स) प्रक्रिया से लिवर बायपास किया। इसमें गर्दन के एक छोटा चीरा लगाकर दो नसों के बीच में स्टेंट डाला। इससे रक्त का प्रवाह लिवर को बायपास करते हुए सीधे हृदय की ओर हो गया। मरीज को डिस्चार्ज कर दिया है।
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अब लिवर ट्रांसप्लांट कराने तक मरीज को दिक्कत नहीं होगी। ऑपरेशन में साढ़े तीन घंटे से अधिक समय लगा। यह ऑपरेशन पांच विभागों के विशेषज्ञों की निगरानी में हुआ। एसएन में पहली बार लिवर बायपास हुआ, निजी अस्पताल में मरीज के करीब 10 लाख रुपये खर्च हो जाते। प्राचार्य डॉ. प्रशांत गुप्ता ने बताया कि सुपर स्पेशियलिटी सेंटर बनने से अतिगंभीर बीमारियों के ऑपरेशन भी हो रहे हैं। इससे मरीजों को बड़ी राहत मिल रही है।
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