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हत्यारे पिता-पुत्रों को आजीवन कारावास
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मैनपुरी। थाना बरनाहल क्षेत्र में नौ साल पहले युवक की रंजिश के चलते हत्या करने वाले पिता सहित दो पुत्रों को को एफटीसी द्वितीय जज अवनीश गौतम ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। उनको 25-25 हजार रुपये का जुर्माना भी देना होगा। सजा सुनाए जाने के बाद तीनों को हिरासत में लेकर जेल भेजा गया है।
थाना बरनाहल के कसबा बरनाहल निवासी सुशांत शेखर शुक्ला की 22 मार्च 2011 की रात 8:30 बजे कस्बे के पास गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। हत्या की रिपोर्ट सुशांत के भाई राजीव कुमार शुक्ला ने कस्बे के ही ब्रजकिशोर उर्फ मुन्ना दुबे, उनके पुत्र अनुज दुबे उर्फ कबरा और कन्हैया दुबे के खिलाफ दर्ज कराई थी। पुलिस ने जांच के बाद तीनों के खिलाफ चार्जशीट कोर्ट में भेज दी।
मुकदमे की सुनवाई एफटीसी द्वितीय के जज अवनीश गौतम की कोर्ट में की गई। अभियोजन पक्ष की ओर से हुई गवाही में तीनों को सुशांत की हत्या करने का दोषी पाया गया। सहायक शासकीय अधिवक्ता प्रेमचंद्र निगम ने उनको कड़ी सजा देेने की दलील दी। एफटीसी जज ने तीनों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। उन पर 25-25 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। सजा सुनाए जाने के बाद तीनों को हिरासत में लेकर जेल भेजा गया है।
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तमंचा रखने में दो माह की सजा
सुशांत की हत्या अनुज ने तमंचे से गोली मारकर की थी। पुलिस ने अनुज की निशानदेही पर हत्या में प्रयोग किया गया तमंचा भी बरामद किया था। अनुज को तमंचा रखने के आरोप में एफटीसी जज ने दो महीने की सजा सुनाई है। उस पर एक हजार रुपया जुर्माना भी लगाया गया है।
जेल में रहकर लड़ा मुकदमा
अनुज को पुलिस ने घटना के बाद जेल भेजा। जेल में रहते हुए उसने जमानत पाने के लिए आवेदन किया। उसकी जमानत जिला जज की अदालत से खारिज हो गई। उसको हाईकोर्ट से भी जमानत नहीं मिली। उसको पूरा मुकदमा जेल में रहकर ही लड़ना पड़ा।
परेशान करने पर की थी हत्या
पुलिस के अनुसार अनुज की लड़की को सुशांत अकसर परेशान करता था। अनुज ने कई बार सुशांत को समझाया, लेकिन वह नहीं माना। इसके चलते अनुज दुबे ने अपने पिता ब्रज किशोर और भाई कन्हैया दुबे की मदद से सुशांत की गोली मारकर हत्या कर दी।
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थाना बरनाहल के कसबा बरनाहल निवासी सुशांत शेखर शुक्ला की 22 मार्च 2011 की रात 8:30 बजे कस्बे के पास गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। हत्या की रिपोर्ट सुशांत के भाई राजीव कुमार शुक्ला ने कस्बे के ही ब्रजकिशोर उर्फ मुन्ना दुबे, उनके पुत्र अनुज दुबे उर्फ कबरा और कन्हैया दुबे के खिलाफ दर्ज कराई थी। पुलिस ने जांच के बाद तीनों के खिलाफ चार्जशीट कोर्ट में भेज दी।
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मुकदमे की सुनवाई एफटीसी द्वितीय के जज अवनीश गौतम की कोर्ट में की गई। अभियोजन पक्ष की ओर से हुई गवाही में तीनों को सुशांत की हत्या करने का दोषी पाया गया। सहायक शासकीय अधिवक्ता प्रेमचंद्र निगम ने उनको कड़ी सजा देेने की दलील दी। एफटीसी जज ने तीनों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। उन पर 25-25 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। सजा सुनाए जाने के बाद तीनों को हिरासत में लेकर जेल भेजा गया है।
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तमंचा रखने में दो माह की सजा
सुशांत की हत्या अनुज ने तमंचे से गोली मारकर की थी। पुलिस ने अनुज की निशानदेही पर हत्या में प्रयोग किया गया तमंचा भी बरामद किया था। अनुज को तमंचा रखने के आरोप में एफटीसी जज ने दो महीने की सजा सुनाई है। उस पर एक हजार रुपया जुर्माना भी लगाया गया है।
जेल में रहकर लड़ा मुकदमा
अनुज को पुलिस ने घटना के बाद जेल भेजा। जेल में रहते हुए उसने जमानत पाने के लिए आवेदन किया। उसकी जमानत जिला जज की अदालत से खारिज हो गई। उसको हाईकोर्ट से भी जमानत नहीं मिली। उसको पूरा मुकदमा जेल में रहकर ही लड़ना पड़ा।
परेशान करने पर की थी हत्या
पुलिस के अनुसार अनुज की लड़की को सुशांत अकसर परेशान करता था। अनुज ने कई बार सुशांत को समझाया, लेकिन वह नहीं माना। इसके चलते अनुज दुबे ने अपने पिता ब्रज किशोर और भाई कन्हैया दुबे की मदद से सुशांत की गोली मारकर हत्या कर दी।