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Agra News: शिक्षिका को जिंदा जलाने के चार दोषियों को आजीवन कारावास
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कासगंज। नौकरी की जलन ने एक शिक्षिका की जिंदगी छीन ली। शिक्षामित्र से सहायक अध्यापक बनी महिला को गांव के ही दबंगों ने जिंदा जला दिया। विशेष न्यायाधीश अनुसूचित जाति-जनजाति धनंजय कुमार के न्यायालय ने चार दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। कोर्ट ने दोषियों पर 22 हजार का जुर्माना लगाया। गंजडुंडवारा के गांव मधुपुरा निवासी रेनू देवी गांव में शिक्षामित्र के पद पर नौकरी करती थी। बाद में उसकी सहायक शिक्षिका के पद पर नौकरी लग गई। 2 अक्टूबर 2016 को वह अपने पति प्रमोद उपाध्याय के साथ घर पर सो रही थीं। गांव के ही शेखर तिवारी, शंकर दयाल, राजकुमार, ओमकार और अविनाश उर्फ भोले ने घर में घुसकर उन पर मिट्टी का तेल डालकर आग लगा दी। इसमें में रेनू झुलस गई। उसे पहले रजमऊ, फिर कासगंज और अलीगढ़ होते हुए दिल्ली के जीटीबी अस्पताल ले जाया गया। उसने 13 अक्टूबर 2016 को उपचार के दौरान दम तोड़ दिया।
मृतका के पति ने 23 नवंबर 2016 को गंजडुंडवारा थाने में तहरीर दी। इसमें आरोप लगाया कि गांव की संगीता और शेखर तिवारी शिक्षा मित्र बनना चाहते थे, लेकिन मेरिट में पिछड़ने के कारण चयन नहीं हो सका। इसी रंजिश में उसकी पत्नी को जिंदा जला दिया गया। पुलिस ने तहरीर के आधार पर प्राथमिकी दर्ज कर ली।
विवेचना के दौरान ओमकार का नाम हटा दिया गया। शेष चार अभियुक्तों के खिलाफ चार्जशीट अदालत में दाखिल की गई। कोर्ट में चारों का दोष सिद्ध हो गया। कोर्ट ने दोष सिद्ध होने पर शेखर तिवारी, राजकुमार, अविनाश उर्फ भोले और चंद्रपाल को धारा 302 के तहत आजीवन कारावास की सजा सुनाई। प्रत्येक पर 5000 रुपये का जुर्माना लगाया। धारा 452 के तहत प्रत्येक को 3 वर्ष के कारावास तथा 500 रुपये के अर्थदंड से दंडित किया। धारा 147 के तहत प्रत्येक को 2 वर्ष के कारावास से दंडित किया गया। जेल में बिताई गई अवधि सजा में समायोजित की जाएगी।
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मृतका के पति ने 23 नवंबर 2016 को गंजडुंडवारा थाने में तहरीर दी। इसमें आरोप लगाया कि गांव की संगीता और शेखर तिवारी शिक्षा मित्र बनना चाहते थे, लेकिन मेरिट में पिछड़ने के कारण चयन नहीं हो सका। इसी रंजिश में उसकी पत्नी को जिंदा जला दिया गया। पुलिस ने तहरीर के आधार पर प्राथमिकी दर्ज कर ली।
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विवेचना के दौरान ओमकार का नाम हटा दिया गया। शेष चार अभियुक्तों के खिलाफ चार्जशीट अदालत में दाखिल की गई। कोर्ट में चारों का दोष सिद्ध हो गया। कोर्ट ने दोष सिद्ध होने पर शेखर तिवारी, राजकुमार, अविनाश उर्फ भोले और चंद्रपाल को धारा 302 के तहत आजीवन कारावास की सजा सुनाई। प्रत्येक पर 5000 रुपये का जुर्माना लगाया। धारा 452 के तहत प्रत्येक को 3 वर्ष के कारावास तथा 500 रुपये के अर्थदंड से दंडित किया। धारा 147 के तहत प्रत्येक को 2 वर्ष के कारावास से दंडित किया गया। जेल में बिताई गई अवधि सजा में समायोजित की जाएगी।
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