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प्रस्ताव तो ‘लीला’ का, अासार ‘महाभारत’ के
ब्यूरो, अमर उजाला आगरा।
Updated Mon, 31 Aug 2015 01:39 AM IST
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ताजमहल के पास लीला होटल के लिए भूखंड के भू परिवर्तन को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। आगरा विकास प्राधिकरण की बोर्ड बैठक में सोमवार को इसका प्रस्ताव रखा जाना है। इससे पहले पंचशील सहाकारी आवास समिति ने इस पर आपत्ति लगा दी है। समिति ने विवादित जमीन पर मानचित्र के स्वीकृति के प्रस्ताव को अनुचित बताया है।
सोमवार को प्राधिकरण बोर्ड की बैठक है। इसमें लगभग 17 बिंदुओं पर चर्चा होनी है। इसमें सबसे महत्वपूर्ण प्रस्ताव 8 व 9 हैं। जिसमें ताजगंज स्थित शिल्पग्राम के सामने लीला होटल के लिए मौजा बसई मुस्तकिल के खसरा संख्या 603, 604, 605, 606/1, 606/2, 621 व 622 भू-उपयोग आवासीय से होटल में परिवर्तन तथा इन्हीं भूखंडों सहित खसरा संख्या 616, 617, 618 भूखंडों पर होटल निर्माण की स्वीकृति का प्रस्ताव है। मगर, इससे पहले ही पंचशील सहकारी आवास समिति के अधिकृत प्रतिनिधि मानपाल सिंह ने इस पर आपत्ति लगा दी है। उनका कहना है कि समिति के कुछ निष्कासित सदस्यों द्वारा मेसर्स एस्कोन इंडिया प्रा. लि. के डायरेक्टर श्रीधर एवं उनके प्रतिनिधियों से मिलकर विक्रय विलेख लिखवा दिया गया था। बाद में एस्कोन इंडिया प्रा. लि. ने लीला ग्रुप ऑफ होटल के मालिकों को गुमराह कर उसका नामंत्रण उनके नाम करा दिया। इस संबंध में समिति की तरफ से तहसील सदर में वाद दायर है। इसकी सुनवाई अगले महीने की 14 तारीख है। ऐसे में इस विवाद भूखंड के संबंध में कोई फैसला नहीं लिया जा सकता।
इधर, एडीए ने होटल का मानचित्र पास करने की पूरी तैयारी कर ली है। बोर्ड बैठक में इस प्रस्ताव को पास कराने के लिए तीन सदस्यीय कमेटी की सिफारिशों को भी संलग्न किया है। मगर, विभाग यह भूल गया कि इस भूखंड के परीक्षण के लिए जो कमेटी गठित की गई थी, वह भी नियम विरुद्ध थी। आगरा महायोजना-2021 के तहत बनाए गए जोनिंग रेगुलेशन के अनुसार, इस कमेटी में मुख्य नगर एवं ग्राम नियोजक, विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष अथवा नामित अधिकारी तथा बोर्ड के एक गैरसरकारी सदस्य का होना जरूरी है। मगर, लीला होटल को लाभ पहुंचाने वाली कमेटी में नगर नियोजक इश्तियाक अहमद, नगर एवं ग्राम नियोजन विभाग के सहयुक्त नियोजक अनूप श्रीवास्तव और क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण अधिकारी एके आनंद तो थे लेकिन बोर्ड के किसी सदस्य को कमेटी में नहीं रखा गया। ऐसे में माना जा रहा है कि बोर्ड बैठक के दौरान इस प्रस्ताव पर ‘महाभारत’ हो सकती है।
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सोमवार को प्राधिकरण बोर्ड की बैठक है। इसमें लगभग 17 बिंदुओं पर चर्चा होनी है। इसमें सबसे महत्वपूर्ण प्रस्ताव 8 व 9 हैं। जिसमें ताजगंज स्थित शिल्पग्राम के सामने लीला होटल के लिए मौजा बसई मुस्तकिल के खसरा संख्या 603, 604, 605, 606/1, 606/2, 621 व 622 भू-उपयोग आवासीय से होटल में परिवर्तन तथा इन्हीं भूखंडों सहित खसरा संख्या 616, 617, 618 भूखंडों पर होटल निर्माण की स्वीकृति का प्रस्ताव है। मगर, इससे पहले ही पंचशील सहकारी आवास समिति के अधिकृत प्रतिनिधि मानपाल सिंह ने इस पर आपत्ति लगा दी है। उनका कहना है कि समिति के कुछ निष्कासित सदस्यों द्वारा मेसर्स एस्कोन इंडिया प्रा. लि. के डायरेक्टर श्रीधर एवं उनके प्रतिनिधियों से मिलकर विक्रय विलेख लिखवा दिया गया था। बाद में एस्कोन इंडिया प्रा. लि. ने लीला ग्रुप ऑफ होटल के मालिकों को गुमराह कर उसका नामंत्रण उनके नाम करा दिया। इस संबंध में समिति की तरफ से तहसील सदर में वाद दायर है। इसकी सुनवाई अगले महीने की 14 तारीख है। ऐसे में इस विवाद भूखंड के संबंध में कोई फैसला नहीं लिया जा सकता।
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इधर, एडीए ने होटल का मानचित्र पास करने की पूरी तैयारी कर ली है। बोर्ड बैठक में इस प्रस्ताव को पास कराने के लिए तीन सदस्यीय कमेटी की सिफारिशों को भी संलग्न किया है। मगर, विभाग यह भूल गया कि इस भूखंड के परीक्षण के लिए जो कमेटी गठित की गई थी, वह भी नियम विरुद्ध थी। आगरा महायोजना-2021 के तहत बनाए गए जोनिंग रेगुलेशन के अनुसार, इस कमेटी में मुख्य नगर एवं ग्राम नियोजक, विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष अथवा नामित अधिकारी तथा बोर्ड के एक गैरसरकारी सदस्य का होना जरूरी है। मगर, लीला होटल को लाभ पहुंचाने वाली कमेटी में नगर नियोजक इश्तियाक अहमद, नगर एवं ग्राम नियोजन विभाग के सहयुक्त नियोजक अनूप श्रीवास्तव और क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण अधिकारी एके आनंद तो थे लेकिन बोर्ड के किसी सदस्य को कमेटी में नहीं रखा गया। ऐसे में माना जा रहा है कि बोर्ड बैठक के दौरान इस प्रस्ताव पर ‘महाभारत’ हो सकती है।
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