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लठामार होली के लिए जाइए तैयार, हुरियारिनों की मार से बचने को मजबूत बनाई जा रहीं ढाल
Thu, 07 Mar 2019 07:04 PM IST
मुकेश कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मथुरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मथुरा
Published by: मुकेश कुमार
Updated Thu, 07 Mar 2019 07:04 PM IST
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नंदगांव में लठामार होली के लिए ढाल तैयार करते हुरियारे
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बरसाना-नंदगांव की विश्व प्रसिद्ध लठामार होली के बस कुछ ही दिन शेष हैं। हुरियारे, हुरियारिन सभी ने अपनी-अपनी तैयारियां शुरू कर दी हैं। नंदगांव के हुरियारे बरसाना की हुरियारिनों की लाठियों के प्रहार से बचने के लिए तैयारियां कर रहे हैं। कोई ढाल को तेल लगा उसे सजा रहा है, तो कोई नई धोती, बगलबंदी, पाग तैयार करा रहा है। युवाओं के साथ बूढ़े और बच्चों में भी लठामार होली को लेकर उत्साह है।
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ब्राह्मण समाज के घर-घर में लठामार होली की तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं। कस्बे से बाहर रहने वाले हुरियारों ने अपनी टिकट बुक करा ली हैं। अमर उजाला की टीम ने जब हुरियारों के घरों में दस्तक दी तो अधिकांश लोग होली की तैयारियों में व्यस्त नजर आए।
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घर में ढाल पर सरसों का तेल लगा रहे प्रकाश गोस्वामी ने बताया कि ढाल का चमड़ा सूख जाने पर लाठियों की चोट से चटक जाता है, इससे ढाल टूट जाती है। ढाल की सुरक्षा के लिए दो-तीन बार तेल लगा कर उन्हें सुखाया जा रहा है। बरसाना की हुरियारिनों से टक्कर जो लेनी है।
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लाठियों का प्रहार सहने को पौष्टिक भोजन जरूरी
दीपक ने बताया कि पिचकारियों को तैयार किया जा रहा है। बरसाना वालों के स्वागत के लिए टेसू के फूलों का रंग बनाया जा रहा है। विजय एवं सोनू ने बताया कि नए वस्त्रों पर पड़ा टेसू के फूलों का रंग मन को बेहद शांति देता है। इसलिए नए वस्त्र तैयार कराए जा रहे हैं।
80 वर्षीय हुरियारे नवल किशोर गोस्वामी ने बताया कि हुरियारिनों की लाठियों के प्रहार को ढालों पर सहने के लिए पौष्टिक, सात्विक भोजन जरूरी है। वे वर्ष भर इसका ख्याल रखते हैं। इसीलिए वे 20 से 30 मिनट तक 10-10 हुरियारिनों के वारों को अपनी ढाल पर आसानी से सह लेते हैं।
68 वर्षीय ओमप्रकाश गोस्वामी बताते हैं कि आजकल हुरियारे बुजुर्गों की सलाह का पालन नहीं करते हैं, इसलिए वे देर तक ढाल भी नहीं सह पाते। पौष्टिक भोजन ही लें। फास्ट फूड और जंक फूड लेना ठीक नहीं है। विजेंद्र नंदन शास्त्री बताते हैं कि हुरियारों को लगातार व्यायाम भी करते रहना चाहिए। इसी से ढाल को सहने और अधिक देर तक खेलने की शक्ति बढ़ती है।
80 वर्षीय हुरियारे नवल किशोर गोस्वामी ने बताया कि हुरियारिनों की लाठियों के प्रहार को ढालों पर सहने के लिए पौष्टिक, सात्विक भोजन जरूरी है। वे वर्ष भर इसका ख्याल रखते हैं। इसीलिए वे 20 से 30 मिनट तक 10-10 हुरियारिनों के वारों को अपनी ढाल पर आसानी से सह लेते हैं।
68 वर्षीय ओमप्रकाश गोस्वामी बताते हैं कि आजकल हुरियारे बुजुर्गों की सलाह का पालन नहीं करते हैं, इसलिए वे देर तक ढाल भी नहीं सह पाते। पौष्टिक भोजन ही लें। फास्ट फूड और जंक फूड लेना ठीक नहीं है। विजेंद्र नंदन शास्त्री बताते हैं कि हुरियारों को लगातार व्यायाम भी करते रहना चाहिए। इसी से ढाल को सहने और अधिक देर तक खेलने की शक्ति बढ़ती है।